मापन में त्रुटियाँ (Errors in Measurement)
भौतिकी में सामान्यतया द्रव्यमान, लम्बाई, समय, ताप, विद्युतधारा, विभवान्तर आदि भौतिक राशियों का मापन किया जाता है। मापन यन्त्र और मापनकर्ता दोनों के मापने में यथार्थता की एक सीमा होती है। अतः किसी भौतिक राशि का निरपेक्ष मापन असम्भव है। इसे अनिश्चितता सिद्धान्त (Uncertainty principle) कहते हैं। मापन की अनिश्चितता को ही मापन की त्रुटियाँ कहते हैं। स्पष्ट है कि मापन की प्रक्रिया में त्रुटियाँ सम्भावित हैं। इन त्रुटियों का वर्गीकरण मुख्यतः दो वर्गों में किया गया है—
- क्रमबद्ध त्रुटियाँ (Systematic Errors)
- यादृच्छिक त्रुटियाँ (Random Errors)
1. क्रमबद्ध त्रुटियाँ (Systematic Errors)
ज्ञात कारणों से होने वाली त्रुटियों को क्रमबद्ध त्रुटियाँ कहते हैं। इन त्रुटियों को कम किया जा सकता है। ये त्रुटियाँ निम्नानुसार हो सकती हैं—
(a) यन्त्रीय त्रुटि (Instrumental error): यह त्रुटि यन्त्र की बनावट के कारण होती है। उदाहरणार्थ—विक्षेप चुम्बकत्वमापी के प्रयोग में यदि चुम्बकीय सुई की चूल वृत्तीय पैमाने के केन्द्र पर नहीं है तो संकेतक के दोनों सिरों के पाठ भिन्न-भिन्न होंगे।
यन्त्रीय त्रुटियाँ निम्नलिखित प्रकार की होती हैं—
(i) शून्यांक त्रुटि (Zero error): वर्नियर कैलिपर्स, स्क्रूगेज, गोलाईमापी आदि उपकरणों में प्रारम्भिक स्थिति में मुख्य स्केल और वर्नियर के शून्य चिन्हों को एक ही सीध में होना चाहिए, किन्तु यदि ऐसा नहीं है तो इन उपकरणों से मापन में त्रुटि होगी। इस त्रुटि को शून्यांक त्रुटि कहते हैं। इसे दूर करने के लिए प्रेक्षित पाठ में से शून्यांक त्रुटि को चिन्ह सहित घटाना चाहिए।
(ii) अल्पतमांक त्रुटि (Least count error): उस कम से कम दूरी को जिसे किसी यन्त्र की सहायता से शुद्धतापूर्वक ज्ञात किया जा सकता है, उस यन्त्र का अल्पतमांक कहते हैं। जैसे—साधारण मीटर पैमाने का अल्पतमांक $$0.1\text{ }$$सेमी है। अतः इसकी सहायता से $$0.1\text{ }$$ सेमी तक की लम्बाई को शुद्धतापूर्वक ज्ञात किया जा सकता है। यदि किसी वस्तु की लम्बाई $$1.5\text{ }$$ सेमी से अधिक और $$1.6\text{ }$$ सेमी से कम है, तो मीटर पैमाने की सहायता से उस वस्तु की लम्बाई यथार्थतापूर्वक ज्ञात नहीं की जा सकती। इस प्रकार प्रत्येक यन्त्र में यथार्थता की एक सीमा होती है जिसके कारण उस यन्त्र से मापन में कुछ-न-कुछ त्रुटि अवश्य होती है चाहे कितनी भी सावधानी बरतें। इस प्रकार की त्रुटि को अल्पतमांक त्रुटि कहते हैं।
“मापन यन्त्रों की यथार्थता की सीमा के कारण होने वाली त्रुटि को अल्पतमांक त्रुटि कहते हैं। अल्पतमांक त्रुटि को उस यन्त्र के अल्पतमांक के आधे के बराबर लिया जाता है।”
यदि मीटर पैमाने का अल्पतमांक $$0.1\text{ }$$ सेमी है तो अल्पतमांक त्रुटि $$\pm\frac{0.1}{2}\text{ } सेमी = \pm0.05\text{ }$$ सेमी होगी। इसी प्रकार यदि वर्नियर कैलिपर्स का अल्पतमांक $$0.01\text{ }$$सेमी है तो अल्पतमांक त्रुटि $$\pm0.005\text{ }$$सेमी होगी।
