यान्त्रिक-तरंगों में ध्रुवण का प्रदर्शन (Demonstration of Polarisation in Mechanical Waves)
यान्त्रिक-तरंगों में ध्रुवण का प्रदर्शन – ध्रुवण की घटना केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होती है, अनुदैर्ध्य तरंगों में नहीं। इसका प्रदर्शन निम्न प्रयोग के द्वारा किया जा सकता है—
चित्र 4.24 में S1 और S2 दो स्लिट हैं जो गत्ते के दो टुकड़ों से काटकर बनाये गये हैं। PQ एक डोरी है जो दोनों स्लिटों से होकर जाती है। डोरी का एक सिरा Q दृढ़ आधार से जुड़ा है तथा दूसरे सिरे P को हाथ से पकड़कर हिलाया जा सकता है ।
डोरी के सिरे P को हाथ से पकड़कर उर्ध्वाधर दिशा में हिलाते हैं जिससे उसमें अनुप्रस्थ कम्पन होने लगता है। यदि दोनों स्लिट S1 और S2 एक-दूसरे के समान्तर उर्ध्वाधर तल में हैं तथा अनुप्रस्थ कम्पन स्लिटों की लम्बाई के समान्तर है, तो ये कम्पन दोनों स्लिटों से होकर ज्यों के त्यों गुजर जाते हैं ।
अब यदि S1 को स्थिर रखकर S2 को क्रमशः घुमाते जायें, तो S2 में से होकर निकलने वाले कम्पनों का आयाम कम होने लगता है और जब S2 समकोण से घूम जाता है अर्थात् S2 की लम्बाई S1 की लम्बाई के लम्बवत् हो जाती है, तो S2 में से कम्पन बाहर नहीं निकल पाते अर्थात् कम्पन का आयाम शून्य हो जाता है। यदि S2 को और घुमाते जायें तो कम्पन का आयाम बढ़ने लगता है और जब S2 की लम्बाई S1 की लम्बाई के समान्तर हो जाती है, तो S2 से निकलने वाले कम्पन के आयाम पूर्ववत् हो जाते हैं। अब यदि डोरी को उसकी लम्बाई के अनुदिश बार-बार खींचें और ढीला करें, तो उसमें अनुदैर्ध्य कम्पन होने लगते हैं। स्लिट S2 को स्लिट S1 के सापेक्ष किसी भी कोण से घुमायें, अनुदैर्ध्य कम्पन सदैव S2 से होकर निकल जाते हैं ।
उपर्युक्त प्रयोग से यह सिद्ध होता है कि अनुप्रस्थ कम्पन स्लिट S2 से ज्यों के त्यों तभी निकल पाते हैं जब उसकी लम्बाई स्लिट S1 की लम्बाई के समान्तर हो। लेकिन अनुदैर्ध्य कम्पन प्रत्येक स्थिति में स्लिट S2 से निकल जाते हैं। स्पष्ट है कि केवल अनुप्रस्थ तरंगों में ही सममिति की कमी होती है, अनुदैर्ध्य तरंगों में नहीं। अतः: ध्रुवण की घटना केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होती है, अनुदैर्ध्य तरंगों में नहीं ।
अभ्यास प्रश्न-उत्तर: यांत्रिक तरंगों में ध्रुवण का प्रदर्शन
प्रश्न 1: ध्रुवण की घटना किन तरंगों में होती है और किनमें नहीं?
उत्तर: ध्रुवण की घटना केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होती है, अनुदैर्ध्य तरंगों में नहीं ।
प्रश्न 2: प्रयोग में स्लिट S2 को घुमाने पर कम्पनों के आयाम पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: जब S2 को घुमाते हैं, तो निकलने वाले कम्पनों का आयाम कम होने लगता है। जब S2 की लम्बाई S1 के लम्बवत् हो जाती है, तो आयाम शून्य हो जाता है ।
प्रश्न 3: अनुदैर्ध्य तरंगों के साथ स्लिट प्रयोग का क्या परिणाम होता है?
उत्तर: अनुदैर्ध्य कम्पन प्रत्येक स्थिति में S2 से होकर निकल जाते हैं, चाहे S2 को S1 के सापेक्ष किसी भी कोण पर घुमाया जाए ।
प्रश्न 4: इस प्रयोग से क्या सिद्ध होता है?
उत्तर: यह सिद्ध होता है कि अनुप्रस्थ कम्पन तभी S2 से निकल पाते हैं जब वे S1 के समान्तर हों, जबकि अनुदैर्ध्य कम्पन प्रत्येक स्थिति में निकल जाते हैं ।
प्रश्न 5: सममिति (Symmetry) के आधार पर ध्रुवण को कैसे समझाया जा सकता है?
उत्तर: स्पष्ट है कि केवल अनुप्रस्थ तरंगों में ही सममिति की कमी होती है, अनुदैर्ध्य तरंगों में नहीं, जिसके कारण ही ध्रुवण की घटना केवल अनुप्रस्थ तरंगों में होती है ।
और भी पढ़ें –
समतल पारगमन ग्रीटिंग (Plane Transmission Grating): परिभाषा, बनावट और सिद्धांत
फ़्रेनल दूरी (Fresnel Distance): परिभाषा, व्यंजक और महत्वपूर्ण उदाहरण | Physics Notes
प्रकाश का ध्रुवण (Polarisation of Light): परिभाषा, प्रकार और स्पष्टीकरण
Play quiz here 👇👇👇
Join Our Physics Community!
Latest Physics Notes, PGT/NET Prep & Daily MCQs directly on your WhatsApp.
100% Private & Secure | No Phone Number Required