चालक और विद्युत्रोधी, मुक्त तथा बद्ध आवेश एवं स्थिर वैद्युत क्षेत्र में चालक का व्यवहार | Class 12 Physics

चालक और विद्युत्रोधी (Conductor and Insulators)


चालक—चालक वे पदार्थ होते हैं जो बाह्य विद्युत् क्षेत्र लगाये जाने पर अपने में से विद्युत् धारा को बहने देते हैं।

चालकों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अत्यधिक होती है। अतः बाह्य विद्युत् क्षेत्र लगने पर ये इलेक्ट्रॉन गतिशील हो जाते हैं, फलस्वरूप विद्युत् का प्रवाह होने लगता है।

ताँबा, चाँदी, सोना आदि धातु विद्युत् के अच्छे चालक होते हैं।

विद्युत्रोधी—विद्युत्रोधी वे पदार्थ होते हैं जो बाह्य विद्युत् क्षेत्र लगाये जाने पर अपने में से विद्युत् धारा को बहने नहीं देते।

विद्युत्रोधी में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अभाव रहता है। विद्युत्रोधी के इलेक्ट्रॉन मूल नाभिक से दृढ़तापूर्वक बँधे रहते हैं। अतः बाह्य विद्युत् क्षेत्र लगाने पर गतिशील नहीं हो पाते। लकड़ी, रबर, काँच आदि विद्युत्रोधी हैं।

जब किसी चालक को रगड़ा जाता है, तो रगड़ने से उत्पन्न आवेश शरीर से होता हुआ पृथ्वी में चला जाता है। अतः चालक को रगड़ने पर उसमें कोई आवेश उपस्थित नहीं रहता। फलस्वरूप 18वीं शताब्दी के पहले चालकों को अविद्युतीय (Non-Electric) कहा जाता था। इसके विपरीत जब विद्युत्रोधी को रगड़ा जाता है तो रगड़ने से उत्पन्न आवेश उसमें विद्यमान रहता है। अतः विद्युत्रोधी पदार्थों को परावैद्युत (Dielectric) कहा जाता था।


चालक में मुक्त तथा बद्ध आवेश (Free and Bound Charges in Conductor)


जब किसी आवेशित चालक को किसी अनावेशित विद्युत्रोधी चालक के पास लाया जाता है, तो अनावेशित चालक के पास वाले सिरे पर विजातीय आवेश तथा दूरवर्ती सिरे पर सजातीय आवेश उत्पन्न हो जाता है। इस क्रिया को स्थिर विद्युत् प्रेरण (Electrostatic Induction) कहते हैं।

विद्युत प्रेरण by educationallof

चित्र में A एक धनावेशित चालक तथा BC एक अनावेशित विद्युत्रोधी चालक है। जब चालक A को चालक BC के सिरे B के पास लाया जाता है, तो सिरे B पर ऋणावेश तथा सिरे C पर धनावेश उत्पन्न हो जाता है। अब यदि सिरे C को पृथ्वीकृत कर दिया जाये, तो सिरे C पर उत्पन्न धनावेश पृथ्वी में चला जाता है किन्तु सिरे B पर उत्पन्न आवेश चालक A के आवेश के आकर्षण के कारण उसी सिरे पर बद्ध रहता है। चालक A को हटा लेने पर सिरे B पर बद्ध ऋणावेश पूरे चालक में फैल जाता है। फलस्वरूप चालक BC ऋणावेशित हो जाता है। किन्तु यदि स्थिति में चालक A को हटा लिया जाये तो B और C सिरे पर उत्पन्न आवेश एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं, फलस्वरूप चालक BC पुनः अनावेशित हो जाता है।

चालक BC के सिरे B और C पर उत्पन्न आवेशों को प्रेरित आवेश तथा चालक A के आवेश को प्रेरक आवेश कहते हैं। इस प्रकार, स्थिर विद्युत् प्रेरण की क्रिया में चालक के जिस सिरे का प्रेरित आवेश आकर्षण के कारण बँधा रहता है, उसे बद्ध आवेश तथा जिस सिरे का प्रेरित आवेश पृथ्वी में या अन्य चालकों में जाने के लिए स्वतन्त्र होता है, उसे मुक्त आवेश कहते हैं। स्पष्ट है कि चालक पर बद्ध और मुक्त आवेश विजातीय होते हैं।

