पदार्थों के चुंबकीय गुण और पार्थिव चुंबकत्व से संबंधित परिभाषाएँ
(Definitions Related to Magnetic Properties of Matters and Terrestrial Magnetism)
(i) चुंबकन-क्षेत्र (Magnetising Field)
पदार्थों के चुंबकीय गुण परिभाषाएँ Magnetic Properties , जिस चुंबकीय-क्षेत्र में चुंबकीय पदार्थ को रखने पर वह चुंबकीय हो जाता है, उस चुंबकीय क्षेत्र को चुंबकन-क्षेत्र कहते हैं। इस क्षेत्र की तीव्रता को $H$ से प्रदर्शित करते हैं। इसका SI मात्रक ऐम्पियर प्रतिमीटर ($\text{Am}^{-1}$) तथा CGS मात्रक ओर्स्टेड (Oersted) है।
$$1 \text{ ओर्स्टेड} = 80 \text{ ऐम्पियर/मीटर}$$
(ii) चुंबकीय फ्लक्स घनत्व या चुंबकीय प्रेरण (Magnetic Flux Density)
जब किसी चुंबकीय पदार्थ को किसी चुंबकन क्षेत्र H में रखा जाता है तो वह पदार्थ भी चुंबकीय हो जाता है। इस स्थिति में पदार्थ के अन्दर दो कारणों से बल रेखाएँ उपस्थित रहती हैं—(i) पदार्थ के चुंबकीय होने से उसमें उत्पन्न चुंबकत्व के कारण और (ii) चुंबकन क्षेत्र H के कारण। इन दोनों कारणों से पदार्थ के अन्दर किसी बिन्दु पर परिणामी तीव्रता को चुंबकीय फ्लक्स घनत्व या चुंबकीय प्रेरण कहते हैं।
इसे B से प्रदर्शित करते हैं। इसका SI मात्रक टेसला या वेबर/मीटर$$^2$$ या न्यूटन/ऐम्पियर मीटर है तथा CGS मात्रक गॉस (संकेत G) है।
$$1 \text{ टेसला} = 10^{-4} \text{ गॉस}$$
(iii) चुंबकन-तीव्रता (Intensity of Magnetisation)
चुंबकन क्षेत्र में स्थित किसी चुंबकीय पदार्थ के प्रति एकांक आयतन में प्रेरित चुंबकीय आघूर्ण को चुंबकन-तीव्रता कहते हैं। इसे I से प्रदर्शित करते हैं।
यदि चुंबकीय पदार्थ का आयतन V तथा उसमें प्रेरित चुंबकीय आघूर्ण M हो, तो
$$I = \frac{M}{V}$$
यदि चुंबकीय पदार्थ की लम्बाई L, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A तथा ध्रुव-प्रबल्य m हो, तो
$$I = \frac{m \times L}{L \times A} = \frac{m}{A}$$
इसका मात्रक ऐम्पियर प्रति मीटर ($$\text{Am}^{-1}$$) है। अतः किसी पदार्थ की चुंबकन-तीव्रता उस पदार्थ के प्रति एकांक क्षेत्रफल में उत्पन्न ध्रुव-प्रबल्य के बराबर होती है। यह राशि, किसी पदार्थ को चुंबकन क्षेत्र में रखने पर उसमें उत्पन्न चुंबकन की मात्रा को व्यक्त करती है।
(iv) चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility)
किसी पदार्थ में उत्पन्न चुंबकन-तीव्रता I और चुंबकन-क्षेत्र H के अनुपात को उस पदार्थ की चुंबकीय प्रवृत्ति कहते हैं। इसे $$\chi$$ (काई) से प्रदर्शित करते हैं।
$$\chi = \frac{I}{H}$$
इसका कोई मात्रक नहीं होता। यह एक विमाहीन राशि है। चुंबकीय प्रवृत्ति किसी पदार्थ का वह गुण है जो हमें यह बतलाता है कि किसी पदार्थ को कितनी आसानी से चुंबकीय किया जा सकता है।
(v) निरपेक्ष चुंबकशीलता (Absolute Permeability)
किसी पदार्थ को चुंबकन-क्षेत्र में रखे जाने पर चुंबकीय फ्लक्स घनत्व B और चुंबकन-क्षेत्र H के अनुपात को उस पदार्थ की निरपेक्ष चुंबकशीलता कहते हैं। इसे $$\mu$$ से प्रदर्शित करते हैं।
$$\mu = \frac{B}{H}$$
इसका SI मात्रक टेसला मीटर प्रति ऐम्पियर ($$\text{TmA}^{-1}$$) है। चुंबकशीलता या पारगम्यता वह गुण होता है जो पदार्थ से गुजरने वाली बल रेखाओं की संख्या को निर्धारित करता है। यदि किसी पदार्थ की चुंबकशीलता या पारगम्यता अधिक है तो उससे होकर अधिक बल रेखाएँ गुजरेंगी।
(vi) आपेक्षिक चुंबकशीलता (Relative Permeability)
किसी पदार्थ की निरपेक्ष चुंबकशीलता $$\mu$$ और निर्वात की चुंबकशीलता $$\mu_0$$ के अनुपात को उस पदार्थ की आपेक्षिक चुंबकशीलता कहते हैं।
$$\mu_r = \frac{\mu}{\mu_0} \quad \text{या} \quad \mu = \mu_r \cdot \mu_0$$
निम्न सम्बन्ध स्मरणीय हैं —
$$\mu_r = 1 + \chi$$
$$B = \mu_0 (I + H)$$
$$\mu = \mu_0 (1 + \chi)$$
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चुंबकीय गुण और पार्थिव चुंबकत्व – प्रश्न और उत्तर (Q&A)
प्रश्न 1: चुंबकन-क्षेत्र (Magnetising Field) किसे कहते हैं? इसका SI मात्रक क्या है?
