प्रकाश के ध्रुवण का प्रायोगिक प्रदर्शन (Experimental Demonstration of Polarisation of Light)
प्रकाश के ध्रुवण का प्रायोगिक प्रदर्शन के लिए टूर्मैलिन क्रिस्टल (Tourmaline Crystal) प्रयुक्त किया जाता है ।
यह देखा गया है कि टूर्मैलिन क्रिस्टल का क्रिस्टलीय अक्ष (Crystallographic Axis) प्रकाश-किरणों के लिए एक स्लिट की भाँति कार्य करता है। टूर्मैलिन का एक क्रिस्टल लेकर उसे इस प्रकार काटते हैं कि उसका अक्ष उसके धरातल में ही हो। अब यदि साधारण प्रकाश को इस क्रिस्टल पर लम्बवत् डाला जाये तो इससे निर्गत प्रकाश में प्रकाश-तरंग के अनुप्रस्थ कम्पन (वैद्युत वेक्टर के कम्पन) प्रकाश के संचरण के लम्बवत् तल में एक ही दिशा में सीमित हो जाते हैं अर्थात् इस क्रिस्टल से गुजरने के बाद प्रकाश ध्रुवित हो जाता है ।
क्रिस्टल A और आँख के बीच दूसरा क्रिस्टल B इस प्रकार रखते हैं कि दोनों क्रिस्टलों के अक्ष एक-दूसरे के समान्तर हों। इस स्थिति में B से देखने पर निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम होती है। अब क्रिस्टल A को स्थिर रखकर क्रिस्टल B को उसके ही तल में क्रमशः घुमाते जाते हैं। ऐसा करने से निर्गत प्रकाश की तीव्रता क्रमशः कम होने लगती है और जब क्रिस्टल B का अक्ष क्रिस्टल A के अक्ष के लम्बवत् हो जाता है, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता न्यूनतम हो जाती है जिससे लगभग अँधेरा छा जाता है। इसके आगे क्रिस्टल B को और घुमाने पर प्रकाश की तीव्रता क्रमशः बढ़ने लगती है तथा जब उसका अक्ष A के अक्ष के समान्तर हो जाता है, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता पुनः अधिकतम हो जाती है ।
इससे यह सिद्ध होता है कि प्रकाश-तरंगों में अनुप्रस्थ कम्पन होते हैं। यदि प्रकाश-तरंगों में अनुदैर्ध्य कम्पन होते, तो निश्चित रूप से क्रिस्टल B को घुमाने पर प्रकाश की तीव्रता में कोई परिवर्तन नहीं होता। इस प्रकार प्रकाश-तरंग अनुप्रस्थ तरंग होती है ।
टूर्मैलिन प्रयोग की व्याख्या
साधारण प्रकाश में उसके अनुप्रस्थ कम्पन (वैद्युत वेक्टरों के कम्पन) प्रकाश-संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में प्रत्येक दिशा में सममित होते हैं। जब यह प्रकाश क्रिस्टल A पर आपतित होता है तो क्रिस्टल A से होकर केवल वे ही कम्पन गुजर पाते हैं जो क्रिस्टल के अक्ष के समान्तर होते हैं, शेष कम्पन रोक दिये जाते हैं। इस प्रकार क्रिस्टल A से निर्गत प्रकाश में अनुप्रस्थ कम्पन प्रकाश-संचरण की दिशा के लम्बवत् तल में एक ही दिशा में सीमित हो जाते हैं, पहले की भाँति सभी दिशा में सममित नहीं हो पाते। स्पष्ट है कि क्रिस्टल A से निर्गत प्रकाश ध्रुवित प्रकाश (Polarised Light) होता है ।