व्याख्या—स्थिर विद्युत् प्रेरण की व्याख्या इलेक्ट्रॉन सिद्धान्त के आधार पर की जा सकती है।

जब धनावेशित चालक A को चालक BC के सिरे B के पास लाया जाता है तो चालक BC के मुक्त इलेक्ट्रॉन चालक A के धनावेश से आकर्षित होते हैं।

फलस्वरूप सिरे B पर इलेक्ट्रॉनों की अधिकता तथा सिरे C पर इलेक्ट्रॉनों की कमी हो जाती है। अतः सिरा B ऋणावेशित तथा सिरा C धनावेशित हो जाता है।

जब चालक A को हटा लिया जाता है तो इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित या प्रतिकर्षित करने वाला कोई आवेश नहीं रहता।

अतः इलेक्ट्रॉन चालक BC में पुनः पूर्ववत् गति करने लगते हैं, फलस्वरूप चालक BC पुनः अनावेशित हो जाता है।

जब सिरे C को पृथ्वीकृत कर दिया जाता है तो पृथ्वी से इलेक्ट्रॉन सिरे C की ओर चलने लगते हैं जिससे वह सिरा अनावेशित हो जाता है किन्तु सिरे B के इलेक्ट्रॉन चालक A के धनावेश के आकर्षण बल से बँधे रहते हैं।

जब चालक A को हटा लिया जाता है तो सिरे B के बद्ध इलेक्ट्रॉन पूरे चालक BC में फैल जाते हैं। चालक BC में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता (जितने इलेक्ट्रॉन सिरे B पर बद्ध थे उतने इलेक्ट्रॉन पृथ्वी से सिरे C पर पहुँच चुके हैं) होने के कारण वह ऋणावेशित हो जाता है।

इसी प्रकार, यदि चालक BC के सिरे B के पास ऋणावेशित चालक लाया जाये तो ठीक विपरीत क्रिया होती है। इस क्रिया द्वारा चालक BC को धनावेशित किया जा सकता है।


स्थिर वैद्युत क्षेत्र में चालक का व्यवहार (Behaviour of Conductor in Electrostatic Field)


हम जानते हैं कि चालकों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अत्यधिक होती है। अतः जब किसी चालक को विद्युत् क्षेत्र में रखा जाता है, तो ये इलेक्ट्रॉन विद्युत् क्षेत्र की दिशा के विपरीत चलने लगते हैं। इलेक्ट्रॉनों की गति उस समय तक जारी रहती है जब तक कि इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण उत्पन्न विद्युत् क्षेत्र E बाह्य विद्युत् क्षेत्र E के बराबर नहीं हो जाता। इस प्रकार चालक के अन्दर प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत्-क्षेत्र शून्य हो जाता है।

स्थिर वैद्युत क्षेत्र में चालक by educationallof

चूँकि चालक के अन्दर विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता शून्य होती है। चालक के अन्दर कुल आवेश का मान शून्य होता है। इसे गॉस प्रमेय से आसानी से सिद्ध किया जा सकता है। गॉस के प्रमेय से,

ΦE = q / ε0      …(1)

चालक के अन्दर विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता शून्य होती है, अतः सम्पूर्ण विद्युत् फ्लक्स शून्य होगा। अतः समीकरण (1) से आवेश q का मान भी शून्य होगा।

किसी विद्युत् क्षेत्र में चालक में निम्न गुण पाये जाते हैं—

(i) चालक के अन्दर प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत् क्षेत्र शून्य होता है। अतः चालक के अन्दर कोई आवेश नहीं होता।

(ii) आवेश केवल चालक के बाह्य पृष्ठ पर ही रहता है।

(iii) चालक के पृष्ठ के ठीक बाहर किसी बिन्दु पर विद्युत् क्षेत्र पृष्ठ के लम्बवत् होता है।

(iv) चालक के अन्दर और बाहर प्रत्येक बिन्दु पर विभव नियत और समान रहता है।

(v) चालक का पृष्ठ सम विभव पृष्ठ होता है।

चालक और विद्युत्रोधी (Conductor and Insulators)

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चालक, विद्युत्रोधी एवं चालक के व्यवहार — प्रश्नोत्तर


प्रश्न 1: चालक (Conductor) और विद्युत्रोधी (Insulator) में मुख्य अंतर क्या है?

