दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता (Resolving Power of Telescope)
आकाश में अरबों तारे हैं,
जो हमसे इतनी दूरी पर हैं कि वे हमारी आँखों को एक-दूसरे के बेहद करीब या आपस में मिले हुए दिखाई देते हैं।
जब हम इन्हें किसी दूरदर्शी से देखते हैं,
तो विवर्तन (Diffraction) के कारण उनका तीक्ष्ण बिंदु प्रतिबिंब न बनकर एक धब्बा-सा विवर्तन प्रतिरूप बनता है।
दो दूरस्थ वस्तुओं के बीच के उस न्यूनतम कोणीय हटाव (Smallest Angular Separation) के व्युत्क्रम को,
जिसे दूरदर्शी की सहायता से अलग-अलग देखा जा सके,
उसे दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता कहते हैं।
वैज्ञानिक ऐयरी के अनुसार, दूरदर्शी द्वारा अलग-अलग (विभेदित) की जा सकने वाली दो दूरस्थ वस्तुओं के बीच का न्यूनतम कोणीय झुकाव $$d\theta$$ (विभेदन सीमा) निम्नलिखित समीकरण द्वारा दिया जाता है:
चूँकि किसी दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता उसकी कोणीय विभेदन सीमा ($$d\theta$$) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, इसलिए दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता का अंतिम सूत्र यह बनता है:
संकेतों के अर्थ और इकाइयाँ:
- $$\lambda$$ : दूरस्थ वस्तु से आने वाले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (Wavelength)।
- $$d$$ : दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेंस का व्यास या द्वारक (Diameter of Objective Lens)।
- $$d\theta$$ : न्यूनतम कोणीय हटाव या कोणीय विभेदन सीमा (इसकी इकाई रेडियन होती है)।
अभिदृश्यक का व्यास (d) बड़ा होने के मुख्य लाभ
खगोलीय दूरदर्शियों में हमेशा बहुत बड़े व्यास के लेंस या दर्पण का उपयोग किया जाता है। इसके मुख्य रूप से दो भौतिक कारण (लाभ) हैं:
- अधिक विभेदन-क्षमता: सूत्र के अनुसार, अभिदृश्यक का व्यास ($d$) जितना अधिक होगा, दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता उतनी ही अधिक होगी और दूर के दो तारे बिल्कुल साफ और पृथक दिखाई देंगे।
- चमकीला प्रतिबिंब (Brightness): अभिदृश्यक का आकार बड़ा होने से वह दूरस्थ मंद तारों से भी अधिक मात्रा में प्रकाश किरणों को एकत्रित कर पाता है, जिससे बनने वाला अंतिम प्रतिबिंब अत्यंत स्पष्ट और चमकीला बनता है।
याद रखें: चूंकि आकाशीय पिंडों से आने वाले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य ($$\lambda$$) पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता, इसलिए दूरदर्शी की स्पष्टता बढ़ाने का एकमात्र व्यावहारिक उपाय उसके अभिदृश्यक का व्यास (d) बढ़ाना ही है।
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दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता: न्यूमेरिकल और समाधान
Q1. एक दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेंस का व्यास (d) $$1\text{ मीटर}$$ है। यदि $$4538\text{ Å}$$ ($$4538 \times 10^{-10}\text{ मीटर}$$) तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उपयोग किया जाए, तो इसकी विभेदन सीमा ($$d\theta$$) ज्ञात कीजिए।
• दिया है: व्यास (d) = $$1\text{ मीटर}$$, तरंगदैर्ध्य ($$\lambda$$) = $$4538 \times 10^{-10}\text{ मीटर}$$
• सूत्र: $$d\theta = \frac{1.22\lambda}{d}$$
• मान रखने पर: $$d\theta = \frac{1.22 \times 4538 \times 10^{-10}}{1}$$
• $$d\theta = 5536.36 \times 10^{-10} = \mathbf{5.54 \times 10^{-7}\text{ रेडियन}}$$
