ऊर्ध्वाधर वृत्त में पिण्ड की गति (Motion of a Body in a Vertical Circle)
ऊर्ध्वाधर वृत्त में पिण्ड की गति (Motion of a Body in a Vertical Circle) -मानलो एक पिण्ड का द्रव्यमान m है। उसे r लम्बाई की डोरी के एक सिरे से बाँधकर दूसरे सिरे को हाथ से पकड़कर r त्रिज्या के ऊर्ध्वाधर वृत्तीय मार्ग में घुमाया जाता है। मानाकि O वृत्तीय मार्ग का केन्द्र है।

उच्चतम बिन्दु A पर पिण्ड पर दो बल कार्य करते हैं—
(i) पिण्ड का भार mg और
(ii) डोरी का तनाव T1 [चित्र (a)]।
दोनों ही बल ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर कार्य करते हैं। अतः वृत्तीय गति करने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल इन दोनों बलों से प्राप्त होता है। अतः यदि बिन्दु A पर पिण्ड का वेग v1 हो, तो—
इस समीकरण से स्पष्ट है कि v1 के मान को कम करने पर तनाव T1 का मान भी कम होने लगेगा तथा वेग v1 के एक विशेष मान के लिए T1 का मान शून्य हो जायेगा। पिण्ड के इस वेग को क्रान्तिक वेग कहते हैं तथा इसे vc से प्रदर्शित करते हैं।
इस प्रकार,
(mvc2) / r = mg + 0
vc2 / r = g
इस स्थिति में आवश्यक अभिकेन्द्र बल पिण्ड के भार से प्राप्त होता है, किन्तु यदि उच्चतम बिन्दु पर पिण्ड का क्रान्तिक वेग √(gr) से कम है तो अभिकेन्द्र बल पिण्ड के भार से कम हो जायेगा। इस स्थिति में डोरी ढीली पड़ जायेगी फलस्वरूप पिण्ड वृत्तीय पथ में गति न करके नीचे गिर जायेगा।
निम्नतम बिन्दु B पर वेग तथा तनाव
यदि निम्नतम बिन्दु B पर पिण्ड का वेग v2 हो, तो ऊर्जा-संरक्षण के नियम से,
बिन्दु B पर गतिज ऊर्जा = बिन्दु A पर गतिज ऊर्जा + बिन्दु A पर स्थितिज ऊर्जा
यदि v1 = vc = √(gr) हो, तो,
(1/2)mv22 = (1/2)m(gr) + 2mgr = (5/2)mgr
v22 = 5gr
पुनः निम्नतम बिन्दु B पर पिण्ड का भार mg नीचे की ओर तथा डोरी का तनाव T2 ऊपर की ओर कार्य करता है। अतः T2 – mg परिणामी वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करेगा।
यदि v2 = √(5gr) हो, तो समी. (2) से,
T2 = mg + [m(√(5gr))2] / r = mg + 5mg
अतः यदि ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाते समय उच्चतम बिन्दु पर डोरी में तनाव शून्य हो तो वृत्त के निम्नतम बिन्दु पर डोरी में तनाव पिण्ड के भार का छः गुना होता है।
दैनिक जीवन में उदाहरण (Examples in Daily Life):
(i) पानी से भरी बाल्टी को घुमाना: पानी से भरी बाल्टी 50 सेमी त्रिज्या वाले ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाई जाती है। वृत्त के उच्चतम बिन्दु पर बाल्टी के घूमने की न्यूनतम चाल इतनी होनी चाहिए जिससे कि पानी नीचे न गिरने पाये। जब वृत्तीय मार्ग के उच्चतम बिन्दु पर बाल्टी का वेग क्रान्तिक वेग v = √(gr) के बराबर या अधिक होता है तो वृत्त के गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल (mv2) / r बाल्टी और पानी के भार mg से प्राप्त हो जाता है। अतः बाल्टी के उल्टा हो जाने पर भी पानी नीचे नहीं गिरता।
(ii) सर्कस में मौत का कुआँ (Motorcycle in Globe): सर्कस में जब मोटर साइकिल चालक पिंजरे की ऊर्ध्वाधर दीवारों पर तेज गति से मोटर साइकिल चलाता है तो दीवार की प्रतिक्रिया के रूप में उसे वृत्तीय गति करने के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्राप्त हो जाता है। उसका वेग क्रान्तिक वेग से कम होने पर वह वृत्तीय गति नहीं कर पायेगा।
अंकित उदाहरण (Numerical Example):
पानी से भरी बाल्टी 50 सेमी त्रिज्या वाले ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाई जाती है। वृत्त के उच्चतम बिन्दु पर बाल्टी के घूमने की न्यूनतम चाल कितनी हो जिससे कि पानी नीचे न गिरने पाये?
हल—
दिया है — r = 50 सेमी = 50 × 10-2 मीटर
सूत्र — vc = √(gr) = √(9.8 × 50 × 10-2) = 2.21 मीटर/सेकण्ड।
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ऊर्ध्वाधर वृत्त में पिण्ड की गति (Motion of a Body in a Vertical Circle)
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