उत्तर:

  • चालक: वे पदार्थ जिनमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अत्यधिक होती है और जो अपने में से विद्युत् धारा को बहने देते हैं (जैसे: ताँबा, चाँदी, सोना)।
  • विद्युत्रोधी: वे पदार्थ जिनमें मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अभाव होता है और जो अपने में से विद्युत् धारा को बहने नहीं देते (जैसे: लकड़ी, रबर, काँच)।

प्रश्न 2: स्थिर विद्युत् प्रेरण (Electrostatic Induction) किसे कहते हैं?

उत्तर: जब किसी आवेशित चालक को किसी अनावेशित चालक के पास लाया जाता है, तो अनावेशित चालक के पास वाले सिरे पर विजातीय आवेश तथा दूरवर्ती सिरे पर सजातीय आवेश उत्पन्न हो जाता है। इस क्रिया को स्थिर विद्युत् प्रेरण कहते हैं।


प्रश्न 3: मुक्त आवेश (Free Charge) और बद्ध आवेश (Bound Charge) किसे कहते हैं?

उत्तर:

  • बद्ध आवेश: स्थिर विद्युत् प्रेरण में चालक का वह प्रेरित आवेश जो प्रेरक आवेश के आकर्षण के कारण बँधा रहता है, बद्ध आवेश कहलाता है।
  • मुक्त आवेश: वह प्रेरित आवेश जो पृथ्वी या अन्य चालकों में जाने के लिए स्वतन्त्र होता है, मुक्त आवेश कहलाता है।

प्रश्न 4: बाह्य विद्युत् क्षेत्र में रखे जाने पर चालक के अन्दर विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता शून्य क्यों हो जाती है?

उत्तर: जब चालक को विद्युत् क्षेत्र में रखा जाता है, तो उसके मुक्त इलेक्ट्रॉन विद्युत् क्षेत्र की विपरीत दिशा में गति करने लगते हैं। यह गति तब तक जारी रहती है जब तक कि इलेक्ट्रॉनों द्वारा उत्पन्न आन्तरिक विद्युत् क्षेत्र बाह्य विद्युत् क्षेत्र के बराबर और विपरीत नहीं हो जाता। इसके फलस्वरूप चालक के अन्दर परिणामी विद्युत् क्षेत्र शून्य हो जाता है।


प्रश्न 5: स्थिर वैद्युत क्षेत्र में चालक के मुख्य गुण कौन-कौन से हैं?

उत्तर: इसके मुख्य गुण निम्नलिखित हैं:

  1. चालक के अन्दर प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत् क्षेत्र और कुल आवेश शून्य होता है।
  2. दिया गया सम्पूर्ण आवेश केवल चालक के बाह्य पृष्ठ पर ही रहता है।
  3. चालक के पृष्ठ के ठीक बाहर विद्युत् क्षेत्र पृष्ठ के लम्बवत् होता है।
  4. चालक का सम्पूर्ण पृष्ठ सम विभव पृष्ठ होता है।

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चालक और विद्युत्रोधी (Conductor and Insulators)

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चालक और विद्युत्रोधी, मुक्त तथा बद्ध आवेश — 5 महत्वपूर्ण MCQs !!!!! 📝📝📝📚📚📚🚀🚀🚀💯💯💯

1 / 5

प्रश्न 1: निम्नलिखित में से किस पदार्थ में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या अत्यधिक पाई जाती है?

2 / 5

प्रश्न 2: स्थिर विद्युत् प्रेरण की क्रिया में प्रेरक आवेश के आकर्षण बल के कारण बँधा रहने वाला आवेश क्या कहलाता है?

3 / 5

प्रश्न 3: बाह्य स्थिर वैद्युत क्षेत्र में रखे जाने पर चालक के अन्दर विद्युत् क्षेत्र की तीव्रता का मान कितना होता है?

4 / 5

प्रश्न 4: गॉस के प्रमेय के अनुसार, किसी चालक के अन्दर कुल आवेश (q) का मान कितना होता है?

5 / 5

प्रश्न 5: स्थिर वैद्युत क्षेत्र में चालक के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

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