यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग (Young’s Double Slit Experiment)
सन 1802 में ब्रिटिश वैज्ञानिक थॉमस यंग ने प्रकाश के व्यतिकरण (Interference of light) की घटना को प्रदर्शित करने के लिए एक ऐतिहासिक प्रयोग किया, जिसे ‘यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग’ कहा जाता है ।
प्रयोग का विवरण:
यंग ने एक एकवर्णीय प्रकाश-स्रोत (Monochromatic source) का उपयोग किया, जिसके सामने एक संकीर्ण स्लिट ‘S’ रखी। इससे कुछ दूरी पर दो बहुत पास-पास स्थित समानांतर स्लिट्स $$S_1$$ और $$S_2$$ रखी गईं। ये स्लिट्स कला-सम्बद्ध स्रोतों (Coherent sources) की तरह कार्य करती हैं । इनसे कुछ दूरी पर एक पर्दा ‘XY’ रखा जाता है, जिस पर व्यतिकरण प्रतिरूप (Interference pattern) प्राप्त होता है ।
मुख्य प्रेक्षण (Observations):
- दीप्त और अदीप्त फ्रिंज: पर्दे पर एकांतर क्रम में चमकीली (Bright) और काली (Dark) पट्टियाँ दिखाई देती हैं, जिन्हें दीप्त और अदीप्त फ्रिंज कहते हैं ।
- तीव्रता: सभी दीप्त फ्रिंजों की तीव्रता समान (अधिकतम) और सभी अदीप्त फ्रिंजों की तीव्रता समान (लगभग शून्य) होती है ।
- चौड़ाई: सभी फ्रिंजों की चौड़ाई समान होती है ।
फ्रिंज-चौड़ाई (Fringe-width):
यदि स्लिट्स के बीच की दूरी d हो और स्लिट्स से पर्दे की दूरी D हो, तो फ्रिंज-चौड़ाई $$\beta$$ का सूत्र है :
$$\beta = \frac{\lambda D}{d}$$
जहाँ $$\lambda$$ प्रयुक्त प्रकाश का तरंगदैर्घ्य (wavelength) है ।
ऊर्जा संरक्षण का नियम:
यंग का प्रयोग ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुकूल है। व्यतिकरण की घटना में ऊर्जा नष्ट नहीं होती, बल्कि उसका पुनर्वितरण (redistribution) होता है। अदीप्त स्थानों की ऊर्जा दीप्त स्थानों पर स्थानांतरित हो जाती है, जिससे कुल ऊर्जा नियत रहती है ।
यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग: अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1: यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में व्यतिकरण प्रतिरूप (Interference pattern) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: यंग के प्रयोग में पर्दे पर एकांतर क्रम में प्राप्त होने वाली चमकीली (दीप्त) और काली (अदीप्त) पट्टियों के समूह को व्यतिकरण प्रतिरूप कहते हैं ।
प्रश्न 2: फ्रिंज-चौड़ाई (Fringe-width) का सूत्र क्या है और यह किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर: फ्रिंज-चौड़ाई का सूत्र $$\beta = \frac{\lambda D}{d}$$ है, जहाँ $$\lambda$$ प्रकाश का तरंगदैर्घ्य, D स्लिट से पर्दे की दूरी, और d दोनों स्लिट्स के बीच की दूरी है । यह प्रत्यक्ष रूप से तरंगदैर्घ्य और पर्दे की दूरी के समानुपाती होती है, जबकि स्लिट्स के बीच की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
प्रश्न 3: क्या यंग का प्रयोग ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: हाँ, यंग का प्रयोग ऊर्जा संरक्षण के नियम का पूरी तरह पालन करता है । व्यतिकरण में ऊर्जा नष्ट नहीं होती, बल्कि इसका पुनर्वितरण होता है। अदीप्त फ्रिंजों (जहाँ तीव्रता न्यूनतम होती है) से ऊर्जा दीप्त फ्रिंजों (जहाँ तीव्रता अधिकतम होती है) की ओर स्थानांतरित हो जाती है, जिससे पर्दे पर कुल ऊर्जा नियत रहती है ।
प्रश्न 4: यदि यंग के प्रयोग में एकवर्णीय प्रकाश के स्थान पर श्वेत प्रकाश का प्रयोग करें, तो क्या होगा?
उत्तर: श्वेत प्रकाश के उपयोग से पर्दे पर रंगीन फ्रिंज प्राप्त होंगे, क्योंकि श्वेत प्रकाश में मौजूद अलग-अलग रंगों के तरंगदैर्घ्य भिन्न-भिन्न होते हैं। इससे व्यतिकरण प्रतिरूप धुंधला हो जाएगा और पट्टियाँ एक-दूसरे पर अतिव्याप्त (overlap) हो जाएंगी ।
प्रश्न 5: व्यतिकरण प्रतिरूप में दीप्त और अदीप्त फ्रिंजों की तीव्रता कैसी होती है?
उत्तर: यंग के प्रयोग में प्रत्येक दीप्त फ्रिंज की तीव्रता समान (अधिकतम) होती है, जबकि प्रत्येक अदीप्त फ्रिंज की तीव्रता भी समान (लगभग शून्य) होती है ।
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