जब क्रिस्टल A से निर्गत ध्रुवित प्रकाश को क्रिस्टल B पर डाला जाता है और जब B का अक्ष A के अक्ष के समान्तर होता है, तो अनुप्रस्थ कम्पन क्रिस्टल B से भी निकल जाते हैं जिससे प्रकाश की तीव्रता अधिकतम होती है, किन्तु जब क्रिस्टल B को घुमाने पर उसका अक्ष क्रिस्टल A के अक्ष के लम्बवत् हो जाता है, तो क्रिस्टल B भी अनुप्रस्थ कम्पनों को रोक देता है जिससे निर्गत प्रकाश की तीव्रता न्यूनतम हो जाती है। फलस्वरूप अँधेरा छा जाता है। इस स्थिति में दोनों क्रिस्टल परस्पर क्रॉसित (Crossed) कहलाते हैं। वास्तव में क्रिस्टल B से निर्गत प्रकाश की तीव्रता दोनों क्रिस्टलों के अक्षों के बीच के कोण पर निर्भर करती है ।
टूर्मैलिन के पहले क्रिस्टल A को, जो साधारण प्रकाश को ध्रुवित करता है, ध्रुवक (Polariser) कहते हैं। दूसरे क्रिस्टल B को, जिसके द्वारा पहले क्रिस्टल से निर्गत प्रकाश के ध्रुवित होने या न होने की जाँच की जाती है, विश्लेषक (Analyser) कहते हैं ।
अभ्यास प्रश्न-उत्तर: प्रकाश के ध्रुवण का प्रायोगिक प्रदर्शन
प्रश्न 1: प्रकाश के ध्रुवण के प्रायोगिक प्रदर्शन के लिए किस क्रिस्टल का उपयोग किया जाता है?
उत्तर: प्रकाश के ध्रुवण के प्रायोगिक प्रदर्शन के लिए टूर्मैलिन क्रिस्टल (Tourmaline Crystal) का उपयोग किया जाता है ।
प्रश्न 2: टूर्मैलिन क्रिस्टल का अक्ष प्रकाश-किरणों के लिए किसकी भाँति कार्य करता है?
उत्तर: टूर्मैलिन क्रिस्टल का क्रिस्टलीय अक्ष प्रकाश-किरणों के लिए एक स्लिट की भाँति कार्य करता है ।
प्रश्न 3: जब दो टूर्मैलिन क्रिस्टल (A और B) के अक्ष परस्पर लम्बवत् (Crossed) होते हैं, तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता कैसी होती है?
उत्तर: इस स्थिति में निर्गत प्रकाश की तीव्रता न्यूनतम हो जाती है, जिससे लगभग अँधेरा छा जाता है ।
प्रश्न 4: ध्रुवक (Polariser) किसे कहते हैं?
उत्तर: टूर्मैलिन का पहला क्रिस्टल A, जो साधारण प्रकाश को ध्रुवित करता है, ध्रुवक (Polariser) कहलाता है ।
प्रश्न 5: विश्लेषक (Analyser) का क्या कार्य है?
उत्तर: टूर्मैलिन का दूसरा क्रिस्टल B, जिसके द्वारा पहले क्रिस्टल से निर्गत प्रकाश के ध्रुवित होने या न होने की जाँच की जाती है, विश्लेषक (Analyser) कहलाता है ।
और भी पढ़ें –
समतल पारगमन ग्रीटिंग (Plane Transmission Grating): परिभाषा, बनावट और सिद्धांत
फ़्रेनल दूरी (Fresnel Distance): परिभाषा, व्यंजक और महत्वपूर्ण उदाहरण | Physics Notes
प्रकाश का ध्रुवण (Polarisation of Light): परिभाषा, प्रकार और स्पष्टीकरण
यान्त्रिक-तरंगों में ध्रुवण का प्रदर्शन (Demonstration of Polarisation in Mechanical Waves)
Play quiz here 👇👇
Join Our Physics Community!
Latest Physics Notes, PGT/NET Prep & Daily MCQs directly on your WhatsApp.
100% Private & Secure | No Phone Number Required