वृत्तीय गति (Circular Motion) क्या है?
जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है, तो उसकी इस गति को वृत्तीय गति कहते हैं। इस प्रकार की गति में वस्तु की दिशा लगातार बदलती रहती है, जिसके कारण केंद्र की ओर एक बल कार्य करता है जिसे अभिकेन्द्र बल (Centripetal Force) कहते हैं। आइए अब इसके मुख्य उदाहरणों का अध्ययन करते हैं।
वृत्तीय गति के उदाहरण (Examples of Circular Motion)
1. वृत्तीय समतल सड़क पर कार की गति (Motion of a car on levelled circular road)
मानलो m द्रव्यमान की एक कार नियत चाल v से r त्रिज्या की वृत्तीय समतल सड़क पर गति कर रही है। इस स्थिति में कार पर निम्नलिखित बल कार्य करते हैं—
(i) कार का भार mg नीचे की ओर कार्य करता है। यह भार जमीन की अभिलम्ब प्रतिक्रिया R द्वारा संतुलित होता है। इस प्रकार,
(ii) अभिकेन्द्र बल $$\frac{mv^2}{r}$$, जो वृत्तीय मार्ग के केन्द्र के अनुदिश कार्य करता है। यह अभिकेन्द्र बल टायर और जमीन के मध्य घर्षण से प्राप्त होता है।
वृत्तीय मार्ग पर कार दूर जाने का प्रयास करती है, अतः घर्षण बल वृत्तीय मार्ग के केन्द्र की ओर कार्य करता है। मानलो घर्षण बल F तथा स्थैतिक घर्षण-गुणांक $$\mu_s$$ है तब $$F = \mu_s R$$।
समी. (1) से R का मान रखने पर,
वृत्तीय सड़क को सुरक्षित पार करने के लिए अभिकेन्द्र बल को घर्षण बल के बराबर या उससे कम होना चाहिए अर्थात्
इस प्रकार, समी. (2) अधिकतम वेग सीमा को प्रदर्शित करता है जिससे कार वृत्तीय मोड़ को सुरक्षित पार कर सकती है।
विशेष स्थितियाँ (Conditions):
(i) यदि कोई कार चालक कार को समी. (2) में दिये गये वेग से अधिक वेग से चलाने का प्रयास करता है तो अभिकेन्द्र बल प्राप्त करने के लिए घर्षण बल पर्याप्त नहीं होगा। अतः कार फिसल जायेगी।
(ii) बरसात के दिनों में सड़क गीली हो जाने के कारण $$\mu_s$$ का मान कम हो जाता है, जिससे $$v_{\max}$$ का मान भी कम हो जाता है। अतः गीली वृत्तीय सड़क को पार करते समय वेग को कम कर लेना चाहिए, अन्यथा फिसलने का भय रहेगा।
उदाहरण (Numerical Example):
समतल वृत्तीय सड़क की एक मोड़ की त्रिज्या 100 मी. है। कार की अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए जिससे कि कार बिना फिसले मोड़ को पार कर सके। टायर और सड़क के बीच घर्षण गुणांक 0.8 है।
हल— दिया है— r = 100 मीटर, $$\mu$$ = 0.8, g = 9.8 मी/से$^2$
सूत्र— $$v = \sqrt{\mu r g} = \sqrt{0.8 \times 100 \times 9.8} = 28$$ मी/से। उत्तर
2. बैंकित सड़क पर कार की गति (Motion of a vehicle on a banked road)
ऊपर हम देख चुके हैं कि वृत्तीय समतल सड़क को पार करते समय कार की चाल घर्षण-गुणांक पर निर्भर करती है। यदि कार को अधिक चाल से पार करना चाहें तो टायर और सड़क के मध्य घर्षण अधिक होना चाहिए, किंतु इस स्थिति में टायर जल्दी ख़राब हो सकते हैं। इस कठिनाई से बचने के लिए मोड़ पर सड़क को थोड़ा-सा ढलान देकर बनाया जाता है। सड़क का बाहरी भाग अन्दर के भाग की अपेक्षा थोड़ा-सा ऊपर उठा होता है।
मानलो m द्रव्यमान की एक कार θ ढाल वाली वृत्तीय सड़क पर r त्रिज्या के वृत्तीय मार्ग पर वृत्तीय गति कर रही है। तब कार पर निम्नलिखित बल कार्य करते हैं :
