कोणीय संवेग (Angular Momentum)
किसी कण के रेखीय संवेग का किसी घूर्णन-अक्ष के परितः आघूर्ण उस कण का उस अक्ष के परितः कोणीय संवेग कहलाता है।
यह एक सदिश राशि है। इसे $$\vec{L}$$ से व्यक्त किया जाता है।
सूत्र के रूप में,
मात्रक—
$$\text{कोणीय संवेग का मात्रक} = \text{रेखीय संवेग का मात्रक} \times \text{दूरी का मात्रक}$$
$$\therefore$$ SI पद्धति में कोणीय संवेग का मात्रक
विमीय सूत्र— कोणीय संवेग का विमीय सूत्र $$[ML^2T^{-1}]$$ है।
कोणीय संवेग का व्यंजक (सदिश रूप में)
मानलो m द्रव्यमान का एक कण A है जिसका मूलबिन्दु O के सापेक्ष स्थिति सदिश $$\vec{r}$$ है। मानलो कण का रेखीय संवेग $$\vec{p}$$ है।

कण का O के परितः कोणीय संवेग $$= \text{रेखीय संवेग} \times \text{अक्ष से कण की लम्बवत् दूरी}$$
$$L = p \times OB \quad \dots(1)$$
यदि $$\vec{r}$$ और $$\vec{p}$$ के बीच का कोण $\theta$ हो, तो समकोण $$\Delta OBA$$ में,
$$\sin\theta = \frac{OB}{OA} \implies OB = OA \sin\theta = r \sin\theta$$
समी. (1) में मान रखने पर,
$$L = p \times r \sin\theta \quad \dots(2)$$
किन्तु, $$\vec{r} \times \vec{p} = pr \sin\theta \hat{n}$$
जहाँ $$\hat{n}$$, $$\vec{r}$$ और $$\vec{p}$$ के तल के लम्बवत् एकक सदिश है। इसकी दिशा सदिश गुणनफल के दाएँ हाथ के नियम द्वारा ज्ञात की जाती है।
इस प्रकार कोणीय संवेग $$\vec{L}$$, $$\vec{r}$$ और $$\vec{p}$$ के सदिश गुणनफल के बराबर होता है। इसकी दिशा $$\vec{r}$$ और $$\vec{p}$$ के सम्मिलित तल के लम्बवत् घूर्णन-अक्ष (यहाँ Z-अक्ष) के अनुदिश होती है।
कोणीय संवेग के समकोणीय घटक (Rectangular Components)
परन्तु,
$$\vec{L} = L_x \hat{i} + L_y \hat{j} + L_z \hat{k}$$
$$\vec{r} = x \hat{i} + y \hat{j} + z \hat{k}$$
तथा
$$\vec{p} = p_x \hat{i} + p_y \hat{j} + p_z \hat{k}$$
समी. (3) में मान रखने पर,
$$L_x \hat{i} + L_y \hat{j} + L_z \hat{k} = (x \hat{i} + y \hat{j} + z \hat{k}) \times (p_x \hat{i} + p_y \hat{j} + p_z \hat{k})$$
$$= \begin{vmatrix} \hat{i} & \hat{j} & \hat{k} \\ x & y & z \\ p_x & p_y & p_z \end{vmatrix}$$
$$= \hat{i} \begin{vmatrix} y & z \\ p_y & p_z \end{vmatrix} – \hat{j} \begin{vmatrix} x & z \\ p_x & p_z \end{vmatrix} + \hat{k} \begin{vmatrix} x & y \\ p_x & p_y \end{vmatrix}$$
$$= (y p_z – z p_y)\hat{i} + (z p_x – x p_z)\hat{j} + (x p_y – y p_x)\hat{k}$$
दोनों पक्षों में $$\hat{i}, \hat{j}$$ और $$\hat{k}$$ के गुणांकों की तुलना करने पर,
$$L_x = y p_z – z p_y$$
$$L_y = z p_x – x p_z$$
$$L_z = x p_y – y p_x$$
कोणीय संवेग-संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Angular Momentum)
इस नियम के अनुसार यदि किसी घूमते हुए पिण्ड या निकाय पर कोई बाह्य बल आघूर्ण न लगाया जाय तो उसका कोणीय संवेग नियत रहता है।
इस प्रकार,
$$L = \text{एक नियतांक}$$
या
$$I\omega = \text{एक नियतांक}$$
रेखीय संवेग संरक्षण के नियम की भाँति कोणीय संवेग संरक्षण का नियम भी प्रकृति का एक मूलभूत नियम है।
प्रमाण : हम जानते हैं कि कोणीय संवेग में परिवर्तन की दर लगाये गये बाह्य बल-आघूर्ण के बराबर होती है। अर्थात्
$$\tau = \frac{dL}{dt}$$
यदि बाह्य बल आघूर्ण τ= 0 हो, तो
$$\frac{dL}{dt} = 0$$
L = एक नियतांक
परन्तु $$L = I\omega$$
समी. (1) से स्पष्ट है कि किसी निकाय के जड़त्व-आघूर्ण के घटने से उसका कोणीय वेग बढ़ने लगता है यदि बाह्य बल आघूर्ण शून्य हो।
यदि दो विभिन्न परिस्थितियों में एक ही निकाय के जड़त्व-आघूर्ण $$I_1$$ व $$I_2$$ तथा कोणीय वेग $$\omega_1$$ और $$\omega_2$$ हों तो बाह्य बल आघूर्ण की अनुपस्थिति में—
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