विद्युत् बल—कूलॉम का नियम (Electric Force—Coulomb’s Law)
कूलॉम का नियम (Coulomb’s Law in Hindi) – बिन्दु आवेश (Point Charge): यदि दो आवेशित पिण्डों की विमायें उनके बीच की दूरी की तुलना में नगण्य हैं, तो उन आवेशों को बिन्दु आवेश कहते हैं।
सन् 1785 में फ्रांसीसी भौतिकशास्त्री चार्लस ऑगस्टिन कूलॉम (Charles Augustin Coulomb, 1736-1806) ने ऐंठन तुला (Torsion Balance) के प्रयोग द्वारा बिन्दु आवेशों के मध्य लगने वाले बल का मान ज्ञात किया और उन्होंने एक नियम का प्रतिपादन किया, जिसे कूलॉम का नियम या कूलॉम का व्युत्क्रम वर्ग का नियम कहते हैं।
इस नियमानुसार, किन्हीं दो बिन्दु आवेशों के मध्य लगने वाले आकर्षण या प्रतिकर्षण बल का मान उन आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश कार्य करता है।
चित्र: कूलॉम का नियम
\( q_1 \xleftarrow{\hspace{2cm} r \hspace{2cm}} q_2 \)
यदि \(q_1\) तथा \(q_2\) परिमाण के दो बिन्दु आवेश एक-दूसरे से \(r\) दूरी पर स्थित हों और उनके मध्य लगने वाला बल \(F\) हो, तो कूलॉम के नियमानुसार,
$$F \propto q_1 q_2 \quad \text{तथा} \quad F \propto \frac{1}{r^2}$$
दोनों को मिलाने पर,
$$F \propto \frac{q_1 q_2}{r^2} \quad \text{या} \quad F = k \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \quad \text{— (1)}$$
जहाँ \(k\) एक अनुपाती नियतांक है, जिसका मान दोनों आवेशों के बीच के माध्यम तथा मापन की पद्धति पर निर्भर करता है।
विभिन्न स्थितियाँ—
स्थिति I. S.I. पद्धति में—
(i) जब दोनों बिन्दु आवेशों के बीच का माध्यम वायु या निर्वात हो, तब
$$k = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9 \text{ न्यूटन-मीटर}^2/\text{कूलॉम}^2 \quad (\text{N m}^2 \text{C}^{-2})$$
जहाँ \(\varepsilon_0\) (Epsilon Zero) को वायु या निर्वात की निरपेक्ष विद्युतशीलता (Absolute Permittivity) कहते हैं।
स्पष्टतः
$$\varepsilon_0 = \frac{1}{4\pi k}$$
$$\varepsilon_0 \text{ का मान } 8.854 \times 10^{-12} \text{ कूलॉम}^2/\text{न्यूटन-मीटर}^2 \quad (\text{C}^2 \text{N}^{-1} \text{m}^{-2}) \text{ होता है।}$$
समीकरण (1) में मान रखने पर,
$$F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \text{ न्यूटन} \quad \text{— (2)}$$
या
$$F = 9 \times 10^9 \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \text{ न्यूटन} \quad \text{— (3)}$$
उपर्युक्त समीकरण (2) व (3) में \(q_1, q_2\) कूलॉम में तथा \(r\) मीटर में है।
(ii) जब दोनों बिन्दु आवेशों के मध्य वायु या निर्वात के अतिरिक्त अन्य दूसरा माध्यम हो, तब
$$k = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} = 9 \times 10^9 \cdot \frac{1}{K}$$
जहाँ \(K\) को माध्यम का परावैद्युतांक (Dielectric Constant) कहते हैं।
समीकरण (1) में मान रखने पर,
$$F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 K} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \text{ न्यूटन} \quad \text{— (4)}$$
या
$$F = 9 \times 10^9 \cdot \frac{1}{K} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \text{ न्यूटन} \quad \text{— (5)}$$
समीकरण (4) में \(\varepsilon = \varepsilon_0 K\) रखने पर,
$$F = \frac{1}{4\pi\varepsilon} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \text{ न्यूटन}$$
\(\varepsilon\) को माध्यम की निरपेक्ष विद्युतशीलता कहते हैं।
स्थिति II. C.G.S. पद्धति में—
(i) जब दोनों बिन्दु आवेशों के मध्य वायु या निर्वात हो, तब \(k = 1\)
अतः
$$F = \frac{q_1 q_2}{r^2} \text{ डाइन}$$
(ii) जब दोनों बिन्दु आवेशों के मध्य अन्य दूसरा माध्यम हो, तब
$$F = \frac{1}{K} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \text{ डाइन}$$
जहाँ \(K\) माध्यम का परावैद्युतांक है।
एकांक आवेश (Unit Charge)
1. S.I. पद्धति में—
सूत्र:
$$F = 9 \times 10^9 \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \text{ में,}$$
