विद्युत् आवेश का क्वाण्टीकरण (Quantization of Electric Charge)
विद्युत् आवेश का क्वाण्टीकरण – प्रयोगों द्वारा ज्ञात हुआ है कि प्रकृति में किसी वस्तु पर जो कम-से-कम मात्रा में आवेश पाया जाता है, वह एक इलेक्ट्रॉन या एक प्रोटॉन के आवेश के बराबर होता है। इसका मान 4.8 × 10-10 स्थैत कूलॉम या 1.6 × 10-19 कूलॉम होता है।
हम जानते हैं कि इलेक्ट्रॉन पर ऋणावेश की मात्रा प्रोटॉन पर धनावेश की मात्रा के बराबर होती है। अतः यदि इलेक्ट्रॉन के आवेश को -e से प्रदर्शित करें तो प्रोटॉन के आवेश को +e से प्रदर्शित किया जायेगा।
यह पाया गया है कि प्रत्येक आवेशित पदार्थ पर आवेश की मात्रा एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश की मात्रा के पूर्ण गुणज (Integer Multiple) में होती है।
अतः किसी आवेशित पदार्थ पर आवेश की मात्रा q = ± ne हो सकती है। जहाँ n = 1, 2, 3, 4, …… तथा e = 1.6 × 10-19 कूलॉम।
इस प्रकार किसी आवेशित पदार्थ पर आवेश सदैव e के पूर्ण गुणज जैसे e, 2e, 3e, 4e, 5e इत्यादि में होता है। किसी पदार्थ पर आवेश e की भिन्न जैसे 3/2 e, 5/2 e, 7/2 e इत्यादि में नहीं होता।
स्पष्ट है कि विद्युत् आवेश को अनिश्चित रूप से विभाजित नहीं किया जा सकता। विद्युत् आवेश के इस गुण को ही विद्युत् आवेश का क्वाण्टीकरण कहते हैं।
e आवेश की सबसे छोटी इकाई है, इसे मूल आवेश कहते हैं।
नोट:
किसी पदार्थ में 1.6 × 10-19 कूलॉम से कम आवेश नहीं हो सकता। आवेश के क्वाण्टीकरण का मुख्य कारण यह है कि एक पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण केवल इलेक्ट्रॉनों की पूर्ण संख्या में ही होता है।
उदाहरण (Numerical Example):
प्रश्न: एक चालक पर 1 कूलॉम का ऋणावेश है। इस पर कितने इलेक्ट्रॉन अधिक हैं?
हल:
सूत्र— q = ne ⇒ n = q / e
दिया है—
- q = 1 कूलॉम
- e = 1.6 × 10-19 कूलॉम
∴ n = 1 / (1.6 × 10-19) = 6.25 × 1018
उत्तर: चालक पर 6.25 × 1018 इलेक्ट्रॉन अधिक हैं।
विद्युत् आवेश का क्वाण्टीकरण: प्रश्न एवं उत्तर
प्रश्न 1: विद्युत् आवेश का क्वाण्टीकरण (Quantization of Electric Charge) क्या है?
उत्तर: प्रकृति में किसी भी वस्तु पर आवेश अनिश्चित रूप से विभाजित नहीं हो सकता। किसी आवेशित पदार्थ पर कुल आवेश सदैव मूल आवेश (e) के पूर्ण गुणज (Integer Multiple) के रूप में ही होता है (अर्थात् q = ±ne)। विद्युत् आवेश के इसी गुण को विद्युत् आवेश का क्वाण्टीकरण या परमाणुकता कहते हैं।
प्रश्न 2: मूल आवेश (Elementary Charge) किसे कहते हैं और इसका मान कितना होता है?
उत्तर: प्रकृति में पाए जाने वाले न्यूनतम आवेश (जो एक इलेक्ट्रॉन या प्रोटॉन पर होता है) को मूल आवेश कहते हैं। इसे अक्षर e से प्रदर्शित किया जाता है। इसका मान 1.6 × 10-19 कूलॉम (या 4.8 × 10-10 स्थैत कूलॉम) होता है।
प्रश्न 3: आवेश के क्वाण्टीकरण का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: आवेश के क्वाण्टीकरण का मुख्य कारण यह है कि जब एक पदार्थ से दूसरे पदार्थ में आवेशन होता है, तो इलेक्ट्रॉनों का स्थानान्तरण केवल पूर्ण संख्या में (जैसे 1, 2, 3…) ही हो सकता है, इलेक्ट्रॉनों को टुकड़ों में (जैसे 1.5, 2.5…) स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 4: क्या किसी वस्तु पर 2.5e या 4.8 × 10-19 C का आवेश संभव है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: नहीं, किसी भी वस्तु पर 2.5e आवेश संभव नहीं है क्योंकि आवेश हमेशा पूर्ण गुणज में होता है।
परंतु 4.8 × 10-19 C का आवेश संभव है, क्योंकि यह 3 × (1.6 × 10-19 C) = 3e के बराबर है (जहाँ n = 3 एक पूर्ण संख्या है)।
प्रश्न 5: 1 कूलॉम ऋणावेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या कितनी होती है?
उत्तर: 1 कूलॉम ऋणावेश उत्पन्न करने के लिए किसी पदार्थ पर 6.25 × 1018 इलेक्ट्रॉनों की अधिकता होनी आवश्यक है।
(गणना: n = q / e = 1 / 1.6 × 10-19 = 6.25 × 1018)
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विद्युत् आवेश का क्वाण्टीकरण
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