एकसमान चुंबकीय क्षेत्र तथा दण्ड-चुम्बक पर बल आघूर्ण
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र (Uniform Magnetic Field)
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उस चुंबकीय क्षेत्र को कहते हैं, जिसके प्रत्येक बिन्दु पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का मान तथा उसकी दिशा एकसमान होती है। एकसमान क्षेत्र में खींची गई बल रेखाएँ परस्पर समान्तर होती हैं ।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की बल रेखाएँ दण्ड-चुम्बक के चुंबकीय क्षेत्र की बल रेखाओं के समान ही होती हैं। किन्तु पृथ्वी का आकार विस्तृत होने से किसी भी स्थान पर ये बल रेखाएँ लगभग समान्तर होती हैं। अतः किसी भी स्थान पर पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र एकसमान चुंबकीय क्षेत्र होता है। इन बल रेखाओं की दिशा भौगोलिक दक्षिणी ध्रुव से भौगोलिक उत्तरी ध्रुव की ओर होती है।
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में दण्ड-चुम्बक पर बल आघूर्ण (Torque on a Bar Magnet in a Uniform Magnetic Field)
मानलो NS एक दण्ड-चुम्बक है, जिसकी प्रभावी लम्बाई 2l तथा ध्रुव-प्राबल्य m है। यह B तीव्रता के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के साथ थीटा (θ) कोण बनाते हुए रखा गया है। इसके प्रत्येक ध्रुव पर mB बल कार्य करेगा। ये बल परिमाण में बराबर तथा विपरीत दिशा में होने के कारण बलयुग्म का निर्माण करेंगे। यह बलयुग्म चुम्बक को क्षेत्र के समान्तर लाने का प्रयास करता है। इसे प्रत्यानयन बलयुग्म (Restoring Couple) कहते हैं ।
अतः प्रत्यानयन बलयुग्म का आघूर्ण = एक बल × उनके बीच की लम्बवत् दूरी
τ = m B × NP …(1)
किन्तु Δ NPS में,
sin θ = NP / NS
या NP = NS sin θ
= 2l sin θ
समीकरण (1) में मान रखने पर,
τ = m × 2l . B sin θ …(2)
परन्तु m × 2l = M = चुंबकीय आघूर्ण
समीकरण (2) में मान रखने पर,
τ = MB sin θ …(3)
यही बल आघूर्ण τ का व्यंजक है।
समीकरण (3) में, यदि B = 1 तथा sin θ = 1 या θ = 90° हो, तो
τ = M
अतः किसी चुम्बक का चुंबकीय आघूर्ण उस प्रत्यानयन बलयुग्म के आघूर्ण के बराबर होता है जो चुम्बक पर उस समय कार्य करता है जब चुम्बक को एकांक तीव्रता के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के लम्बवत् रखा जाता है।
मात्राक – τ = MB sin θ से, M = τ / B sin θ (sin θ का मात्रक नहीं है)
अतः: M का मात्रक = (τ का मात्रक) / (B का मात्रक)
C.G.S. पद्धति में, M का मात्रक = (डाइन-सेमी) / ऑरेस्टेड = डाइन-सेमी प्रति ऑरेस्टेड है।
S.I. पद्धति में, M का मात्रक = (न्यूटन × मीटर) / (न्यूटन / (ऐम्पियर × मीटर)) = ऐम्पियर × मीटर² (Am²)
इस प्रकार S.I. पद्धति में M का मात्रक ऐम्पियर-मीटर² (Am²) है। इसे जूल/टेस्ला या जूल-मीटर²/वेबर के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है।
विमीय सूत्र —
M का मात्रक = ऐम्पियर × मीटर²
M का विमीय सूत्र = [A] × [L²] = [M⁰L²T⁰A]
नोट : M = m × 2l से, m = M / 2l
अतः: m का मात्रक = (M का मात्रक) / (l का मात्रक) = (ऐम्पियर × मीटर²) / मीटर = ऐम्पियर × मीटर
तथा m का विमीय सूत्र = [M⁰LT⁰A]
समीकरण (3) को सदिश रूप में निम्न प्रकार से लिखा जा सकता है—
τ = M × B
जहाँ τ की दिशा, M और B की दिशा के लम्बवत् होती है।
स्वतन्त्रतापूर्वक लटका हुआ दण्ड-चुम्बक सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता H दक्षिण से उत्तर की ओर निर्देशित होती है। जब कोई चुम्बक स्वतन्त्रतापूर्वक लटका दिया जाता है, तो उस पर पृथ्वी की क्षैतिज तीव्रता के कारण एक बलयुग्म कार्य करता है। यह बलयुग्म चुम्बक को घुमाकर H के समान्तर ले आता है।
नोट :
(i) एकसमान चुंबकीय क्षेत्र पर स्थित दण्ड-चुम्बक पर कार्य करने वाला नेट बल शून्य होता है :
क्षेत्र B के कारण उत्तरी ध्रुव पर कार्य करने वाला बल = mB, इसी तरह क्षेत्र B के कारण दक्षिणी ध्रुव पर कार्य करने वाला बल = -mB
अतः चुम्बक पर कार्य करने वाला नेट बल = mB – mB = 0 स्पष्ट है कि एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा चुम्बक किसी प्रकार के बल का अनुभव नहीं करता है। फलस्वरूप उसमें स्थानान्तरणीय गति नहीं होती है।
(ii) जब चुम्बक को असमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो वह बल आघूर्ण के साथ-साथ एक नेट बल का भी अनुभव करता है।
उदाहरण
प्रश्न: एक छोटी चुंबकीय सुई, जिसका चुंबकीय आघूर्ण 4.8 × 10⁻² जूल/टेस्ला है, 3.0 × 10⁻² टेस्ला के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के साथ 30° का कोण बनाती है। चुंबकीय सुई पर कार्य करने वाले बल आघूर्ण का परिमाण तथा दिशा ज्ञात कीजिए।
हल — सूत्र — τ = MB sin 30°
दिया है — M = 4.8 × 10⁻² जूल/टेस्ला, B = 3.0 × 10⁻² टेस्ला तथा θ = 30°
सूत्र में मान रखने पर τ = 4.8 × 10⁻² × 3.0 × 10⁻² sin 30°
= 14.4 × 10⁻⁴ × 1/2
= 7.2 × 10⁻⁴ न्यूटन-मीटर
इसकी दिशा M और B के सम्मलित तल के लम्बवत् होगी। (उत्तर)
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एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में बल आघूर्ण – न्यूमेरिकल (Numerical)
प्रश्न:
एक छोटी चुंबकीय सुई, जिसका चुंबकीय आघूर्ण 4.8 × 10⁻² जूल/टेस्ला है, 3.0 × 10⁻² टेस्ला के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के साथ 30° का कोण बनाती है। चुंबकीय सुई पर कार्य करने वाले बल आघूर्ण का परिमाण तथा दिशा ज्ञात कीजिए।
हल —
सूत्र: τ = MB sin θ
दिया है:
• M = 4.8 × 10⁻² जूल/टेस्ला
• B = 3.0 × 10⁻² टेस्ला
• θ = 30°
सूत्र में मान रखने पर:
τ = 4.8 × 10⁻² × 3.0 × 10⁻² sin 30°
= 14.4 × 10⁻⁴ × (1/2)
= 7.2 × 10⁻⁴ न्यूटन-मीटर
दिशा: इसकी दिशा M और B के सम्मलित तल के लम्बवत् होगी।
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