आवेश उत्पत्ति का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धान्त (Electronic Theory of Origin of Charge)
आवेश उत्पत्ति का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धान्त
प्रत्येक पदार्थ अणुओं से मिलकर बना होता है और प्रत्येक अणु एक या एक से अधिक परमाणुओं से मिलकर बना होता है। प्रत्येक परमाणु का समस्त भार उसके केन्द्रीय भाग में केन्द्रित होता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहते हैं।
नाभिक में दो प्रकार के कण होते हैं:
- प्रोटॉन (Proton): प्रोटॉनों में धनावेश होता है।
- न्यूट्रॉन (Neutron): न्यूट्रॉनों में किसी प्रकार का आवेश नहीं होता (उदासीन)।
नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन (Electrons) विभिन्न स्थिर कक्षाओं (Fixed Orbits) में चक्कर लगाते रहते हैं। इलेक्ट्रॉनों में ऋणावेश होता है। प्रत्येक इलेक्ट्रॉन का ऋणावेश परिमाण में प्रत्येक प्रोटॉन के धनावेश के बराबर होता है।
इसके अतिरिक्त प्रत्येक परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है। इसका मतलब यह हुआ कि प्रत्येक परमाणु में धनावेश की कुल मात्रा ऋणावेश की कुल मात्रा के बराबर होती है। अतः परमाणु दो विपरीत प्रकार के आवेशित कणों के विद्यमान होने के बावजूद विद्युत् रूपेण उदासीन होता है।
बद्ध और मुक्त इलेक्ट्रॉन:
- बद्ध इलेक्ट्रॉन (Bound Electrons): जो इलेक्ट्रॉन नाभिक के निकट कक्षाओं में परिभ्रमण करते रहते हैं, उन्हें बद्ध इलेक्ट्रॉन कहते हैं। ये नाभिक से दृढ़ता पूर्वक बँधे होते हैं, क्योंकि नाभिक और इन इलेक्ट्रॉनों के मध्य लगने वाला आकर्षण बल बहुत प्रबल होता है।
- मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons): ज्यों-ज्यों इलेक्ट्रॉन की नाभिक से दूरी बढ़ती जाती है, आकर्षण बल का मान कम होता जाता है। अन्तिम कक्षा में इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बल का मान बहुत कम होता है, अतः बाह्य ऊर्जा की सूक्ष्म मात्रा से इलेक्ट्रॉन अपने नाभिक से मुक्त होकर पृष्ठ पर गति करते रहते हैं। इन इलेक्ट्रॉनों को मुक्त इलेक्ट्रॉन कहते हैं। यही मुक्त इलेक्ट्रॉन वस्तुओं के आवेशित या विद्युन्मय होने के लिये जिम्मेदार होते हैं।
घर्षण-विद्युत् की व्याख्या (Explanation of Frictional Electricity)
जब दो पदार्थों को आपस में रगड़ा जाता है तो एक पदार्थ में से इलेक्ट्रॉन (जो दूसरे पदार्थ की अपेक्षा कम बल से बद्ध होते हैं) निकलकर दूसरे पदार्थ में चले जाते हैं। इस प्रकार पहले पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों की कमी हो जाती है और दूसरे पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता हो जाती है।
अतः पहला पदार्थ धनावेशित तथा दूसरा पदार्थ ऋणावेशित हो जाता है।
प्रमुख उदाहरण:
- काँच और रेशम: जब काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ा जाता है, तो काँच से इलेक्ट्रॉन निकलकर रेशम में चले जाते हैं। अतः काँच की छड़ धनावेशित तथा रेशम का कपड़ा ऋणावेशित हो जाता है।
- एबोनाइट और ऊनी कपड़ा: जब एबोनाइट की छड़ को ऊनी कपड़े से रगड़ा जाता है, तो ऊनी कपड़े से इलेक्ट्रॉन निकलकर एबोनाइट में चले जाते हैं। अतः एबोनाइट की छड़ ऋणावेशित तथा ऊनी कपड़ा धनावेशित हो जाता है।
विशेष बात: ध्यान रहे कि रगड़ने की इस क्रिया में एक पदार्थ में जितना धनावेश उत्पन्न होता है, दूसरे पदार्थ में ठीक उतना ही ऋणावेश भी उत्पन्न होता है।
आवेशित करने पर पदार्थ के द्रव्यमान में परिवर्तन
नोट:
- धनावेशित वस्तु: इलेक्ट्रॉनों की कमी के कारण (अर्थात् इलेक्ट्रॉनों के निकल जाने के कारण) पदार्थ धनावेशित हो जाता है। चूँकि इलेक्ट्रॉन में द्रव्यमान होता है, इसलिए धनावेशित पदार्थ का द्रव्यमान कुछ कम हो जाता है।
- ऋणावेशित वस्तु: इलेक्ट्रॉनों की अधिकता के कारण (अर्थात् और इलेक्ट्रॉनों के प्रवेश कर जाने के कारण) पदार्थ ऋणावेशित हो जाता है। अतः ऋणावेशित पदार्थ का द्रव्यमान कुछ बढ़ जाता है।
निष्कर्ष: इस प्रकार किसी पदार्थ को आवेशित करने पर उसका द्रव्यमान परिवर्तित हो जाता है।
आवेश उत्पत्ति का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धान्त से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न
वस्तुएँ आवेशित कैसे होती हैं? (वस्तुओं के आवेशन का कारण)
प्रश्न 1: किसी वस्तु के आवेशित होने के लिए मुख्य रूप से कौन-सा कण उत्तरदायी होता है और क्यों?