यदि \(F = 9 \times 10^9 \text{ न्यूटन}\), \(r = 1 \text{ मीटर}\) तथा \(q_1 = q_2 = q\) हो, तो
$$9 \times 10^9 = 9 \times 10^9 \cdot \frac{q \times q}{1^2}$$
या
$$q^2 = 1 \quad \text{या} \quad q = \pm 1$$
अतः यदि समान परिमाण के दो सजातीय आवेश वायु या निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर स्थित होने पर एक-दूसरे को \(9 \times 10^9 \text{ न्यूटन}\) के बल से प्रतिकर्षित करें, तो प्रत्येक आवेश एकांक आवेश कहलाता है।
आवेश के इस मात्रक को कूलॉम कहते हैं अर्थात् S.I. पद्धति में आवेश का मात्रक कूलॉम (संकेत C) है। कूलॉम आवेश का बड़ा मात्रक है। अतः व्यवहार में छोटा मात्रक माइक्रो कूलॉम (\(\mu\text{C}\)) का भी प्रयोग किया जाता है।
$$1 \text{ माइक्रो कूलॉम } (\mu\text{C}) = 10^{-6} \text{ कूलॉम}$$
2. C.G.S. पद्धति में—
सूत्र: \(F = \frac{1}{K} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2}\) में यदि \(q_1 = q_2 = q\), \(r = 1 \text{ सेमी}\), \(K = 1 \text{ मात्रक}\) तथा \(F = 1 \text{ डाइन}\) हो, तो
$$1 = \frac{q_1 q_2}{1^2} \quad \text{या} \quad q^2 = 1 \quad \text{या} \quad q = \pm 1$$
अतः यदि समान परिमाण के दो सजातीय आवेश वायु या निर्वात में 1 सेमी की दूरी पर स्थित होने पर एक-दूसरे को 1 डाइन के बल से प्रतिकर्षित करें, तो प्रत्येक आवेश एकांक आवेश कहलाता है।
आवेश के इस मात्रक को स्थिर वैद्युत मात्रक आवेश (Electrostatic Unit of Charge) या संक्षेप में स्थि. वै. मा. (e.s.u.) आवेश या स्थैत कूलॉम (Stat Coulomb) कहते हैं।
नोट:
(i) C.G.S. पद्धति में आवेश के विद्युत्-चुम्बकीय मात्रक (electro-magnetic unit of charge) या संक्षेप में वि. चु. मा. (e.m.u. of charge) को ऐब कूलॉम (ab-coulomb) कहा जाता है।
(ii) आवेश के विभिन्न मात्रकों में सम्बन्ध—
$$1 \text{ ऐब कूलॉम} = 3 \times 10^{10} \text{ स्थैत कूलॉम}$$
$$1 \text{ कूलॉम} = 3 \times 10^9 \text{ स्थैत कूलॉम तथा } 1 \text{ ऐब कूलॉम} = 10 \text{ कूलॉम} \quad \text{— (1)}$$
(iii) कूलॉम के नियम का सदिश रूप— यदि \(q_1\) और \(q_2\) परिमाण के दो बिन्दु आवेश एक-दूसरे से \(r\) दूरी पर स्थित हों, तो पहले आवेश द्वारा दूसरे आवेश पर आरोपित बल
$$\vec{F}_{21} = k \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \hat{r}_{12} \quad \text{— (2)}$$
जहाँ \(\hat{r}_{12}\) पहले आवेश से दूसरे आवेश की दिशा में एकांक सदिश (Unit Vector) है। इसी तरह दूसरे आवेश द्वारा पहले आवेश पर आरोपित बल
$$\vec{F}_{12} = k \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \hat{r}_{21} \quad \text{— (3)}$$
जहाँ \(\hat{r}_{21}\) दूसरे आवेश से पहले आवेश की दिशा में एकांक सदिश है।
किन्तु \(\hat{r}_{12}\) और \(\hat{r}_{21}\) विपरीत दिशा में एकांक सदिश हैं। \(\quad \therefore \hat{r}_{12} = -\hat{r}_{21}\)
अतः समीकरण (2) और (3) से,
$$\vec{F}_{21} = -\vec{F}_{12} \quad \text{— (4)}$$
या
$$\vec{F}_{21} + \vec{F}_{12} = 0$$
अतः स्पष्ट है कि पहले आवेश द्वारा दूसरे आवेश पर आरोपित बल दूसरे आवेश द्वारा पहले आवेश पर आरोपित बल के बराबर तथा विपरीत होता है।
व्यापक रूप में, $$\vec{F} = k \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \hat{r} = k \cdot \frac{q_1 q_2}{r^3} \vec{r}$$
(iv) दोनों आवेशों के मध्य कार्य करने वाला बल दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश होता है। ऐसे बलों को केन्द्रीय बल (Central Force) कहते हैं।
(v) अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Super-Position—Forces among many charges)— इस सिद्धान्त के अनुसार, कई आवेशों द्वारा किसी अकेले आवेश पर आरोपित कुल बल प्रत्येक आवेश द्वारा उस अकेले आवेश पर आरोपित बल के सदिश योगफल के बराबर होता है।
माना कि बिन्दुओं \(P_1, P_2, P_3, P_4\) पर क्रमशः \(q_1, q_2, q_3, q_4\) आवेश स्थित हैं। इन बिन्दुओं के स्थिति सदिश क्रमशः \(\vec{r}_1, \vec{r}_2, \vec{r}_3, \vec{r}_4\) हैं। तब अध्यारोपण के सिद्धान्त से \(q_1\) आवेश पर लगने वाला कुल बल
