विभिन्न परिस्थितियों में व्यतिकरण-प्रतिरूप में होने वाले परिवर्तन
(i) एकवर्णी प्रकाश-स्रोत के स्थान पर श्वेत प्रकाश-स्रोत का उपयोग करने पर: श्वेत प्रकाश सात रंगों से बना होता है। जब एकवर्णी प्रकाश-स्रोत को श्वेत प्रकाश-स्रोत से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है, तो केन्द्रीय चमकीली फ्रिंज की स्थिति सभी रंगों के लिए एक ही होती है। अतः, केन्द्रीय फ्रिंज श्वेत होती है। अन्य चमकीली फ्रिन्जों की स्थिति भिन्न-भिन्न रंगों के लिए भिन्न-भिन्न होती है, अतः अन्य फ्रिन्जें रंगीन बनती हैं । बैंगनी रंग का तरंगदैर्घ्य $$\lambda$$ सबसे कम तथा लाल रंग का तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक होता है। अतः, बैंगनी रंग की फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई सबसे कम तथा लाल रंग की फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई सबसे अधिक होती है। अतः, प्रत्येक फ्रिंज का वह किनारा जो केन्द्रीय फ्रिंज की ओर होता है, बैंगनी तथा दूसरा किनारा लाल रंग का दिखाई देता है ।
(ii) प्रयोग, वायु के स्थान पर जल में करने पर: हम जानते हैं कि $$a\mu_w = \frac{\lambda_a}{\lambda_w}$$ । चूँकि $$a\mu_w > 1$$, अतः $$\lambda_w < \lambda_a$$ अर्थात् जल में प्रकाश का तरंगदैर्घ्य वायु की तुलना में कम होता है। यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग से, $$\beta = \frac{\lambda D}{d}$$ । यदि D और d नियत हो, तो $$\beta \propto \lambda$$ । अतः $$\frac{\beta_a}{\beta_w} = \frac{\lambda_a}{\lambda_w}$$ । चूँकि $$\lambda_w < \lambda_a$$, इसलिए $$\beta_w < \beta_a$$ अर्थात् जल में फ्रिंज-चौड़ाई वायु में फ्रिंज-चौड़ाई की तुलना में कम हो जाती है । पुन: $$\mu = \frac{\lambda_a}{\lambda_w}$$ है, अतः $$\mu = \frac{\beta_a}{\beta_w}$$ या $$\beta_w = \frac{\beta_a}{\mu}$$ ।
(iii) एक स्लिट को बन्द कर देने पर: ऐसा करने से व्यतिकरण प्रतिरूप के स्थान पर विवर्तन (Diffraction) प्रतिरूप प्राप्त होगा। फ्रिन्जें समदूरस्थ नहीं होंगी तथा इनकी तीव्रता क्रमशः घटती जायेंगी (यदि स्लिट का आकार प्रकाश के तरंगदैर्घ्य की कोटि का है) ।
(iv) एक स्लिट को नीले तथा दूसरे स्लिट को लाल सेलोफेन कागज से ढंक देने पर: व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त नहीं होगा, क्योंकि दोनों तरंगों का तरंगदैर्घ्य अलग-अलग होगा ।
(v) जब स्लिटों के बीच की दूरी $$d < \lambda$$ हो: इस स्थिति में $$\beta > D$$ होता है। अतः व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त नहीं होगा ।
(vi) एक स्लिट पूर्ण रूप से तथा दूसरा स्लिट आंशिक रूप से खुला है: भिन्न-भिन्न आयामों की तरंगों द्वारा व्यतिकरण होगा, किन्तु विपर्यास (Contrast) अच्छा नहीं होगा ।
(vii) एक स्लिट को सेलोफेन कागज से ढंकने पर: दीप्त फ्रिंज कम दीप्त तथा अदीप्त फ्रिंज कम अदीप्त होगी ।
महत्वपूर्ण नोट और गणनाएँ
- (i) केन्द्रीय फ्रिंज से n वाँ दीप्त फ्रिंज की दूरी $$x = \frac{n\lambda D}{d}$$ , परन्तु $$\beta = \frac{\lambda D}{d}$$, अतः $$x = n\beta$$ ।
- (ii) केन्द्रीय फ्रिंज से n वाँ अदीप्त फ्रिंज की दूरी $$x = \left( \frac{2n-1}{2} \right) \frac{\lambda D}{d} = \left( \frac{2n-1}{2} \right) \beta$$ ।
- (iii) फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई $$\theta = \frac{\beta}{D} = \frac{\lambda D}{d \cdot D} = \frac{\lambda}{d}$$ क्योंकि कोण = चाप / त्रिज्या ।
- (iv) n वाँ दीप्त फ्रिंज से m वाँ दीप्त फ्रिंज की दूरी = $$m\beta – n\beta = (m-n) \beta$$ ।
- (v) n वाँ दीप्त फ्रिंज से m वाँ अदीप्त फ्रिंज की दूरी = $$\left( m – n + \frac{1}{2} \right) \beta$$ ।
- (vi) $$\lambda_1$$ तरंगदैर्घ्य का n वाँ दीप्त फ्रिंज, $$\lambda_2$$ तरंगदैर्घ्य के m वाँ दीप्त फ्रिंज के सम्पाती होता है, तो $$x = \frac{n\lambda_1 D}{d} = \frac{m\lambda_2 D}{d}$$ , अतः $$n\lambda_1 = m\lambda_2$$ ।
उदाहरण
प्रश्न: यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में $$5890\text{\AA}$$ के सोडियम प्रकाश के लिए फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई $$0.20^\circ$$ है। यदि इस पूरे समायोजन को पानी में डुबो दिया जाये तो फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई क्या होगी ?
