पृथक चुंबक विधि (Separate Magnet Method)
(1) पृथक चुंबक विधि (Separate Magnet Method)—इस विधि में दोलन चुंबकत्वमापी को समायोजित करके प्रत्येक चुम्बक को उसमें रखकर बारी-बारी से दोलन कराते हैं तथा दोलन काल ज्ञात करते हैं।
मानलो पहले चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण $$M_1$$, जड़त्व-आघूर्ण $$I_1$$ तथा दोलनकाल $$T_1$$ है, तब
$$T_1 = 2\pi \sqrt{\frac{I_1}{M_1H}}, \quad (\text{जहाँ } H = \text{पृथ्वी की क्षैतिज तीव्रता})$$
या
$$T_1^2 = \frac{4\pi^2 I_1}{M_1H} \quad \text{या} \quad M_1H = \frac{4\pi^2 I_1}{T_1^2} \quad \dots(1)$$
इसी तरह मानलो दूसरे चुम्बक का चुम्बकीय आघूर्ण $$M_2$$, जड़त्व-आघूर्ण $$I_2$$ तथा दोलनकाल $$T_2$$ है।
अतः:
$$T_2 = 2\pi \sqrt{\frac{I_2}{M_2H}} \quad \text{या} \quad T_2^2 = \frac{4\pi^2 I_2}{M_2H}$$
या
$$M_2H = \frac{4\pi^2 I_2}{T_2^2} \quad \dots(2)$$
समीकरण (1) में समीकरण (2) का भाग देने पर,
$$\frac{M_1H}{M_2H} = \frac{4\pi^2 I_1}{T_1^2} \times \frac{T_2^2}{4\pi^2 I_2}$$
या
$$\frac{M_1}{M_2} = \frac{I_1}{I_2} \times \frac{T_2^2}{T_1^2} \quad \dots(3)$$
इस प्रकार यदि $$I_1, I_2, T_1$$ और $$T_2$$ के मान ज्ञात हों, तो समीकरण (3) की सहायता से $$\frac{M_1}{M_2}$$ का मान ज्ञात किया जा सकता है।
यदि दोनों चुम्बकों के द्रव्यमान, लम्बाई और चौड़ाई समान हों, तो $$I_1 = I_2$$
अतः: समीकरण (3) से,
$$\frac{M_1}{M_2} = \frac{T_2^2}{T_1^2} \quad \dots(4)$$
सावधानियाँ —
- (i) उपकरण के नजदीक चुम्बक या चुम्बकीय पदार्थ नहीं होना चाहिये।
- (ii) उपकरण को एक बार समायोजित करने के बाद प्रयोग समाप्ति तक हिलाना नहीं चाहिये।
- (iii) दोलन गिनते समय बॉक्स के दरवाजे को बन्द कर लेना चाहिये।
- (iv) प्रत्येक चुम्बक को रकाब में इस प्रकार रखना चाहिये कि उसका उत्तरी ध्रुव भौगोलिक उत्तर की ओर रहे अन्यथा धागे में ऐंठन उत्पन्न हो जायेगा।
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पृथक चुंबक विधि – प्रश्न और उत्तर (Q&A)
प्रश्न 1: दोलन चुंबकत्वमापी की ‘पृथक चुंबक विधि’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर — इस विधि का मुख्य उद्देश्य दो अलग-अलग चुंबकों के चुंबकीय आघूर्णों (Magnetic Moments – $$M_1$$ और $$M_2$$) की तुलना करना है।
प्रश्न 2: पृथक चुंबक विधि द्वारा चुंबकीय आघूर्णों की तुलना करने के लिए अंतिम व्यंजक (सूत्र) क्या प्राप्त होता है?
उत्तर — यदि दोनों चुंबकों के जड़त्व-आघूर्ण क्रमशः $$I_1$$ व $$I_2$$ हों और उनके दोलन काल क्रमशः $$T_1$$ व $$T_2$$ हों, तो उनके चुंबकीय आघूर्णों का अनुपात निम्नलिखित सूत्र (समीकरण 3) द्वारा ज्ञात किया जाता है:
$$\frac{M_1}{M_2} = \frac{I_1}{I_2} \times \frac{T_2^2}{T_1^2}$$
प्रश्न 3: यदि दोनों प्रयोगों में प्रयुक्त चुंबक समरूप (identical) हों, तो चुंबकीय आघूर्णों की तुलना का सूत्र किस प्रकार सरल हो जाता है?
उत्तर — यदि दोनों चुंबकों के द्रव्यमान, लंबाई और चौड़ाई समान हों, तो उनके जड़त्व-आघूर्ण भी समान होंगे ($$I_1 = I_2$$)। इस स्थिति में, सूत्र (समीकरण 4) सरल होकर निम्न प्रकार हो जाता है:
$$\frac{M_1}{M_2} = \frac{T_2^2}{T_1^2}$$
प्रश्न 4: इस प्रयोग को करते समय कौन-सी प्रमुख सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
उत्तर — पाठ्यांक (reading) लेते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखना आवश्यक है:
(i) उपकरण के नजदीक कोई अन्य चुंबक या चुंबकीय पदार्थ नहीं होना चाहिए।
(ii) उपकरण को एक बार समायोजित करने के बाद प्रयोग की समाप्ति तक हिलाना नहीं चाहिए।
(iii) दोलन गिनते समय बॉक्स के दरवाजे को बंद कर लेना चाहिए ताकि हवा के झोंकों से दोलन प्रभावित न हों।
(iv) प्रत्येक चुंबक को रकाब (stirrup) में इस प्रकार रखना चाहिए कि उसका उत्तरी ध्रुव भौगोलिक उत्तर की ओर रहे, अन्यथा धागे में ऐंठन उत्पन्न हो जाएगी।
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