न्यूटन के कणिका-सिद्धान्त के आधार पर प्रकाश का परावर्तन
न्यूटन ने अपने कणिका-सिद्धान्त के माध्यम से प्रकाश के परावर्तन की व्याख्या करने के लिए ‘प्रतिकर्षण बल’ की अवधारणा का उपयोग किया। उनके अनुसार, जब कोई कणिका किसी परावर्तक पृष्ठ के समीप पहुँचती है, तो उस पर पृष्ठ के अभिलम्बवत एक प्रतिकर्षण बल कार्य करता है।
परावर्तन की प्रक्रिया
परावर्तन की प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:
- वेग का वियोजन: जब कणिका परावर्तक पृष्ठ के प्रतिकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करती है, तो उसके वेग (v) को दो घटकों में वियोजित किया जाता है: अभिलम्ब घटक (v cos i) और समान्तर घटक (v sin i)।
- प्रतिकर्षण बल का प्रभाव: प्रतिकर्षण बल का समान्तर घटक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे-जैसे कणिका पृष्ठ के पास पहुँचती है, अभिलम्ब घटक का मान कम होने लगता है।
- दिशा परिवर्तन: पृष्ठ को स्पर्श करने पर अभिलम्ब घटक शून्य हो जाता है और दिशा उलट जाती है, जिससे कणिका वापस मुड़ने लगती है।
- परावर्तन का नियम: बिन्दु B और C पर, अभिलम्ब घटक और समान्तर घटक परस्पर बराबर होते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि आपतन कोण (i) = परावर्तन कोण (r)।
| घटक | मान |
|---|---|
| आपतन बिन्दु (B) पर वेग घटक | v cos i (अभिलम्ब), v sin i (समान्तर) |
| परावर्तन बिन्दु (C) पर वेग घटक | v cos r (अभिलम्ब), v sin r (समान्तर) |
निष्कर्ष: इस प्रकार, न्यूटन ने गणितीय रूप से प्रदर्शित किया कि आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब एक ही तल में होते हैं, जो परावर्तन के नियमों की पुष्टि करता है।
न्यूटन के कणिका-सिद्धान्त के आधार पर परावर्तन: प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: न्यूटन ने प्रकाश के परावर्तन को समझाने के लिए किस बल की कल्पना की थी?
उत्तर: न्यूटन ने परावर्तक पृष्ठ के समीप एक ‘अभिलम्बवत प्रतिकर्षण बल’ (Perpendicular Repulsive Force) की कल्पना की थी, जो कणिकाओं पर कार्य करता है।
प्रश्न 2: परावर्तक पृष्ठ के पास पहुँचने पर कणिका के वेग के घटकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: कणिका के वेग को दो घटकों—अभिलम्ब घटक (v cos i) और समान्तर घटक (v sin i) में वियोजित किया जा सकता है। प्रतिकर्षण बल केवल अभिलम्ब घटक को प्रभावित करता है, जबकि समान्तर घटक अपरिवर्तित रहता है।
प्रश्न 3: न्यूटन के अनुसार, परावर्तन के बाद आपतन कोण (i) और परावर्तन कोण (r) में क्या संबंध होता है?
उत्तर: न्यूटन के सिद्धान्त के अनुसार, आपतन कोण और परावर्तन कोण का मान सदैव बराबर (i = r) होता है।
प्रश्न 4: प्रतिकर्षण बल का समान्तर घटक पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: प्रतिकर्षण बल का समान्तर घटक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, जिसके कारण कणिका की दिशा परावर्तक पृष्ठ के समान्तर बनी रहती है।
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