चुम्बकत्व का परमाणु मॉडल – प्रत्येक पदार्थ असंख्य परमाणुओं से मिलकर बना होता है। प्रत्येक परमाणु में नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन विभिन्न स्थायी कक्षाओं में परिक्रमण करते हैं। इस गति को इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति (Orbital motion) कहते हैं। इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन अपनी धुरी पर भी घूमते रहते हैं। इसे चक्रण गति (Spin motion) कहते हैं।
कक्षीय गति एवं चक्रण गति करता हुआ प्रत्येक इलेक्ट्रॉन एक धारा लूप अथवा चुम्बकीय द्वि-ध्रुव की भाँति व्यवहार करता है, जिसमें चुम्बकीय आघूर्ण होता है। यह पाया गया है कि कक्षीय गति की अपेक्षा चक्रण गति का चुम्बकीय आघूर्ण में अधिक योगदान (लगभग 90%) रहता है। प्रत्येक परमाणु का चुम्बकीय आघूर्ण उसके सभी इलेक्ट्रॉनों के चुम्बकीय आघूर्णों के सदिश योगफल के बराबर होता है।
इस आधार पर अनुचुम्बकीय, प्रतिचुम्बकीय एवं लौह-चुम्बकीय पदार्थों की व्याख्या की जाती है।
(i) अनुचुम्बकीय पदार्थ (Paramagnetic Substance)
ये ऐसे पदार्थ होते हैं जिनके परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या विषम होती है, इन पदार्थों के प्रत्येक परमाणु में ऐसे इलेक्ट्रॉनों की अधिकता होती है, जिनका चक्रण एक ही दिशा में होता है। अतः प्रत्येक परमाणु का एक नेट चुम्बकीय आघूर्ण होता है। फलस्वरूप प्रत्येक परमाणु एक लघु चुम्बक की भाँति व्यवहार करता है, जिसे परमाणवीय चुम्बक कहते हैं। बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में ये परमाणवीय चुम्बक अनियमित रूप से अभिविन्यासित (Oriented) रहते हैं। फलस्वरूप पदार्थ का परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है। अतः अनुचुम्बकीय पदार्थ चुम्बकीय गुण का प्रदर्शन नहीं करते।
जब किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ को किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो प्रत्येक परमाणवीय चुम्बक पर बलयुग्म कार्य करता है जो चुम्बक को घुमाकर क्षेत्र के समान्तर लाने का प्रयास करता है, किन्तु परमाणुओं का ऊष्मीय विक्षोभ (Thermal Agitation) इसका विरोध करता है। बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र की तीव्रता बढ़ाने पर परमाणु चुम्बकीय-क्षेत्र के समान्तर अभिविन्यासित होने लगते हैं। फलस्वरूप पदार्थ में चुम्बकत्व उत्पन्न होने लगता है। ऊष्मीय विक्षोभ के कारण अनुचुम्बकीय पदार्थों में उत्पन्न अनुचुम्बकत्व बहुत क्षीण होता है। ताप बढ़ाने पर अनुचुम्बकत्व का गुण घटने लगता है।
(ii) प्रतिचुम्बकीय पदार्थ (Diamagnetic Substance)
ये ऐसे पदार्थ होते हैं जिनके परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या सम होती है। प्रत्येक परमाणु में दो-दो इलेक्ट्रॉन एक-एक युग्म बनाते हैं। प्रत्येक युग्म के इलेक्ट्रॉनों के चक्रण की दिशा एक-दूसरे के विपरीत होती है। अतः प्रत्येक युग्म के इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे के चुम्बकीय आघूर्ण निरस्त कर देते हैं। फलस्वरूप प्रत्येक परमाणु का नेट चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है। जब किसी प्रतिचुम्बकीय पदार्थ को किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो इलेक्ट्रॉनों के प्रत्येक युग्म के इलेक्ट्रॉनों की चक्रण गति विपरीत होने के कारण एक इलेक्ट्रॉन का कोणीय वेग बढ़ जाता है तथा दूसरे का कोणीय वेग घट जाता है। फलस्वरूप एक इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध धारा का मान बढ़ जाता है तथा दूसरे से सम्बद्ध धारा का मान घट जाता है। इस प्रकार प्रत्येक युग्म के इलेक्ट्रॉनों का परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण शून्य नहीं हो पाता। अतः प्रत्येक परमाणु में परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण प्रेरित हो जाता है जिसकी दिशा बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा के विपरीत होती है। इस प्रकार प्रतिचुम्बकीय पदार्थ बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की विपरीत दिशा में थोड़ा-सा चुम्बकित हो जाता है।
📌 नोट: यदि प्रतिचुम्बकीय पदार्थ के ताप को परिवर्तित कर दिया जाये तो प्रतिचुम्बकत्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि ऊष्मीय प्रक्षोभ इलेक्ट्रॉनों की चक्रण गति को प्रभावित नहीं कर पाता।
(iii) लौह-चुम्बकीय पदार्थ (Ferromagnetic Substance)