(iii) अचर त्रुटि (Constant error): बार-बार प्रेक्षण लेने के बाद भी त्रुटि का मान उतना ही रहता है, तो इस प्रकार की त्रुटि को अचर त्रुटि कहते हैं। किसी यन्त्र में पैमाने के गलत अंशांकन (Faulty gradation) के कारण इस प्रकार की त्रुटि होती है। इस त्रुटि के निवारण के लिए भौतिक राशि का मापन विभिन्न तरीकों से करते हैं तथा अचर त्रुटि के अस्तित्व का पता लगाते हैं तथा मापन के लिए अच्छे मानक यन्त्रों का उपयोग करना चाहिए।
(b) बाह्य कारकों के कारण त्रुटि (Error due to external causes): बाह्य परिस्थितियों जैसे—दाब, ताप, वायु आदि के कारण यह त्रुटि होती है। उदाहरणार्थ—ताप बढ़ने से ध्वनि का वेग बढ़ जाता है, लोलक वाली घड़ी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से यह तेज या सुस्त चलने लगती है, आदि। त्रुटि के निवारण के लिए उचित संशोधन आवश्यक होता है।
(c) अपूर्णता त्रुटि (Error due to imperfection): त्रुटियों का कारण जानते हुए भी त्रुटियों का पूर्णरूपेण निराकरण न कर पाना अपूर्णता त्रुटि कहलाती है। जैसे—कैलोरीमापन में विकिरण के कारण होने वाली त्रुटि, सरल लोलक के दोलन में वायु के घर्षण के कारण होने वाली त्रुटि, आदि।
(d) व्यक्तिगत त्रुटि (Personal error): मापनकर्ता की असावधानी या अज्ञानता के कारण अथवा यन्त्रों का पाठ्यांक उचित तरीके से न लेने के कारण होने वाली त्रुटि को व्यक्तिगत त्रुटि कहते हैं। यह त्रुटि निम्न कारणों से हो सकती है—
(i) गलत तरीके से पाठ्यांक लेने से, जैसे—पैमाने पर सुई की स्थिति पढ़ते समय सिर को बायीं ओर या दायीं ओर रखना।
(ii) त्रुटि के स्रोतों की उपेक्षा करने से, जैसे—चुम्बकीय बल रेखाएँ खींचते समय चुम्बक का पृथ्वी की NS रेखा में न रखा जाना तथा आस-पास किसी अन्य चुम्बकीय पदार्थों का उपस्थित होना।
2. यादृच्छिक त्रुटियाँ (Random errors)
यदि कोई मापनकर्ता किसी भौतिक राशि की माप कई बार लेता है और प्रत्येक बार अलग-अलग पाठ्यांक प्राप्त होता है, तो इस प्रकार की त्रुटि को यादृच्छिक त्रुटि कहते हैं। इस त्रुटि का कोई निश्चित कारण नहीं होता। उदाहरणार्थ—स्क्रूगेज से किसी तार का व्यास ज्ञात करते समय यदि तार सर्वत्र एकसमान नहीं है तो प्रत्येक बार पाठ्यांक अलग-अलग प्राप्त होगा।
इस त्रुटि के निवारण के लिए भौतिक राशि को कई बार मापते हैं और अन्त में सभी मापों का मध्यमान निकालते हैं। इस प्रकार भौतिक राशि की शुद्ध माप प्राप्त हो जाती है। मानलो किसी भौतिक राशि को n बार मापने पर उसकी माप $$a_1, a_2, a_3, \dots\dots\dots\dots, a_n$$ प्राप्त होती है। अतः उस भौतिक राशि की शुद्ध माप (या माध्यमान):
त्रुटियों को व्यक्त करना (To Express Errors)
त्रुटियों को व्यक्त करने के आधार पर तीन प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है—
(i) निरपेक्ष त्रुटि, (ii) आपेक्षिक त्रुटि और (iii) प्रतिशत त्रुटि।
(i) निरपेक्ष त्रुटि (Absolute error): किसी भौतिक राशि की वास्तविक माप और मापनकर्ता की व्यक्तिगत माप के अन्तर को मापन की निरपेक्ष त्रुटि कहते हैं। इसे $$\Delta a$$ से प्रदर्शित करते हैं। मानलो किसी भौतिक राशि की माप $$a_1, a_2, a_3, \dots\dots\dots\dots, a_n$$ है। तब वास्तविक माप $$a_{\text{mean}}$$ है। अतः मापन की निरपेक्ष त्रुटि निम्नानुसार होगी—