उत्तर: किसी वस्तु के आवेशित होने के लिए मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉन (Electron) उत्तरदायी होता है। इसका कारण यह है कि इलेक्ट्रॉन परमाणु की सबसे बाहरी कक्षा में स्थित होते हैं और नाभिक से कम बल (कम आकर्षण) द्वारा बँधे होते हैं। बाह्य ऊर्जा मिलने पर वे आसानी से मुक्त होकर एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में स्थानांतरित हो सकते हैं। इसके विपरीत, प्रोटॉन नाभिक के भीतर बहुत प्रबल बल से बंधे होते हैं, इसलिए वे स्थानांतरित नहीं होते।
प्रश्न 2: जब दो पदार्थों को आपस में रगड़ा जाता है, तो कौन-सा पदार्थ धनावेशित और कौन-सा ऋणावेशित होता है?
उत्तर:
- जिस पदार्थ से इलेक्ट्रॉन निकलते हैं (अर्थात् जिसमें इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है), वह धनावेशित (Positively Charged) हो जाता है।
- जिस पदार्थ में इलेक्ट्रॉन प्रवेश करते हैं (अर्थात् जिसमें इलेक्ट्रॉनों की अधिकता होती है), वह ऋणावेशित (Negatively Charged) हो जाता है।
प्रश्न 3: काँच की छड़ को रेशम से तथा एबोनाइट की छड़ को ऊनी कपड़े से रगड़ने पर उन पर कौन-सा आवेश आता है?
उत्तर:
- काँच और रेशम: काँच की छड़ से इलेक्ट्रॉन निकलकर रेशम में चले जाते हैं, इसलिए काँच की छड़ धनावेशित तथा रेशम का कपड़ा ऋणावेशित होता है।
- एबोनाइट और ऊना कपड़ा: ऊनी कपड़े से इलेक्ट्रॉन निकलकर एबोनाइट में चले जाते हैं, इसलिए एबोनाइट की छड़ ऋणावेशित तथा ऊनी कपड़ा धनावेशित होता है।
2. बद्ध एवं मुक्त इलेक्ट्रॉन तथा परमाणु की उदासीनता
प्रश्न 4: परमाणु में विपरीत प्रकार के आवेशित कण (प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन) होने के बावजूद सामान्य स्थिति में परमाणु विद्युत् रूपेण उदासीन (Neutral) क्यों होता है?
उत्तर: सामान्य स्थिति में परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या और इलेक्ट्रॉनों की संख्या बिल्कुल बराबर होती है। चूँकि एक इलेक्ट्रॉन पर ऋणावेश का परिमाण, एक प्रोटॉन पर धनावेश के परिमाण के बराबर होता है, इसलिए कुल धनावेश और कुल ऋणावेश एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। इसी कारण परमाणु विद्युत् रूपेण उदासीन होता है।
प्रश्न 5: बद्ध इलेक्ट्रॉन (Bound Electrons) और मुक्त इलेक्ट्रॉन (Free Electrons) में क्या अंतर है?
उत्तर:
- बद्ध इलेक्ट्रॉन: जो इलेक्ट्रॉन नाभिक के पास की कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, वे नाभिक के प्रबल आकर्षण बल द्वारा दृढ़ता से बँधे रहते हैं। इन्हें बद्ध इलेक्ट्रॉन कहते हैं।
- मुक्त इलेक्ट्रॉन: जो इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर की बाह्यतम कक्षा में होते हैं, उन पर नाभिक का आकर्षण बल बहुत कमजोर होता है। ये थोड़ी सी बाह्य ऊर्जा प्राप्त करके मुक्त होकर पदार्थ के पृष्ठ पर गति कर सकते हैं। इन्हें मुक्त इलेक्ट्रॉन कहते हैं।
3. आवेशित करने पर द्रव्यमान में परिवर्तन (महत्वपूर्ण प्रश्न)
प्रश्न 6: क्या किसी वस्तु को आवेशित करने पर उसके द्रव्यमान (Mass) में कोई परिवर्तन होता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: हाँ, किसी वस्तु को आवेशित करने पर उसके द्रव्यमान में परिवर्तन होता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनों में निश्चित द्रव्यमान होता है:
- धनावेशित वस्तु: जब वस्तु धनावेशित होती है, तो उससे इलेक्ट्रॉन बाहर निकलते हैं। इलेक्ट्रॉनों के निकलने के कारण वस्तु का द्रव्यमान कुछ कम हो जाता है।
- ऋणावेशित वस्तु: जब वस्तु ऋणावेशित होती है, तो उसमें अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन प्रवेश करते हैं। इलेक्ट्रॉनों के जुड़ने के कारण वस्तु का द्रव्यमान कुछ बढ़ जाता है।
प्रश्न 7: रगड़ने की क्रिया द्वारा आवेशन में उत्पन्न आवेश के परिमाण के संबंध में क्या नियम है?
उत्तर: घर्षण (रगड़ने) की क्रिया में एक पदार्थ में जितना धनावेश उत्पन्न होता है, दूसरे पदार्थ में ठीक उतना ही ऋणावेश भी उत्पन्न होता है। अर्थात् कुल आवेश सदैव संरक्षित रहता है।
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आवेश उत्पत्ति का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धान्त
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