आवेशों के दो प्रकार (Two Kinds of Charges)
आवेशों के प्रकार (Types of Charges) की जानकारी के लिए हम निम्न प्रयोग करते हैं—
प्रयोग 1 (Experiment 1)
काँच की एक छड़ लेते हैं। उसे रेशम के कपड़े से रगड़कर धागे से लटका देते हैं। अब काँच की एक अन्य छड़ लेते हैं, उसे भी रेशम के कपड़े से रगड़ते हैं तथा धागे से लटकी हुई छड़ के पास लाते हैं। हम पाते हैं कि धागे से लटकी हुई छड़ प्रतिकर्षित हो जाती है।
प्रयोग 2 (Experiment 2)
एबोनाइट की एक छड़ लेते हैं। उसे ऊनी कपड़े या बिल्ली की खाल से रगड़कर प्रयोग 1 की भाँति धागे से लटका देते हैं । अब एबोनाइट की एक अन्य छड़ को ऊनी कपड़े या बिल्ली की खाल से रगड़कर पहली छड़ के पास लाते हैं। ऐसा करने से पहली छड़ प्रतिकर्षित हो जाती है।
प्रयोग 3 (Experiment 3)
अब काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़कर धागे से लटका देते हैं तथा एबोनाइट की छड़ को ऊनी कपड़े या बिल्ली की खाल से रगड़कर काँच की छड़ के पास लाते हैं। ऐसा करने से दोनों छड़ें एक-दूसरे की ओर आकर्षित होती हैं।
उपयुक्त प्रयोगों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि काँच की छड़ में उत्पन्न आवेश एबोनाइट की छड़ में उत्पन्न आवेश से भिन्न प्रकार का है। प्रारम्भ में काँच में उत्पन्न आवेश को काँचभ (Vitreous) आवेश तथा एबोनाइट की छड़ में उत्पन्न आवेश को रेजिनी (Resinous) आवेश से सम्बोधित किया गया।
अमेरिकी वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन (Benjamin Franklin, 1706-1790) ने काँचभ आवेश को धनवेश (Positive Charge) तथा रेजिनी आवेश को ऋणवेश (Negative charge) कहा। आवेश के नामकरण की यह परिपाटी आज भी प्रचलित है।
इस प्रकार आवेश दो प्रकार के होते हैं—
- (i) धनवेश—काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ने पर काँच की छड़ में उत्पन्न आवेश को धनवेश कहते हैं।
- (ii) ऋणवेश—एबोनाइट की छड़ को ऊनी कपड़े या बिल्ली की खाल से रगड़ने पर एबोनाइट की छड़ में उत्पन्न आवेश को ऋणवेश कहते हैं।
उपयुक्त दर्शाये गये प्रयोग 1 में काँच की दोनों छड़ों में धनवेश था। दोनों छड़ें पास लाने पर एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं। इससे सिद्ध होता है कि धनवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
प्रयोग 2 में एबोनाइट की दोनों छड़ों में ऋणवेश था। दोनों छड़ें पास लाने पर एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं। इससे सिद्ध होता है कि ऋणवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
प्रयोग 3 में काँच की छड़ में धनवेश तथा एबोनाइट की छड़ में ऋणवेश था। काँच की छड़ के पास एबोनाइट की छड़ को लाने पर वे एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं। इससे सिद्ध होता है कि धनवेश और ऋणवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
उपयुक्त प्रयोगों के आधार पर निम्न निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं—
- (i) सजातीय आवेशों में प्रतिकर्षषण होता है तथा (ii) विजातीय आवेशों में आकर्षण होता है।
ध्यान रहे कि काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ने पर काँच की छड़ में धनवेश तो उत्पन्न होता ही है, साथ ही साथ रेशम के कपड़े में भी उतने ही परिमाण का ऋणवेश उत्पन्न हो जाता है। इसी तरह एबोनाइट की छड़ को ऊनी कपड़े से रगड़ने पर एबोनाइट की छड़ में ऋणवेश तथा ऊनी कपड़े में धनवेश उत्पन्न हो जाता है।
घर्षण-विद्युत् से सम्बन्धित प्रयोगों के आधार पर नीचे एक सारणी (Table) दी जा रही है, जिसमें दो स्तम्भ हैं। धनवेश स्तम्भ में लिखी वस्तु को उसके सामने ऋणवेश स्तम्भ में लिखी वस्तु से रगड़ने पर पहली वस्तु में धनवेश तथा दूसरी वस्तु में ऋणवेश उत्पन्न हो जाता है। एक ही स्तम्भ में लिखी आवेशित वस्तुएँ एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करती हैं, जबकि विभिन्न स्तम्भ में लिखी आवेशित वस्तुएँ एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं।
| धनवेश | ऋणवेश |
|---|---|
| काँच की छड़ | रेशम का कपड़ा |
| ऊनी कपड़ा | ऐम्बर, एबोनाइट, रबड़ की छड़ |
| ऊनी कोट | प्लास्टिक सीट |
| ऊनी गलीचा | रबर के जूते |
📚 आवेशों के प्रकार (Types of Charges) – प्रश्नोत्तर
प्र.1: काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ने पर उस पर कौन सा आवेश उत्पन्न होता है?
उत्तर: धन आवेश (Positive Charge)
प्र.2: एबोनाइट की छड़ को ऊनी कपड़े या बिल्ली की खाल से रगड़ने पर उस पर कौन सा आवेश उत्पन्न होता है?
उत्तर: ऋण आवेश (Negative Charge)
प्र.3: सजातीय आवेशों और विजातीय आवेशों के मध्य क्रमशः क्या क्रिया होती है?
उत्तर: सजातीय आवेशों में प्रतिकर्षषण तथा विजातीय आवेशों में आकर्षण होता है।
प्र.4: काँचभ (Vitreous) और रेजिनी (Resinous) आवेशों को क्रमशः धन आवेश और ऋण आवेश नाम किसने दिया था?
उत्तर: अमेरिकी वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन (Benjamin Franklin) ने।
प्र.5: यदि काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ा जाए, तो रेशम के कपड़े पर किस प्रकार का आवेश उत्पन्न होगा?
उत्तर: उतने ही परिमाण का ऋण आवेश उत्पन्न होगा।
और भी पढ़ें –
घर्षण विद्युत् क्या है? इतिहास, परिभाषा और महत्वपूर्ण तथ्य | Frictional Electricity in Hindi
परिनालिका के कारण चुंबकीय क्षेत्र – परिभाषा, गुण और ध्रुवता
नर्म लोहे और फौलाद (इस्पात) के चुम्बकीय गुणों की तुलना | Physics Notes
अवकलन (Differentiation) – परिभाषा, नियम और सभी महत्वपूर्ण सूत्र | Math Notes
प्रकाश का व्यतिकरण (Interference of Light): परिभाषा, प्रकार और गणितीय व्याख्या
यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग: व्यतिकरण की संपूर्ण व्याख्या (Young’s Double Slit Experiment)
Play quiz here 👇👇👇
Join Our Physics Community!
Latest Physics Notes, PGT/NET Prep & Daily MCQs directly on your WhatsApp.
100% Private & Secure | No Phone Number Required