1. विपथन की परिभाषा (Introduction to Aberration)
जब हम लेंस के सूत्रों की व्युत्पत्ति करते हैं, तो यह मान लेते हैं कि किरणें मुख्य अक्ष के साथ सूक्ष्म कोण बनाती हैं और लेंस का द्वारक बहुत छोटा होता है।
परंतु व्यवहार में, लेंस का द्वारक बड़ा होता है और वस्तु की स्थिति केवल अक्ष पर नहीं, बल्कि बड़े आकार की भी हो सकती है।
इसके कारण वस्तु का प्रतिबिम्ब स्पष्ट, बिंदुवत या वास्तविक नहीं बनता, बल्कि दोषयुक्त होता है। **किसी वास्तविक प्रतिबिम्ब में उत्पन्न इन दोषों को ही विपथन (Aberration) कहते हैं।**
विपथन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
- वर्ण विपथन (Chromatic Aberration): यह प्रकाश के रंग (आवृत्ति) पर निर्भर करता है।
- एकवर्णी विपथन (Monochromatic Aberration): यह लेंस की आकृति के कारण होता है।
2. वर्ण विपथन (Chromatic Aberration)
किसी अकेले लेंस द्वारा श्वेत प्रकाश से प्रकाशित वस्तु का प्रतिबिम्ब सदैव रंगीन बनता है। इसका कारण यह है कि लेंस के पदार्थ का अपवर्तनांक (μ) अलग-अलग रंगों के लिए अलग-अलग होता है।

काँच का अपवर्तनांक बैंगनी रंग के लिए सर्वाधिक और लाल रंग के लिए न्यूनतम होता है। अतः बैंगनी रंग के लिए फोकस दूरी न्यूनतम और लाल के लिए सर्वाधिक होती है।
(A) अक्षीय या अनुदैर्ध्य वर्ण-विपथन (Axial Chromatic Aberration)
मुख्य अक्ष पर बैंगनी और लाल रंग के प्रतिबिम्बों के बीच की दूरी को अक्षीय वर्ण-विपथन कहते हैं।
अक्षीय वर्ण-विपथन = $$f_r – f_v = \omega f_y$$
(B) पाश्विक वर्ण-विपथन (Lateral Chromatic Aberration)
भिन्न-भिन्न रंगों के प्रतिबिम्बों का साइज (आकार) भिन्न-भिन्न होना पाश्विक वर्ण-विपथन कहलाता है।
पाश्विक वर्ण-विपथन = $$I_r – I_v = \frac{\omega v^2}{f_y} \cdot \frac{O}{u}$$
3. एकवर्णी विपथन (Monochromatic Aberration)
जब किसी लेंस द्वारा एकवर्णी प्रकाश (जैसे पीला प्रकाश) में भी प्रतिबिम्ब दोषपूर्ण बनता है, तो इसे एकवर्णी विपथन कहते हैं। इसके प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

(a) कोमा (Coma)
मुख्य अक्ष से दूर हटी वस्तु का प्रतिबिम्ब तीक्ष्ण न बनकर पुच्छल तारे (Comet) की आकृति का बनता है।
(b) अबिन्दुकता (Astigmatism)
इसमें क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रेखाएँ भिन्न-भिन्न तलों पर फोकस होती हैं, जिससे इमेज धुंधली दिखती है।
(c) विरूपण (Distortion)
वस्तु के विभिन्न बिन्दुओं का आवर्धन अलग-अलग होने से प्रतिबिम्ब की आकृति टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है।
(d) गोलीय विपथन (Spherical Aberration)
अक्ष के नजदीक की किरणें और अक्ष से दूर की किरणें अलग-अलग बिंदुओं पर फोकस होती हैं।

4. गोलीय विपथन को कम करने के उपाय
गोलीय विपथन को पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता, किन्तु इसे कम करने के कई उपाय हैं:
5. महत्वपूर्ण उदाहरण (Solved Examples)
उदाहरण 1: 20 सेमी फोकस दूरी वाले लेंस की वर्ण-विक्षेपण क्षमता 0.08 है। लेंस का अक्षीय वर्ण-विपथन ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया है: ω = 0.08 और f_y = 20सेमी।
सूत्र: $$\text{अक्षीय वर्ण-विपथन} = \omega f_y$$
$$= 0.08 \times 20 = 1.6 \text{ सेमी}$$
उदाहरण 2: 0.3 मीटर और 0.1 मीटर फोकस दूरी के दो उत्तल लेंसों के बीच कितनी दूरी रखनी चाहिए कि गोलीय विपथन न्यूनतम हो?
हल:
सूत्र: $$d = f_1 – f_2$$
$$d = 0.3 – 0.1 = 0.2 \text{ मीटर}$$