विचलन रहित वर्ण-विक्षेपण
(विचलन रहित वर्ण-विक्षेपण) Dispersion without Deviation
1. प्रस्तावना (Introduction)
यह प्रिज्मों के संयोजन की दूसरी महत्वपूर्ण क्रिया है। इस क्रिया में प्रकाश का केवल वर्ण-विक्षेपण (रंगों में टूटना) होता है, लेकिन कोई विचलन नहीं होता। अर्थात् आपतित प्रकाश की दिशा में ही स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है।

2. परिभाषा (Definition)
वह क्रिया जिसमें श्वेत प्रकाश के मार्ग में परिणामी विचलन शून्य होता है, लेकिन प्रकाश अपने अवयवी रंगों में विभक्त हो जाता है, विचलन रहित वर्ण-विक्षेपण कहलाती है। इसमें निर्गत प्रकाश में माध्य किरण आपतित प्रकाश के समान्तर होती है।
3. आवश्यक शर्त (Condition)
इसके लिए क्राउन काँच (A) और फ्लिण्ट काँच (A’) के दो प्रिज्मों को विपरीत दिशा में जोड़ा जाता है। मुख्य शर्त यह है कि माध्य किरण (पीली किरण) का कुल विचलन शून्य होना चाहिए।
यदि क्राउन काँच का विचलन δy = (μy – 1)A और फ्लिण्ट काँच का विचलन δy’ = (μy – 1)A’ हो, तो:
$$\delta_y + \delta’_y = 0$$
या $$(\mu_y – 1)A + (\mu’_y – 1)A’ = 0$$प्रिज्म कोणों का अनुपात:
$$\frac{A}{A’} = -\frac{(\mu’_y – 1)}{(\mu_y – 1)}$$
*ऋण चिह्न दर्शाता है कि प्रिज्म एक-दूसरे के विपरीत रखे गए हैं।
4. परिणामी कोणीय वर्ण-विक्षेपण (Resultant Dispersion)
यद्यपि विचलन शून्य है, फिर भी रंगों का फैलाव θ होता है। इसकी गणना निम्न सूत्र से की जाती है:
$$\theta = \delta_y (\omega – \omega’)$$
यहाँ ω क्राउन काँच की और ω’ फ्लिण्ट काँच की वर्ण-विक्षेपण क्षमता है।
⚠️ महत्वपूर्ण तथ्य:
- ω और ω’ के मान अलग होने के कारण परिणामी वर्ण-विक्षेपण कभी भी शून्य नहीं होता।
- इस संयोग का उपयोग समक्ष दृष्टि स्पेक्ट्रोस्कोप (Direct Vision Spectroscope) बनाने में किया जाता है।
- क्राउन काँच के प्रिज्म का कोण फ्लिण्ट काँच के प्रिज्म कोण से अधिक होना चाहिए (A > A’)।
मुख्य अंतर (Main Differences)
| वर्ण-विक्षेपण रहित विचलन |
विचलन रहित वर्ण-विक्षेपण |
| इस क्रिया में प्रकाश का केवल विचलन होता है, वर्ण-विक्षेपण नहीं। |
इस क्रिया में प्रकाश किरण का केवल वर्ण-विक्षेपण होता है, विचलन नहीं। |
| शर्त: इसमें प्रयुक्त क्राउन कांच और फ्लिंट कांच के प्रिज्म के कोणों का अनुपात निम्न होता है:
$$\frac{A}{A’} = -\frac{(\mu’_v – \mu’_r)}{(\mu_v – \mu_r)}$$
|
शर्त: इसमें प्रयुक्त क्राउन कांच और फ्लिंट कांच के प्रिज्म के कोणों का अनुपात निम्न होता है:
$$\frac{A}{A’} = -\frac{(\mu’_y – 1)}{(\mu_y – 1)}$$
|
| उपयोग: प्रिज्मो के अवर्णक प्रिज्म बनाने में किया जाता है। |
उपयोग: समक्ष दृष्टि स्पेक्ट्रोस्कोप में किया जाता है। |
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निष्कर्ष (Conclusion)
उम्मीद है कि यह विस्तृत लेख आपके लिए मददगार साबित हुआ होगा। हमने इस पोस्ट में थ्योरी, न्यूमेरिकल, और तार्किक प्रश्नों को गहराई से कवर किया है ताकि आपकी परीक्षा की तैयारी में कोई कमी न रहे।
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