इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron Microscope): संपूर्ण विवरण
1. सिद्धांत (Principle)
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी ‘डी-ब्रॉग्ली सिद्धांत’ पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक द्रव्य-कण के साथ एक तरंग सम्बद्ध रहती है. यदि m द्रव्यमान का कोई इलेक्ट्रॉन v वेग से गति कर रहा है, तो उससे सम्बद्ध तरंग का तरंगदैर्घ्य ($$\lambda$$) निम्नलिखित सूत्र द्वारा दिया जाता है:
$$\lambda = \frac{h}{mv}$$
जहाँ h प्लांक नियतांक है। इलेक्ट्रॉन की इसी तरंग प्रकृति का उपयोग करके, तीव्र वेग वाले इलेक्ट्रॉनों को विद्युत तथा चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा उसी प्रकार फोकस किया जा सकता है, जैसे प्रकाश की किरणों को कांच के लेंसों द्वारा किया जाता है.
2. आवर्धन क्षमता (Magnifying Power)
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता अत्यंत अधिक होती है. जहाँ प्रकाशिक सूक्ष्मदर्शी द्वारा 2,500 गुना तक आवर्धन किया जा सकता है, वहीं इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से 5,00,000 गुना तक आवर्धन संभव है.
3. कार्य-विधि (Working Process)
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की कार्य-विधि निम्न चरणों में होती है:
- इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन: टंगस्टन के तंतु (F) से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को 50,000 से 60,000 वोल्ट का विभवांतर आरोपित कर त्वरित किया जाता है.
- फोकसिंग: इन तीव्रगामी इलेक्ट्रॉनों को चुंबकीय संग्राही लेंस द्वारा वस्तु O पर फोकस किया जाता है.
- प्रतिबिंब निर्माण: वस्तु O से प्रकीर्णित इलेक्ट्रॉन चुंबकीय अभिवृश्यक लेंस से गुजरकर $$I_1$$ प्रतिबिंब बनाते हैं, जो चुंबकीय प्रक्षेपण लेंस के लिए वस्तु का कार्य करता है. अंत में, यह लेंस $$I_2$$ (उल्टा और बड़ा) प्रतिबिंब पर्दे पर बनाता है.
4. मुख्य विशेषताएँ और उपयोग
यह पूरा उपकरण एक वायुरोधी धातु के बॉक्स में रखा होता है, जिसमें उच्च कोटि का निर्वात (Vacuum) होता है.
उपयोग: उच्च विभेदन क्षमता के कारण इसका उपयोग भौतिकी, रसायन, विज्ञान, धातुकर्म और चिकित्सा क्षेत्र में किया जाता है. चिकित्सा में इसका उपयोग उन सूक्ष्म जीवाणुओं और वायरसों को देखने के लिए किया जाता है जिन्हें सामान्य सूक्ष्मदर्शी से देखना असंभव है.
नोट: स्पष्ट प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए चुंबकीय लेंसों के क्षेत्र की तीव्रता में परिवर्तन किया जाता है.
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी: न्यूमेरिकल अभ्यास
उदाहरण: डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य की गणना
प्रश्न: यदि एक इलेक्ट्रॉन $$10^7$$ मीटर/सेकंड के वेग से गति कर रहा है, तो उससे सम्बद्ध तरंगदैर्घ्य ($$\lambda$$) की गणना कीजिए। (दिया है: प्लांक नियतांक $$h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}$$, इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान $$m = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$$)
सूत्र: $$\lambda = \frac{h}{mv}$$
मान रखने पर: $$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{9.1 \times 10^{-31} \times 10^7}$$
$$\lambda = \frac{6.63 \times 10^{-34}}{9.1 \times 10^{-24}}$$
$$\lambda \approx 0.728 \times 10^{-10} \text{ मीटर}$$
उत्तर: तरंगदैर्घ्य लगभग $$0.728 \text{ Å}$$ (एंग्स्ट्रॉम) है।
याद रखने योग्य महत्वपूर्ण सूत्र:
- डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य: $$\lambda = \frac{h}{mv}$$
- यहाँ h (प्लांक नियतांक) का मान $$6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}$$ स्थिर रहता है।
- इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m हमेशा $$9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}$$ लिया जाता है।
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (Electron Microscope)
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