(i) कार का भार mg ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर
(ii) अभिकेन्द्र प्रतिक्रिया R ऊर्ध्वाधर से θ कोण पर
(iii) टायर और जमीन के मध्य घर्षण बल F (मोड़ पर कार बाहर खिसकने का प्रयास करती है। अतः घर्षण बल ढलान के समान्तर अन्दर की ओर लगता है।)
(iv) अभिकेन्द्र बल $$\frac{mv^2}{r}$$ त्रिज्यीय अन्दर की ओर (यह R और F के घटकों से प्राप्त होता है।)
चित्र में कार पर कार्य करने वाले विभिन्न बलों को प्रदर्शित किया गया है। अभिलम्ब प्रतिक्रिया R ऊर्ध्वाधर से θ कोण बनाती है। अतः इसके दो घटक प्राप्त किये जा सकते हैं— (a) $$R\cos\theta$$ ऊर्ध्वाधर घटक और (b) $$R\sin\theta$$ क्षैतिज घटक। F क्षैतिज से θ कोण बनाता है। इसके भी दो घटक प्राप्त कर सकते हैं : (a) $$F\cos\theta$$ क्षैतिज घटक और (b) $$F\sin\theta$$ ऊर्ध्वाधर घटक।
इस प्रकार स्पष्ट है कि,
$$R\sin\theta + F\cos\theta = \frac{mv^2}{r}$$ …(2)
पुनः: $$F = \mu R$$ …(3) जहाँ $$\mu$$ गतिज घर्षण-गुणांक है।
समी. (1) से, $$mg = R\cos\theta – F\sin\theta$$ …(4)
समी. (2) में समी. (4) का भाग देने पर,
समी. (5) से स्पष्ट है कि कार की चाल v उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती। यदि टायर और जमीन के मध्य घर्षण न्यूनतम हो अर्थात् $$\mu = 0$$ हो तो समी. (5) से,
किसी ढाल वाली सड़क पर यही सबसे उपयुक्त चाल है जिससे टायरों की न्यूनतम हानि होती है क्योंकि इस स्थिति में घर्षण बल शून्य होता है।
सड़क की ढलान से लाभ (Advantages of Banking):
(i) सड़क में वाहन फिसलने से बचते हैं।
(ii) समतल सड़क की तुलना में ढाल वाली सड़क में मोड़ पर वाहन अधिक चाल से दौड़ सकते हैं।
(iii) वाहन के टायरों को न्यूनतम क्षति पहुँचती है।
3. वृत्तीय पथ पर साइकिल सवार की गति (Motion of a cyclist on circular path)
जब कोई साइकिल सवार किसी मोड़ को पार करता है तो वह मोड़ की ओर थोड़ा-सा झुककर चलाता है ताकि मोड़ को सुरक्षित ढंग से पार कर सके।
मानलो साइकिल सवार r त्रिज्या वाले वृत्तीय मोड़ पर ऊर्ध्वाधर से θ कोण बनाते हुए झुककर वेग v से चलाता है।
मानलो साइकिल सवार पर पृथ्वी का प्रतिक्रियात्मक बल R है, तब R के दो घटक प्राप्त किये जा सकते हैं—
(i) $$R\cos\theta$$ ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर तथा (ii) $$R\sin\theta$$ क्षैतिज दिशा में।
ऊर्ध्वाधर घटक $$R\cos\theta$$ साइकिल सहित साइकिल सवार के भार को संतुलित करता है तथा क्षैतिज घटक $$R\sin\theta$$ वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेन्द्र बल प्रदान करता है।
इस प्रकार,
$$R\sin\theta = \frac{mv^2}{r}$$ …(2)
समी. (2) में समी. (1) का भाग देने पर,
अतः वृत्तीय मोड़ को सुरक्षित ढंग से पार करने के लिए θ अर्थात् $$\tan\theta$$ के मान को कम होने के लिए—
(i) v का मान कम होना चाहिए अर्थात् मोड़ पार करते समय साइकिल सवार को अपना वेग कम कर लेना चाहिए।
(ii) r का मान अधिक होना चाहिए अर्थात् मोड़ की त्रिज्या अधिक होनी चाहिए। इसके लिए बड़ा घेरा बनाते हुए मोड़ पार करना चाहिए।
वृत्तीय गति के उदाहरण (Examples of Circular Motion in Hindi)
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