उत्तर: दूरदर्शी की कोणीय विभेदन सीमा $$5.54 \times 10^{-7}\text{ रेडियन}$$ होगी।
Q2. प्रश्न 1 में दिए गए आंकड़ों के आधार पर उस दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता (Resolving Power) की गणना कीजिए।
• दिया है: कोणीय विभेदन सीमा ($$d\theta$$) = $$5.54 \times 10^{-7}\text{ रेडियन}$$
• सूत्र: $$\text{विभेदन-क्षमता} = \frac{1}{d\theta}$$
• मान रखने पर: $$\text{विभेदन-क्षमता} = \frac{1}{5.54 \times 10^{-7}} = \frac{10^7}{5.54}$$
• $$\text{विभेदन-क्षमता} = \mathbf{1.80 \times 10^6\text{ रेडियन}^{-1}}$$
उत्तर: दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता $$1.80 \times 10^6\text{ रेडियन}^{-1}$$ होगी।
Q3. $$6000\text{ Å}$$ तरंगदैर्ध्य के प्रकाश के लिए एक दूरदर्शी की विभेदन सीमा $$2.44 \times 10^{-6}\text{ रेडियन}$$ है। दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेंस का व्यास (d) ज्ञात कीजिए।
• दिया है: $$\lambda = 6000\text{ Å} = 6 \times 10^{-7}\text{ मीटर}$$, $$d\theta = 2.44 \times 10^{-6}\text{ रेडियन}$$
• सूत्र: $$d\theta = \frac{1.22\lambda}{d} \Rightarrow d = \frac{1.22\lambda}{d\theta}$$
• मान रखने पर: $$d = \frac{1.22 \times 6 \times 10^{-7}}{2.44 \times 10^{-6}}$$ $$= \frac{7.32 \times 10^{-7}}{2.44 \times 10^{-6}}$$
• $$d = 3 \times 10^{-1} = \mathbf{0.3\text{ मीटर}}$$ (या $$30\text{ सेमी}$$)
उत्तर: दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेंस का व्यास $$0.3\text{ मीटर}$$ होगा।
Q4. दो तारों के बीच का कोणीय हटाव $$4 \times 10^{-7}\text{ रेडियन}$$ है। यदि एक दूरदर्शी के अभिदृश्यक का व्यास $$2\text{ मीटर}$$ और प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य $$5000\text{ Å}$$ हो, तो क्या यह दूरदर्शी दोनों तारों को स्पष्ट अलग-अलग देख पाएगा?
• दिया है: $$d = 2\text{ मीटर}$$, $$\lambda = 5 \times 10^{-7}\text{ मीटर}$$
• सबसे पहले दूरदर्शी की न्यूनतम विभेदन सीमा ($$d\theta$$) निकालते हैं:
$$d\theta = \frac{1.22 \times 5 \times 10^{-7}}{2}$$ $$= \frac{6.1 \times 10^{-7}}{2} = 3.05 \times 10^{-7}\text{ रेडियन}$$
• तुलना करने पर: तारों के बीच की दूरी ($$4 \times 10^{-7}\text{ रेडियन}$$), दूरदर्शी की न्यूनतम आवश्यक विभेदन सीमा ($$3.05 \times 10^{-7}\text{ रेडियन}$$) से **अधिक** है।
उत्तर: हाँ, चूंकि तारों के बीच का कोणीय हटाव दूरदर्शी की विभेदन सीमा से अधिक है, इसलिए दूरदर्शी दोनों तारों को स्पष्ट और अलग-अलग देख पाएगा।
Q5. यदि किसी दूरदर्शी के अभिदृश्यक लेंस के व्यास को दोगुना कर दिया जाए, तो उसकी (i) विभेदन सीमा और (ii) विभेदन-क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
• सूत्रों के अनुसार, विभेदन सीमा ($$d\theta \propto \frac{1}{d}$$) और विभेदन-क्षमता ($$\text{R.P.} \propto d$$) होती है।
• **(i) विभेदन सीमा:** व्यास को दोगुना करने पर कोणीय विभेदन सीमा घटकर **आधी ($$\frac{1}{2}$$ गुणा)** रह जाएगी।
• **(ii) विभेदन-क्षमता:** व्यास को दोगुना करने पर दूरदर्शी की विभेदन-क्षमता पहले से **दोगुनी (2 गुनी)** हो जाएगी।
उत्तर: विभेदन सीमा आधी हो जाएगी और विभेदन-क्षमता दोगुनी हो जाएगी।
दूरदर्शी की विभेदन क्षमता
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