अनुचुम्बकीय पदार्थों की भाँति लौह-चुम्बकीय पदार्थों का प्रत्येक परमाणु एक छोटे चुम्बक (परमाणवीय चुम्बक) की भाँति व्यवहार करता है जिसमें नेट चुम्बकीय आघूर्ण होता है। लौह-चुम्बकीय पदार्थों के परमाणुओं में ऐसी जटिल अन्योन्य क्रियाएँ होती हैं जिनके कारण अनेक परमाणवीय चुम्बक मिलकर कई समूह बना लेते हैं। प्रत्येक समूह में परमाणवीय चुम्बकों का चुम्बकीय आघूर्ण एक ही दिशा में संरेखित रहता है। परमाणवीय चुम्बकों के इन समूहों को डोमेन (Domains) कहते हैं। बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में भी प्रत्येक डोमेन चुम्बक की भाँति व्यवहार करता है।
बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र की अनुपस्थिति में विभिन्न डोमेन अनियमित रूप से अभिविन्यासित रहते हैं। फलस्वरूप सम्पूर्ण डोमेन का परिणामी चुम्बकीय आघूर्ण शून्य होता है। अतः लौह-चुम्बकीय पदार्थ चुम्बक की भाँति व्यवहार नहीं करता।
जब किसी लौह-चुम्बकीय पदार्थ को किसी बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो निम्न दो क्रियाएँ हो सकती हैं—
(i) डोमेन का घूर्णन: सभी डोमेन इस प्रकार घूमने लगते हैं कि उनके चुम्बकीय आघूर्णों की दिशाएँ बाह्य क्षेत्र के अनुदिश हो जायें। ज्यों-ज्यों बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता को बढ़ाया जाता है त्यों-त्यों अधिकाधिक डोमेन चुम्बकीय क्षेत्र के अनुदिश संरेखित होने लगते हैं और लौह-चुम्बकत्व का मान बढ़ने लगता है। एक स्थिति ऐसी आती है जबकि सम्पूर्ण डोमेन चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित हो जाते हैं। इस स्थिति में लौह-चुम्बकत्व का मान सर्वाधिक होता है। इसे लौह-चुम्बकत्व की संतृप्तावस्था कहते हैं।
(ii) डोमेन सीमाओं का विस्थापन: डोमेन की परिसीमाएँ विस्थापित होने लगती हैं। जिन डोमेनों का चुम्बकीय आघूर्ण बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र के समान्तर होता है उन डोमेनों का आकार बढ़ने लगता है तथा जिन डोमेनों के चुम्बकीय आघूर्ण क्षेत्र से अन्य दिशा में होते हैं उन डोमेनों का आकार घटने लगता है।
अवशिष्ट चुम्बकत्व (Residual magnetism): जब बाह्य चुम्बकीय-क्षेत्र को हटा दिया जाता है तो अधिकांश डोमेन अपनी पूर्वावस्था में आ जाते हैं किन्तु कुछ डोमेन अब भी उसी दिशा में ही संरेखित रहते हैं। फलस्वरूप उस पदार्थ में चुम्बकत्व शेष रह जाता है, इसे अवशिष्ट चुम्बकत्व कहते हैं। अवशिष्ट चुम्बकत्व को समाप्त करने के लिए पदार्थ को विपरीत दिशा में चुम्बकित करना पड़ता है।
चुम्बकत्व का परमाणु मॉडल: महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Important Questions & Answers)
प्रश्न 1: इलेक्ट्रॉन की कक्षीय गति और चक्रण गति में से चुम्बकीय आघूर्ण में किसका योगदान अधिक होता है?
उत्तर: चुम्बकीय आघूर्ण में इलेक्ट्रॉन की चक्रण गति (Spin motion) का योगदान अधिक होता है, जो कि लगभग 90% रहता है।
प्रश्न 2: परमाणवीय चुम्बक (Atomic Magnet) किसे कहते हैं?
उत्तर: अनुचुम्बकीय पदार्थों के परमाणुओं में विषम संख्या में इलेक्ट्रॉन होने के कारण प्रत्येक परमाणु का एक नेट चुम्बकीय आघूर्ण होता है, जिससे प्रत्येक परमाणु एक छोटे चुम्बक की तरह व्यवहार करता है। इसे ही परमाणवीय चुम्बक कहते हैं।
प्रश्न 3: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों का नेट चुम्बकीय आघूर्ण शून्य क्यों होता है?
उत्तर: प्रतिचुम्बकीय पदार्थों के परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या सम होती है और इलेक्ट्रॉन दो-दो के युग्म बनाते हैं। युग्म के दोनों इलेक्ट्रॉनों के चक्रण की दिशा एक-दूसरे के विपरीत होने के कारण वे एक-दूसरे के चुम्बकीय आघूर्ण को निरस्त कर देते हैं।
प्रश्न 4: डोमेन (Domain) किसे कहते हैं?
उत्तर: लौह-चुम्बकीय पदार्थों के भीतर परमाणवीय चुम्बकों के ऐसे छोटे-छोटे समूह, जिनमें सभी परमाणुओं का चुम्बकीय आघूर्ण एक ही दिशा में संरेखित रहता है, डोमेन कहलाते हैं।
प्रश्न 5: अवशिष्ट चुम्बकत्व (Residual Magnetism) किसे कहते हैं?
उत्तर: जब लौह-चुम्बकीय पदार्थ पर से बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र हटा लिया जाता है, तब भी कुछ डोमेन चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित ही रह जाते हैं। इसके कारण पदार्थ में बचा हुआ चुम्बकत्व अवशिष्ट चुम्बकत्व कहलाता है।
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चुम्बकत्व का परमाणु मॉडल
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