प्रकाश का विवर्तन (Diffraction of Light)
जब तरंगों के मार्ग में कोई अवरोध (Obstacle) आता है या तरंगें किसी छिद्र में से गुजरती हैं, तो तरंगें अवरोध या छिद्र के किनारों पर आंशिक रूप से मुड़ जाती हैं। इस घटना को तरंगों का विवर्तन कहते हैं ।
विवर्तन का आधार:
यह , विवर्तन प्रत्येक प्रकार की तरंग का एक गुण है। चूँकि प्रकाश भी एक तरंग है, अतः उसमें भी विवर्तन का गुण होता है। सामान्य परिस्थितियों में प्रकाश का विवर्तन स्पष्ट नहीं होता, परन्तु जब प्रकाश किसी छोटे छिद्र से गुजरता है या उसके मार्ग में कोई महीन वस्तु (जैसे—बाल, तार) आ जाती है, तो प्रकाश किनारों पर मुड़ जाता है ।
विवर्तन और ज्यामितीय छाया:
- स्लिट की स्थिति : जब स्लिट (AB) का आकार बड़ा होता है, तो प्रकाश केवल पर्दे के A’B’ भाग को ही प्रकाशित करता है और ज्यामितीय छाया (A’X और B’Y) में प्रवेश नहीं करता ।
- अवरोध की स्थिति : जब अवरोध (AB) का आकार बड़ा होता है, तो प्रकाश अवरोध की छाया (A’B’) में प्रवेश नहीं करता ।
महत्वपूर्ण नोट: जब स्लिट या अवरोध का आकार प्रकाश के तरंगदैर्घ्य की कोटि का होता है, तो प्रकाश ज्यामितीय छाया में अतिक्रमण कर जाता है, जिससे छाया के बाहर तीव्रता में परिवर्तन होता है ।
तीक्ष्ण धार वाले किनारो पर प्रकाश का मुड़ना तथा अवरोध द्वारा बनी ज्यामिति छाया में प्रकाश के अतिक्रमण की घटना को प्रकाश का विवर्तन कहते हैं
अभ्यास प्रश्न: प्रकाश का विवर्तन
प्रश्न 1: प्रकाश का विवर्तन (Diffraction) किसे कहते हैं?
उत्तर: जब तरंगों के मार्ग में कोई अवरोध आता है या तरंगें किसी छिद्र से गुजरती हैं, तो वे किनारों पर आंशिक रूप से मुड़ जाती हैं, इस घटना को प्रकाश का विवर्तन कहते हैं ।
प्रश्न 2: क्या प्रकाश में विवर्तन का गुण पाया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: हाँ, प्रकाश एक तरंग है, इसलिए इसमें भी विवर्तन का गुण होता है । सामान्य परिस्थितियों में यह दिखाई नहीं देता, परन्तु जब प्रकाश किसी छोटे छिद्र या महीन वस्तु के पास से गुजरता है, तो किनारों पर मुड़ने के कारण यह विवर्तन स्पष्ट हो जाता है ।
प्रश्न 3: विवर्तन के प्रभाव को स्पष्ट रूप से देखने के लिए अवरोध का आकार कैसा होना चाहिए?
उत्तर: विवर्तन स्पष्ट रूप से तब होता है जब स्लिट का आकार या अवरोध का आकार प्रकाश के तरंगदैर्घ्य की कोटि (बहुत छोटा) का होता है ।
प्रश्न 4: ज्यामितीय छाया से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: चित्र 4.17 के अनुसार, जब स्लिट या अवरोध बड़े आकार के होते हैं, तो प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है और जिस भाग में प्रकाश प्रवेश नहीं कर पाता, उसे ज्यामितीय छाया कहते हैं ।
प्रश्न 5: स्लिट का आकार प्रकाश के तरंगदैर्घ्य की कोटि का होने पर क्या होता है?