|\Delta a_1| &= |a_{\text{mean}} – a_1| \\
|\Delta a_2| &= |a_{\text{mean}} – a_2| \\
|\Delta a_3| &= |a_{\text{mean}} – a_3| \quad \text{}
\end{align*}$$इत्यादि।
अतः मध्यमान निरपेक्ष त्रुटि:
$$\text{या} \quad \Delta a = \frac{1}{n} \sum_{i=1}^{n} |\Delta a_i|$$
(ii) आपेक्षिक त्रुटि (Relative error): मापन की निरपेक्ष त्रुटि और भौतिक राशि के वास्तविक माप के अनुपात को आपेक्षिक त्रुटि कहते हैं।
(iii) प्रतिशत त्रुटि (Percentage error): जब आपेक्षिक त्रुटि को प्रतिशत में दर्शाया जाता है तो उसे प्रतिशत त्रुटि कहते हैं।
त्रुटियों का संयोजन या त्रुटि संचरण (Combination or Propagation of Errors)
हम जानते हैं कि घनत्व = द्रव्यमान/आयतन अतः किसी वस्तु के द्रव्यमान और आयतन का मापन कर उस वस्तु का घनत्व ज्ञात किया जा सकता है। इस समय द्रव्यमान के मापन में होने वाली त्रुटि तथा आयतन के मापन में होने वाली त्रुटि का संयुक्त प्रभाव घनत्व की त्रुटि पर पड़ेगा। इसे ही त्रुटियों का संयोजन या त्रुटि संचरण कहते हैं। जब कोई भौतिक राशि एक से अधिक भौतिक राशियों पर निर्भर करती है तो प्रत्येक भौतिक राशि के मापन में होने वाली त्रुटियों का संयुक्त प्रभाव उस भौतिक राशि की त्रुटि का निर्धारण करता है।
(1) योग में (In Sum)
मानलो दो भौतिक राशियों A और B के मापित मान क्रमशः $$A \pm \Delta A$$ तथा $$B \pm \Delta B$$ हैं, जहाँ $$\Delta A$$ और $$\Delta B$$ उनकी निरपेक्ष त्रुटियाँ हैं। हमें इन राशियों के योग $$Z = A + B$$ में निरपेक्ष त्रुटि $$\Delta Z$$ का मान ज्ञात करना है।
$$= (A + B) \pm (\Delta A + \Delta B)$$
$$\pm \Delta Z = \pm(\Delta A + \Delta B), \quad [\because Z = A + B]$$
अतः अधिकतम निरपेक्ष त्रुटि: $$\Delta Z = \Delta A + \Delta B$$
इस प्रकार जब दो राशियों को जोड़ा जाता है तो अन्तिम परिणाम में अधिकतम निरपेक्ष त्रुटि राशियों में निरपेक्ष त्रुटियों के योगफल के बराबर होती है।
💡 उदाहरण (योग):
दो प्रतिरोधों $$R_1 = (50 \pm 2)\text{ }$$ ओमतथा $$R_2 = (100 \pm 3)\text{ }$$ओम को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। संयोजन का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल— $$R = R_1 + R_2 = (50 \pm 2) + (100 \pm 3)$$
$$= (50 + 100) \pm (2 + 3) = \mathbf{(150 \pm 5)\text{ }}$$ओम (उत्तर)
(2) अंतर में (In Difference)
मानलो $$Z = A – B$$ में निरपेक्ष त्रुटि $$\Delta Z$$ का मान ज्ञात करना है।
$$= (A – B) \pm \Delta A \mp \Delta B$$
$$\pm \Delta Z = \pm \Delta A \mp \Delta B, \quad [\text{चूँकि } Z = A – B]$$
अतः अधिकतम सम्भव त्रुटि: $$\Delta Z = \Delta A + \Delta B$$
💡 उदाहरण (अंतर):
पानी का प्रारम्भिक ताप $$(25.3 \pm 0.2)^\circ\text{C}$$ तथा अन्तिम ताप $$(72.4 \pm 0.3)^\circ\text{C}$$ नोट किया गया। पानी के ताप में वृद्धि की गणना कीजिए।
हल— $$\theta_2 – \theta_1 = (72.4 \pm 0.3) – (25.3 \pm 0.2)$$
$$= (72.4 – 25.3) \pm 0.3 \mp 0.2$$
$$= \mathbf{(47.1 \pm 0.5)^\circ\text{C}}$$ (उत्तर)