हल: फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई $$\theta = \frac{\lambda}{d}$$ … (1)
पानी में डुबोने पर $$\theta’ = \frac{\lambda’}{d}$$ … (2)
समीकरण (1) और (2) से, $$\frac{\theta’}{\theta} = \frac{\lambda’}{\lambda}$$
किन्तु $$\mu = \frac{\lambda_a}{\lambda_w} = \frac{\lambda}{\lambda’} \therefore \theta’ = \frac{\theta}{\mu}$$
दिया है— $$\theta = 0.20^\circ$$ तथा $$\mu = \frac{4}{3}$$ (पानी का अपवर्तनांक)
सूत्र में मान रखने पर $$\theta’ = \frac{0.20}{4/3} = 0.15^\circ$$ उत्तर
अभ्यास प्रश्न: व्यतिकरण-प्रतिरूप
प्रश्न 1: यंग के प्रयोग में एकवर्णीय प्रकाश के स्थान पर श्वेत प्रकाश का उपयोग करने पर क्या होता है?
उत्तर: श्वेत प्रकाश का उपयोग करने पर केन्द्रीय फ्रिंज श्वेत प्राप्त होती है क्योंकि सभी रंगों के लिए वहां पथांतर शून्य होता है । अन्य फ्रिन्जें रंगीन बनती हैं क्योंकि अलग-अलग रंगों की स्थिति भिन्न-भिन्न होती है । बैंगनी रंग की फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई सबसे कम और लाल रंग की कोणीय चौड़ाई सबसे अधिक होती है ।
प्रश्न 2: यंग के प्रयोग को वायु से जल में ले जाने पर फ्रिंज-चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: जल में प्रकाश का तरंगदैर्घ्य वायु की तुलना में कम हो जाता है ($$\lambda_w < \lambda_a$$) । चूँकि फ्रिंज-चौड़ाई तरंगदैर्घ्य के समानुपाती होती है, इसलिए जल में फ्रिंज-चौड़ाई वायु की तुलना में कम हो जाती है, जिसका सूत्र $$\beta_w = \frac{\beta_a}{\mu}$$ है ।
प्रश्न 3: यदि एक स्लिट को नीले और दूसरे को लाल सेलोफेन कागज से ढंक दिया जाए, तो क्या होगा?
उत्तर: इस स्थिति में व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त नहीं होगा, क्योंकि दोनों तरंगों का तरंगदैर्घ्य अलग-अलग होता है ।
प्रश्न 4: फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई ($$\theta$$) का सूत्र क्या है?
उत्तर: फ्रिंज की कोणीय चौड़ाई का सूत्र $$\theta = \frac{\beta}{D} = \frac{\lambda}{d}$$ है ।
प्रश्न 5: यदि n वाँ दीप्त फ्रिंज और m वाँ दीप्त फ्रिंज $$\lambda_1$$ और $$\lambda_2$$ तरंगदैर्घ्य के लिए सम्पाती हों, तो क्या स्थिति होगी?
उत्तर: इस स्थिति में $$n\lambda_1 = m\lambda_2$$ का संबंध प्राप्त होता है ।
व्यतिकरण प्रतिरूप में परिवर्तन (Change in Interference Pattern)
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