$$\vec{F}_1 = \vec{F}_{12} + \vec{F}_{13} + \vec{F}_{14}$$
(vi) कूलॉम का नियम प्रयोग के आधार पर प्राप्त हुआ है। अतः यह एक प्रयोगसिद्ध नियम है।
(vii) दो बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाले बल पर उनके समीप अन्य आवेशों की उपस्थिति का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
कूलॉम के नियम की सीमाएँ—
(i) यह नियम केवल स्थिर बिन्दु आवेशों के लिए लागू होता है, गतिशील आवेशों के लिए नहीं।
(ii) यह नियम अधिक दूरियों तथा \(10^{-15} \text{ मीटर}\) से कम दूरियों के लिए सत्य नहीं है। \(10^{-15} \text{ मीटर}\) से कम दूरियों पर नाभिकीय बलों (Nuclear Forces) की प्रधानता के कारण यह नियम अनुपयुक्त हो जाता है।
कूलॉम का नियम (Coulomb’s Law in Hindi)
उदाहरण (Numerical Example):
प्रश्न: \(3\,\mu\text{C}\) के दो आवेश वायु में एक-दूसरे से \(0.15 \text{ मीटर}\) की दूरी पर स्थित हैं। उनके बीच लगने वाले कूलॉम बल की गणना कीजिए।
हल:
सूत्र— $$F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2}$$
दिया है—
- \(q_1 = q_2 = 3\,\mu\text{C} = 3 \times 10^{-6} \text{ C}\)
- \(r = 0.15 \text{ मीटर}\)
सूत्र में मान रखने पर,
$$F = \frac{9 \times 10^9 \times 3 \times 10^{-6} \times 3 \times 10^{-6}}{(0.15)^2}$$
$$F = 3.6 \text{ न्यूटन}$$
उत्तर: आवेशों के बीच लगने वाला कूलॉम बल \(3.6 \text{ न्यूटन}\) होगा।
विद्युत् बल—कूलॉम का नियम: प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1: कूलॉम का नियम (Coulomb’s Law) क्या है? इसका गणितीय सूत्र लिखिए।
उत्तर: कूलॉम के नियमानुसार, किन्हीं दो स्थिर बिन्दु आवेशों के मध्य लगने वाला आकर्षण या प्रतिकर्षण बल उन आवेशों के परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
गणितीय सूत्र: $$F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2}$$
जहाँ \(\varepsilon_0\) निर्वात की निरपेक्ष विद्युतशीलता है और इसका मान \(8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2}\) होता है।
प्रश्न 2: S.I. पद्धति में 1 कूलॉम (एकांक आवेश) को किस प्रकार परिभाषित किया जाता है?
उत्तर: यदि समान परिमाण के दो सजातीय आवेश वायु या निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर स्थित होने पर एक-दूसरे को \(9 \times 10^9 \text{ N}\) के बल से प्रतिकर्षित करें, तो प्रत्येक आवेश 1 कूलॉम (एकांक आवेश) कहलाता है।
प्रश्न 3: कूलॉम के नियम का सदिश रूप लिखिए तथा इसका भौतिक महत्त्व बताइए।
उत्तर: कूलॉम के नियम का सदिश रूप:
$$\vec{F}_{21} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \cdot \frac{q_1 q_2}{r^2} \hat{r}_{12}$$
कहाँ \(\vec{F}_{21}\) दूसरे आवेश पर पहले आवेश द्वारा लगाया गया बल है।
भौतिक महत्त्व: चुँकि \(\vec{F}_{21} = -\vec{F}_{12}\) होता है, यह स्पष्ट करता है कि कूलॉम बल न्यूटन के गति के तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया नियम) का पालन करता है और यह एक केन्द्रीय बल है।
प्रश्न 4: अध्यारोपण का सिद्धान्त (Principle of Superposition) क्या है?
उत्तर: इस सिद्धान्त के अनुसार, जब कई आवेश किसी एक अकेले आवेश पर बल लगाते हैं, तो उस अकेले आवेश पर आरोपित कुल बल प्रत्येक आवेश द्वारा उस पर लगाए गए पृथक्-पृथक् बलों के सदिश योगफल के बराबर होता है।
$$\vec{F}_1 = \vec{F}_{12} + \vec{F}_{13} + \vec{F}_{14} + \dots$$
प्रश्न 5: कूलॉम के नियम की मुख्य सीमाएँ क्या हैं?
उत्तर: कूलॉम के नियम की दो मुख्य सीमाएँ निम्नलिखित हैं:
- यह नियम केवल स्थिर बिन्दु आवेशों के लिए लागू होता है, गतिशील आवेशों के लिए नहीं।
- यह नियम \(10^{-15} \text{ मीटर}\) (नाभिकीय आकार) से कम दूरियों के लिए लागू नहीं होता, क्योंकि वहाँ नाभिकीय बल प्रभावी हो जाते हैं।
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कूलॉम का नियम (Coulomb’s Law in Hindi)
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