उत्तर: इस स्थिति में प्रकाश ज्यामितीय छाया में अतिक्रमण कर जाता है और छाया के बाहर प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन होने लगता है ।
विवर्तन प्रदर्शित करने वाले साधारण प्रयोग (Simple Experiments Demonstrating Diffraction)
(i) एक स्लिट से उत्पन्न विवर्तन प्रतिरूप का प्रदर्शन: एक स्लिट से उत्पन्न विवर्तन प्रतिरूप का प्रदर्शन करने के लिए रेजर ब्लेड (Razer Blade) प्रयुक्त करते हैं। दोनों हाथों के अँगूठे और तर्जनी से दो ब्लेडों को इस प्रकार पकड़ो कि उनके मध्य एक संकीर्ण स्लिट बन जाये। एक जलते हुए वैद्युत-बल्ब को इस संकीर्ण स्लिट में से देखो। स्लिट की चौड़ाई को पर्याप्त कम करने पर विवर्तन प्रतिरूप दिखाई देते हैं। द्वितीयक उच्चिष्टों की स्थिति तरंगदैर्घ्य पर निर्भर करती है। अतः प्रतिरूप रंगीन दिखाई देता है। लाल या नीले रंग के लिए फिल्टर प्रयुक्त करके विवर्तन प्रतिरूप को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है ।
(ii) यदि दूर से आने वाले प्रकाश के मार्ग में एक छोटा-सा वृत्तीय अवरोध रख दिया जाये तो अवरोध की छाया के केन्द्र में चमकीला धब्बा दिखाई देता है। इसका कारण यह है कि वृत्तीय अवरोध के किनारों से प्रकाश का विवर्तन हो जाता है। ये विवर्तित किरणें अध्यारोपित होकर संपोषी व्यतिकरण उत्पन्न करती हैं। अतः छाया के केन्द्र पर चमकीला धब्बा दिखाई देता है ।
(iii) यदि एक रूमाल को आँख के सामने फैलाकर दूर स्थित प्रकाश स्रोत को देखा जाये तो रूमाल के धागों के बीच बने पतले छिद्रों द्वारा प्रकाश का विवर्तन हो जाता है। प्रकाश में कई तरंगदैर्घ्य उपस्थित होने के कारण विवर्तन प्रतिरूप रंगीन दिखाई देता है ।
ध्वनि और प्रकाश के विवर्तन की तुलनात्मक विवेचना (Comparative Interpretation of Diffraction of Sound and Light)
यदि हम कमरे के अन्दर बैठे हों तो बाहर बातचीत करने वाले व्यक्तियों की आवाज सुन लेते हैं, यद्यपि उन्हें देख नहीं पाते। इसका कारण यह है कि ध्वनि-तरंगें दरवाजों और खिड़कियों के किनारों पर मुड़कर (विवर्तित होकर) कमरे के अन्दर प्रवेश कर जाती हैं, किन्तु प्रकाश-तरंगें मुड़ नहीं पातीं ।
वास्तव में साधारण ध्वनि-तरंगों का तरंगदैर्घ्य 1 मीटर के क्रम का होता है तथा व्यवहार में अवरोधों का आकार भी इसी क्रम का होता है। अतः ध्वनि-तरंगों का मुड़ना या ध्वनि-तरंगों में विवर्तन एक साधारण सी घटना होती है, किन्तु प्रकाश का तरंगदैर्घ्य बहुत ही कम (जैसे—पीले प्रकाश का तरंगदैर्घ्य लगभग 5.5 × 10⁻⁷ मीटर) होता है। व्यवहार में अवरोधों का आकार इससे बहुत अधिक होता है। अतः प्रकाश में विवर्तन की घटना देखने को नहीं मिलती। प्रकाश में विवर्तन की घटना उसी समय परिलक्षित होती है, जब अवरोध या छिद्र का आकार प्रकाश के तरंगदैर्घ्य के क्रम का हो ।
इसका अर्थ यह है कि सामान्य परिस्थितियों में प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है। अतः किरण प्रकाशिकी वैध है। किरण प्रकाशिकी उन स्थितियों में असफल हो जाता है, जबकि अवरोध का आकार तरंगदैर्घ्य के क्रम का होता है ।
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