हाइगन के तरंग-सिद्धांत द्वारा अपवर्तन की व्याख्या
हाइगन के तरंग-सिद्धांत का उपयोग करके हम प्रकाश के अपवर्तन और स्नैल के नियम को सिद्ध कर सकते हैं।
जब एक समतल तरंगाग्र AB दो माध्यमों को अलग करने वाले पृष्ठ XY पर आपतित होता है, तो माध्यमों के भिन्न होने के कारण प्रकाश का वेग बदल जाता है.
अपवर्तन का डेरिवेशन
- माना माध्यम I में प्रकाश का वेग c1 है और माध्यम II में c2 है.
- t समय में तरंगाग्र द्वारा तय की गई दूरी माध्यम I में BB1 = c1t और माध्यम II में AQ = c2t होती है.
- त्रिभुज ABB1 और AQB1 का उपयोग करके हम sin i और sin r का मान निकालते हैं.
स्नैल का नियम:
ज्यामितीय अनुपात से सिद्ध होता है कि: sin i / sin r = c1 / c2 = नियतांक. यही ‘स्नैल का नियम’ है, जो अपवर्तन के मुख्य सिद्धांत को दर्शाता है.
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अपवर्तन की व्याख्या: अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1: हाइगन के सिद्धांत से अपवर्तन की व्याख्या करते समय दोनों माध्यमों में तरंग के वेग का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: चूँकि माध्यम I और माध्यम II का अपवर्तनांक अलग-अलग होता है, इसलिए प्रकाश का वेग माध्यम I में (c1) और माध्यम II में (c2) भिन्न होता है। यही कारण है कि तरंगाग्र का झुकाव बदल जाता है, जिसे हम अपवर्तन कहते हैं.
प्रश्न 2: स्नैल के नियम (Snell’s Law) को हाइगन के सिद्धांत से कैसे सिद्ध किया जाता है?
उत्तर: हाइगन के ज्यामितीय निर्माण से प्राप्त sin i = c1t / AB1 और sin r = c2t / AB1 के अनुपातों को लेने पर, sin i / sin r = c1 / c2 प्राप्त होता है, जो कि स्नैल का नियम (नियत अनुपात) है.
प्रश्न 3: प्रथम माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक (1μ2) क्या होता है?
उत्तर: प्रथम माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक 1μ2 = c1 / c2 होता है, जिसे sin i / sin r के रूप में भी लिखा जाता है.
प्रश्न 4: क्या अपवर्तन की प्रक्रिया में तरंगाग्र की प्रकृति बदलती है?
उत्तर: नहीं, अपवर्तन के बाद भी समतल तरंगाग्र समतल ही रहता है, केवल उसकी दिशा (तरंग संचरण) और वेग में परिवर्तन आता है.
प्रश्न 5: अपवर्तन के नियमों के अनुसार आपतित और अपवर्तित किरणों की स्थिति क्या होती है?
उत्तर: अपवर्तन के नियम के अनुसार, आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल (कागज के तल) में स्थित होते हैं.
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हाइगन के तरंग-सिद्धांत द्वारा अपवर्तन की व्याख्या
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