चुंबकीय क्षेत्र में स्थित चुम्बक को घुमाने में किया गया कार्य तथा स्थितिज ऊर्जा
चुंबकीय क्षेत्र में स्थित चुम्बक को घुमाने में किया गया कार्य तथा स्थितिज ऊर्जा (Work done in Deflecting a Magnet in Magnetic Field and Potential Energy)
मानलो M चुंबकीय आघूर्ण का एक दण्ड-चुम्बक B तीव्रता के एकसमान क्षेत्र में रखा हुआ है। यदि M और B के बीच का कोण θ हो, तो
चुम्बक पर कार्य करने वाले प्रत्यानयन बलयुग्म का आघूर्ण τ = MB sin θ
अतः चुम्बक को अल्प कोण dθ से घुमाने में किया गया कार्य
dW = τ . dθ = MB sin θ dθ
इस प्रकार चुम्बक को θ कोण से घुमाने में किया गया कार्य W = ∫ dW = ∫₀ᶿ MB sin θ dθ …(1)
या W = MB ∫₀ᶿ sin θ dθ = MB [- cos θ]₀ᶿ
या W = MB [- cos θ + cos 0]
या W = MB (1 – cos θ) …(2)
यही चुंबकीय क्षेत्र में स्थित चुम्बक को θ कोण से घुमाने के लिए किये गये कार्य का व्यंजक है।
उदाहरण 1
प्रश्न: एक चुम्बक का चुंबकीय आघूर्ण 2 ऐम्पियर × मीटर² है। यह 0.1 टेस्ला के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के अनुदिश स्थित है। इसे चुंबकीय क्षेत्र के लम्बवत् घुमाने में कितना कार्य करना पड़ेगा?
हल — सूत्र — W = MB (1 – cos θ)
दिया है — M = 2 ऐम्पियर × मीटर², B = 0.1 टेस्ला तथा θ = 90°
सूत्र में मान रखने पर, W = 2 × 0.1 (1 – cos 90°)
= 0.2 जूल। (उत्तर)
स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक
किसी दण्ड-चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा उसे किसी मानक स्थिति से वर्तमान स्थिति तक घुमाने में किये गये कार्य के बराबर होती है।
मानक स्थिति को θ = π/2 लिया जाता है जो कि क्षेत्र की लम्बवत् दिशा है।
मानलो M चुंबकीय आघूर्ण का एक दण्ड-चुम्बक B तीव्रता के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र से θ कोण बनाते हुए रखा गया है।
चुम्बक पर कार्य करने वाले प्रत्यानयन बलयुग्म का आघूर्ण τ = MB sin θ
अतः चुम्बक को अल्पकोण dθ से घुमाने में किया गया कार्य dW = MB sin θ dθ
इस प्रकार चुम्बक को θ = π/2 स्थिति से θ स्थिति तक घुमाने में किया गया कार्य
W = $$∫_{π/2}^{\theta} MB sin θ dθ$$ = $$MB ∫_{π/2}^{\theta} sin θ dθ = MB [- cos θ]_{π/2}^{\theta}$$
= -MB [cos θ – cos π/2]
W = -MB cos θ
यही कार्य दण्ड-चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा के बराबर होता है। अतः दण्ड-चुम्बक की स्थितिज ऊर्जा
U = -MB cos θ …(3)
या U = -M . B
विशेष स्थितियाँ:
स्थिति I. यदि θ = 0° हो, तो U = -MB cos 0° = -MB
जो कि न्यूनतम है। इस स्थिति में चुम्बक स्थायी संतुलन में होता है।
स्थिति II. यदि θ = 90° हो, तो U = -MB cos 90° = 0
इस स्थिति में स्थितिज ऊर्जा शून्य है। यही कारण है कि स्थिति θ = π/2 = 90° को मानक स्थिति माना जाता है।
स्थिति III. यदि θ = 180° हो, तो U = -MB cos 180° = MB, जो कि अधिकतम है। इस स्थिति में चुम्बक अस्थायी संतुलन में होता है।
उदाहरण 2
प्रश्न: एक दण्ड चुम्बक का चुंबकीय आघूर्ण 0.3 ऐम्पियर × मीटर² है। इसे 0.4 टेस्ला के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के समान्तर विपरीत दिशा में रखने पर उसकी स्थितिज ऊर्जा कितनी होगी?
हल — सूत्र — U = -MB cos θ
दिया है — M = 0.3 ऐम्पियर × मीटर², B = 0.4 टेस्ला तथा θ = 180°
सूत्र में मान रखने पर U = -0.3 × 0.4 cos 180°
= 0.12 जूल। (उत्तर)
चुंबकीय क्षेत्र में कार्य तथा स्थितिज ऊर्जा – न्यूमेरिकल (Numerical Examples)
उदाहरण 1:
एक चुम्बक का चुंबकीय आघूर्ण 2 ऐम्पियर × मीटर² है। यह 0.1 टेस्ला के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के अनुदिश स्थित है। इसे चुंबकीय क्षेत्र के लम्बवत् घुमाने में कितना कार्य करना पड़ेगा?
हल —
सूत्र: W = MB (1 – cos θ)
दिया है:
• M = 2 ऐम्पियर × मीटर²
• B = 0.1 टेस्ला
• θ = 90°
सूत्र में मान रखने पर:
W = 2 × 0.1 (1 – cos 90°)
= 0.2 जूल (उत्तर)
उदाहरण 2:
एक दण्ड चुम्बक का चुंबकीय आघूर्ण 0.3 ऐम्पियर × मीटर² है। इसे 0.4 टेस्ला के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के समान्तर विपरीत दिशा में रखने पर उसकी स्थितिज ऊर्जा कितनी होगी?
हल —
सूत्र: U = -MB cos θ
दिया है:
• M = 0.3 ऐम्पियर × मीटर²
• B = 0.4 टेस्ला
• θ = 180°
सूत्र में मान रखने पर:
U = -0.3 × 0.4 cos 180°
= 0.12 जूल (उत्तर)
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