कार्य (Work)
दैनिक जीवन में हम लिखना, पढ़ना, साइकिल चलाना, बोझ उठाना, कुएँ से पानी निकालना आदि क्रियाएँ करते हैं। इन सभी क्रियाओं को कार्य करना कहते हैं लेकिन भौतिकी में कार्य का एक विशेष अर्थ होता है। भौतिकी में कार्य होना तभी माना जाता है जबकि वस्तु पर बल लगाने पर उसमें विस्थापन, बल की लम्बवत् दिशा के अतिरिक्त किसी भी दिशा में हो।
उदाहरणार्थ, यदि एक विद्यार्थी पुस्तक को जमीन से उठाकर मेज पर रखता है तो हम कहेंगे कि उसके द्वारा कार्य किया गया, किन्तु यदि वह पुस्तक को हाथ में लिए खड़ा रहता है, रखता नहीं तो हम कहेंगे कि उसने कोई कार्य नहीं किया।
इस प्रकार कार्य सम्पन्न होने के लिए दो बातें आवश्यक हैं—
(i) बल और (ii) विस्थापन।
§ 10.2. किसी अचर बल द्वारा किया गया कार्य (Work Done by a Constant Force)
जब किसी वस्तु पर कोई अचर बल लगाया जाता है और वस्तु का विस्थापन बल की ही दिशा में होता है तो कार्य की माप बल के परिमाण और बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के गुणनफल से की जाती है।
कार्य = बल × बल की दिशा में विस्थापन
यदि किसी वस्तु पर F परिमाण का बल लगाने पर बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन d हो, तो बल द्वारा किया गया कार्य—
यदि वस्तु पर बल लगाने से वस्तु का विस्थापन बल की दिशा में न होकर किसी अन्य दिशा में हो— ऐसी स्थिति में कार्य की माप, बल के परिमाण और बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के घटक के गुणनफल से की जाती है।
कार्य = बल × बल की दिशा में विस्थापन का घटक
मानलो किसी वस्तु पर बल F लगाने से उसमें विस्थापन d होता है। यदि F और d के बीच कोण θ हो, तो बल d का F की दिशा के अनुदिश घटक d cosθ होगा।

∴ बल द्वारा किया गया कार्य W = F d cosθ
स्पष्ट है कि किसी बल द्वारा किया गया कार्य बल F और विस्थापन d के अदिश गुणनफल के बराबर होता है। चूॉंकि दो सदिशों का अदिश गुणनफल एक अदिश होता है, अतः कार्य एक अदिश राशि है।
कार्य के मात्रक (Units of Work)
कार्य के दो प्रकार के मात्रक होते हैं— 1. निरपेक्ष मात्रक और 2. गुरुत्वीय मात्रक।
1. निरपेक्ष मात्रक (Absolute Units):
(i) SI पद्धति: कार्य का निरपेक्ष मात्रक जूल (Joule) है।
यदि F = 1 न्यूटन तथा d = 1 मीटर हो, तो W = 1 न्यूटन × 1 मीटर = 1 न्यूटन-मीटर = 1 जूल。
अतः यदि किसी वस्तु पर 1 न्यूटन का बल लगाने पर बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन 1 मीटर हो, तो किया गया कार्य 1 जूल कहलाता है।
(ii) C.G.S. पद्धति: कार्य का निरपेक्ष मात्रक अर्ग (Erg) है।
यदि F = 1 डाइन तथा d = 1 सेमी हो, तो W = 1 डाइन × 1 सेमी = 1 डाइन-सेमी = 1 अर्ग。
अतः यदि किसी वस्तु पर 1 डाइन का बल लगाने पर बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन 1 सेमी हो तो किया गया कार्य 1 अर्ग कहलाता है।
2. गुरुत्वीय मात्रक (Gravitational Units):
(i) SI पद्धति: कार्य का गुरुत्वीय मात्रक किलोग्राम मीटर (kgm) है।
1 किग्रा मीटर = 1 किग्रा भार × 1 मीटर = 9.8 न्यूटन × 1 मीटर = 9.8 जूल。
(ii) C.G.S. पद्धति: कार्य का गुरुत्वीय मात्रक ग्राम सेमी (gmcm) है।
1 ग्राम सेमी = 1 ग्राम भार × 1 सेमी = 980 डाइन × 1 सेमी = 980 अर्ग。
कार्य का विमीय सूत्र: [MLT-2] × [L] = [ML2T-2]
कार्य की प्रकृति (Nature of Work Done)
समीकरण W = F d cosθ में—
(i) यदि θ = 0° हो तो cos 0° = 1 (अधिकतम), ∴ W = F · d (अधिकतम)।
(ii) यदि θ = 180° हो तो cos 180° = -1, ∴ W = -F · d (ऋणात्मक)।
(iii) यदि θ = 90° हो तो cos 90° = 0, ∴ W = 0 (शून्य)।
1. धनात्मक कार्य (Positive Work)
जब बल और विस्थापन की दिशा एकसमान होती है अथवा उनके बीच का कोण न्यूनकोण (θ < 90°) होता है तो बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होता है।
उदाहरण: कुएँ से बाल्टी खींचना, स्वतंत्रतापूर्वक गिरती वस्तु पर गुरुत्वीय बल का कार्य, घोड़ा गाड़ी खींचना।