(3) गुणा में (In Product)
मानलो दो भौतिक राशियों के गुणा $$Z = AB$$ में निरपेक्ष त्रुटि $$\Delta Z$$ का मान ज्ञात करना है।
$$= AB \pm A\Delta B \pm B\Delta A \pm \Delta A\Delta B$$
दोनों पक्षों में $$Z = AB$$ का भाग देने पर,
$$1 \pm \frac{\Delta Z}{Z} = 1 \pm \frac{\Delta B}{B} \pm \frac{\Delta A}{A} \pm \frac{\Delta A}{A}\frac{\Delta B}{B}$$
या $$\pm \frac{\Delta Z}{Z} = \pm \frac{\Delta A}{A} \pm \frac{\Delta B}{B} \pm \frac{\Delta A}{A}\frac{\Delta B}{B}$$
चूँकि $$\frac{\Delta A}{A}$$ और $$\frac{\Delta B}{B}$$ के मान बहुत ही कम हैं अतः उनके गुणनफल की उपेक्षा करने पर:
$$\pm \frac{\Delta Z}{Z} = \pm \frac{\Delta A}{A} \pm \frac{\Delta B}{B}$$
अतः Z में अधिकतम भिन्नात्मक त्रुटि: $$\frac{\Delta Z}{Z} = \frac{\Delta A}{A} + \frac{\Delta B}{B}$$
(4) भाग में (In Division)
मानलो राशियों के भागफल $$Z = \frac{A}{B}$$ में निरपेक्ष त्रुटि $$\Delta Z$$ ज्ञात करनी है।
दोनों पक्षों में $$Z = \frac{A}{B}$$ का भाग देने पर,
$$1 \pm \frac{\Delta Z}{Z} = \frac{1 \pm \frac{\Delta A}{A}}{1 \pm \frac{\Delta B}{B}} = \left(1 \pm \frac{\Delta A}{A}\right)\left(1 \pm \frac{\Delta B}{B}\right)^{-1}$$
$$= \left(1 \pm \frac{\Delta A}{A}\right)\left(1 \mp \frac{\Delta B}{B}\right), \quad \text{}$$द्विपद प्रमेय से
$$= 1 \mp \frac{\Delta B}{B} \pm \frac{\Delta M}{A} – \frac{\Delta M}{A}\frac{\Delta B}{B}$$
गुणनफल $$\frac{\Delta A}{A} \cdot \frac{\Delta B}{B}$$ की उपेक्षा करने पर अधिकतम भिन्नात्मक त्रुटि:
$$\frac{\Delta Z}{Z} = \frac{\Delta A}{A} + \frac{\Delta B}{B}$$
निष्कर्ष: दो राशियों के भागफल में अधिकतम भिन्नात्मक त्रुटि उन राशियों में भिन्नात्मक त्रुटियों के योगफल के बराबर होती है।
(5) घात में (In Power)
मानलो $$Z = A^n$$ तब द्विपद प्रमेय के उपयोग से हल करने पर:
व्यापक रूप में (General Form): यदि $$Z = \frac{A^p B^q}{C^r}$$ हो, तो अधिकतम प्रतिशत या भिन्नात्मक त्रुटि:
$$\frac{\Delta Z}{Z} = p \cdot \frac{\Delta A}{A} + q \cdot \frac{\Delta B}{B} + r \cdot \frac{\Delta C}{C}$$
उपर्युक्त सम्बन्ध से स्पष्ट है कि जिस राशि की घात जितनी अधिक होगी उस राशि में भिन्नात्मक त्रुटि उतनी ही अधिक होगी। अतः अधिक घात वाली राशि को अधिक यथार्थतापूर्वक मापा जाना चाहिए।
📝 महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न (Numerical Example)
उदाहरण: दिया है, $$V = (100 \pm 4)\text{}$$ वोल्ट तथा $$I = (5 \pm 0.2)\text{}$$ ऐम्पियर। यदि $$R = \frac{V}{I}$$ हों तो R में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए।
हल— सूत्रानुसार: $$R = \frac{V}{I}$$
त्रुटि संयोजन के नियम से भिन्नात्मक त्रुटि:
$$\frac{\Delta R}{R} = \frac{4}{100} + \frac{0.2}{5} = \frac{4}{100} + \frac{4}{100} = \frac{8}{100}$$
अब, प्रतिशत त्रुटि निकालने के लिए:
🎯 उत्तर = 8%
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