उत्तर — जिस चुंबकीय-क्षेत्र में चुंबकीय पदार्थ को रखने पर वह चुंबकीय हो जाता है, उस चुंबकीय क्षेत्र को चुंबकन-क्षेत्र कहते हैं। इसकी तीव्रता को H से प्रदर्शित करते हैं। इसका SI मात्रक ऐम्पियर प्रतिमीटर ($$\text{Am}^{-1}$$) तथा CGS मात्रक ओर्स्टेड है, जहाँ $$1 \text{ ओर्स्टेड} = 80 \text{ ऐम्पियर/मीटर}$$ होता है।
प्रश्न 2: चुंबकीय फ्लक्स घनत्व या चुंबकीय प्रेरण (B) क्या है?
उत्तर — जब किसी चुंबकीय पदार्थ को चुंबकन क्षेत्र H में रखा जाता है, तो पदार्थ के अन्दर बल रेखाएँ दो कारणों से उपस्थित रहती हैं—(i) पदार्थ के चुंबकीय होने से उत्पन्न चुंबकत्व के कारण, और (ii) चुंबकन क्षेत्र H के कारण। इन दोनों कारणों से पदार्थ के अन्दर किसी बिन्दु पर परिणामी तीव्रता को चुंबकीय फ्लक्स घनत्व या चुंबकीय प्रेरण कहते हैं। इसका SI मात्रक टेसला ($$\text{Tesla}$$) है।
प्रश्न 3: चुंबकन-तीव्रता (I) से क्या तात्पर्य है? इसका सूत्र लिखिए।
उत्तर — चुंबकन क्षेत्र में स्थित किसी चुंबकीय पदार्थ के प्रति एकांक आयतन में प्रेरित चुंबकीय आघूर्ण को चुंबकन-तीव्रता कहते हैं। इसे I से प्रदर्शित करते हैं।
सूत्र:
$$I = \frac{M}{V} \quad \text{या} \quad I = \frac{m}{A}$$
(जहाँ M चुंबकीय आघूर्ण, V आयतन, m ध्रुव-प्रबल्य तथा A अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है।)
प्रश्न 4: चुंबकीय प्रवृत्ति ($$\chi$$) क्या है? इसका मात्रक लिखिए।
उत्तर — किसी पदार्थ में उत्पन्न चुंबकन-तीव्रता I और चुंबकन-क्षेत्र H के अनुपात को उस पदार्थ की चुंबकीय प्रवृत्ति ($$\chi$$) कहते हैं। अर्थात्
$$\chi = \frac{I}{H}$$
यह एक विमाहीन राशि है, इसलिए इसका कोई मात्रक नहीं होता है।
प्रश्न 5: निरपेक्ष चुंबकशीलता ($$\mu$$) और आपेक्षिक चुंबकशीलता ($$\mu_r$$) में क्या संबंध है?
उत्तर — निरपेक्ष चुंबकशीलता ($$\mu = \frac{B}{H}$$) तथा निर्वात की चुंबकशीलता ($$\mu_0$$) के अनुपात को आपेक्षिक चुंबकशीलता ($$\mu_r$$) कहते हैं। इनके बीच निम्नलिखित संबंध होता है:
$$\mu_r = \frac{\mu}{\mu_0} \quad \text{या} \quad \mu = \mu_r \cdot \mu_0$$
तथा चुंबकीय प्रवृत्ति के साथ इसका मुख्य संबंध $$\mu_r = 1 + \chi$$ होता है।
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