2. ऋणात्मक कार्य (Negative Work)
जब बल और विस्थापन की दिशा विपरीत होती है अथवा उनके मध्य का कोण अधिककोण (θ > 90°) होता है तो किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।
उदाहरण: घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य, कुएँ से बाल्टी खींचते समय गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य।
नोट: धनात्मक कार्य से वस्तु की ऊर्जा में वृद्धि तथा ऋणात्मक कार्य से ऊर्जा में कमी होती है।

3. शून्य कार्य (Zero Work)
यदि बल वस्तु की गति के लम्बवत् हो (θ = 90°) या विस्थापन शून्य हो (d = 0), तो बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।
उदाहरण: कुली सिर पर सूटकेस रखकर समतल पर चलता है, एकसमान वृत्तीय गति में अभिकेन्द्र बल द्वारा कार्य, सरल लोलक की डोरी में तनाव द्वारा कार्य।

परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य (Work Done by a Variable Force)
जब किसी वस्तु पर आरोपित बल का मान व दिशा समय या स्थिति के साथ बदलते रहते हैं तो इसे परिवर्ती बल कहते हैं।
उदाहरण: रॉकेट पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल, स्प्रिंग को खींचने पर आरोपित बल।
ग्राफ द्वारा कार्य की गणना: परिवर्ती बल द्वारा किया गया कार्य, बल-विस्थापन वक्र तथा विस्थापन अक्ष के मध्य घिरे क्षेत्रफल के बराबर होता है।

संरक्षी और असंरक्षी बल (Conservative and Non-conservative Forces)
| संरक्षी बल (Conservative Force) | असंरक्षी बल (Non-conservative Force) |
|---|---|
| 1. किया गया कार्य केवल प्रारम्भिक और अन्तिम स्थिति पर निर्भर करता है, पथ पर नहीं। | 1. किया गया कार्य प्रारम्भिक व अन्तिम स्थिति के बीच पथ की प्रकृति (लम्बाई) पर निर्भर करता है। |
| 2. किसी बन्द पथ में किया गया कुल कार्य शून्य होता है (WAB + WBA = 0)। | 2. बन्द पथ में किया गया कुल कार्य शून्य नहीं होता। |
| उदाहरण: गुरुत्वाकर्षण बल, स्थिर-वैद्युत बल, चुंबकीय बल। | उदाहरण: घर्षण बल, श्यान बल। |
अंकित उदाहरण (Numerical Examples):
उदाहरण 1: एक पिंड पर 5 न्यूटन का बल लगाया जाता है जिससे उसमें 10 मीटर का विस्थापन होता है। यदि किया गया कार्य 25 जूल हो तो कोण ज्ञात कीजिए।
हल: W = F d cosθ ⇒ 25 = 5 × 10 × cosθ ⇒ cosθ = 25 / 50 = 1/2 ⇒ θ = 60°।
उदाहरण 2: बल F = 2i + 3j – 5k न्यूटन तथा विस्थापन s = 2i + 4j + 3k मीटर। किया गया कार्य ज्ञात कीजिए।
हल: W = F · s = (2×2) + (3×4) + (-5×3) = 4 + 12 – 15 = 1 जूल।
कार्य क्या है (Work in Physics in Hindi)
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