कला-सम्बद्ध स्रोत (Coherent Sources)
भौतिकी में, ऐसे दो प्रकाश-स्रोतों को कला-सम्बद्ध स्रोत (Coherent Sources) कहा जाता है जिनसे निकलने वाली प्रकाश तरंगों की आवृत्तियाँ (frequencies) समान होती हैं और उनके बीच का कलान्तर (phase difference) समय के साथ स्थिर रहता है, अर्थात यह समय के साथ परिवर्तित नहीं होता ।
कला-सम्बद्ध स्रोत होने की अनिवार्य शर्तें:
- आवृत्तियों की समानता: दोनों स्रोतों से निकलने वाली प्रकाश तरंगों की आवृत्ति (frequency) और तरंगदैर्घ्य (wavelength) बिल्कुल समान होनी चाहिए ।
- स्थिर कलान्तर: तरंगों के बीच का कलान्तर या तो शून्य होना चाहिए या फिर एक स्थिर मान होना चाहिए जो समय के साथ बिल्कुल न बदले ।
महत्वपूर्ण अवधारणा:
दो अलग-अलग स्वतंत्र प्रकाश-स्रोतों (जैसे दो अलग बल्ब या दो मोमबत्तियाँ) से व्यतिकरण (Interference) प्राप्त करना असंभव है । इसका कारण यह है कि प्रकाश का उत्सर्जन परमाणुओं द्वारा होता है और यह प्रक्रिया यादृच्छिक (random) होती है। दो अलग-अलग स्रोतों के बीच कलान्तर समय के साथ बहुत तेजी से बदलता रहता है, जिससे स्थायी व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त नहीं हो पाता ।
कला-सम्बद्ध स्रोत कैसे प्राप्त करें?
स्थायी व्यतिकरण के लिए यह आवश्यक है कि दोनों कला-सम्बद्ध स्रोतों को एक ही मूल प्रकाश-स्रोत से उत्पन्न किया जाए । इन्हें प्राप्त करने की विधियाँ निम्नलिखित हैं:
- आभासी प्रतिबिंब द्वारा: दोनों स्रोत एक ही मूल प्रकाश-स्रोत के आभासी प्रतिबिंब (virtual image) हो सकते हैं ।
- वास्तविक प्रतिबिंब द्वारा: दोनों स्रोत एक ही मूल स्रोत के वास्तविक प्रतिबिंब भी हो सकते हैं ।
विशेष नोट्स (परीक्षा हेतु):
- लेजर प्रकाश (Laser Light) एकवर्णीय होता है और यह उच्च कोटि का कला-सम्बद्ध स्रोत माना जाता है ।
- दो विभिन्न ध्वनि स्रोत कला-सम्बद्ध हो सकते हैं, लेकिन दो स्वतंत्र प्रकाश स्रोत कभी भी कला-सम्बद्ध नहीं होते ।
कला-सम्बद्ध स्रोत: अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1: ‘कला-सम्बद्ध स्रोत’ (Coherent Sources) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: ऐसे दो प्रकाश-स्रोत जिनसे निकलने वाली तरंगों की आवृत्तियाँ समान होती हैं तथा उनके बीच का कलान्तर (phase difference) समय के साथ स्थिर (constant) रहता है, उन्हें ‘कला-सम्बद्ध स्रोत’ कहा जाता है। व्यतिकरण की घटना देखने के लिए प्रकाश स्रोतों का कला-सम्बद्ध होना अनिवार्य है।
प्रश्न 2: दो स्वतंत्र प्रकाश स्रोतों (जैसे दो अलग बल्ब) से व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त क्यों नहीं किया जा सकता?
उत्तर: दो स्वतंत्र प्रकाश स्रोतों में प्रकाश का उत्सर्जन परमाणुओं द्वारा स्वतंत्र रूप से होता है। इन स्रोतों के बीच कलान्तर समय के साथ बहुत तेज़ी से और अनिश्चित रूप से बदलता रहता है। चूँकि कलान्तर स्थिर नहीं रहता, इसलिए किसी बिंदु पर तीव्रता स्थायी नहीं हो पाती और व्यतिकरण प्रतिरूप दिखाई नहीं देता।
प्रश्न 3: कला-सम्बद्ध स्रोत प्राप्त करने की मुख्य विधि क्या है?
उत्तर: कला-सम्बद्ध स्रोत प्राप्त करने की सबसे प्रभावी विधि यह है कि दोनों स्रोतों को एक ही मूल प्रकाश-स्रोत से उत्पन्न किया जाए। यह प्रायः प्रकाश को दो भागों में विभाजित करके, या एक ही स्रोत के दो आभासी (virtual) अथवा वास्तविक प्रतिबिंब बनाकर किया जाता है।
प्रश्न 4: लेज़र (Laser) प्रकाश को उत्तम कला-सम्बद्ध स्रोत क्यों माना जाता है?
उत्तर: लेज़र प्रकाश एकवर्णीय (monochromatic) होता है और इसके द्वारा उत्सर्जित तरंगें एक ही कला में चलती हैं, जिससे इनमें उच्च कोटि की कला-सम्बद्धता (high degree of coherence) पाई जाती है। यही कारण है कि लेज़र प्रकाश लंबी दूरी तक भी कला-सम्बद्ध बना रहता है।
प्रश्न 5: क्या दो ध्वनि स्रोत कला-सम्बद्ध हो सकते हैं?
उत्तर: हाँ, दो ध्वनि स्रोत कला-सम्बद्ध हो सकते हैं। यदि हम दो लाउडस्पीकरों को एक ही सिग्नल जनरेटर (audio oscillator) से जोड़ दें, तो उनसे निकलने वाली तरंगों की आवृत्ति और कलान्तर स्थिर रहेंगे, जिससे वे कला-सम्बद्ध स्रोत की तरह कार्य करेंगे।
और भी पढ़ें –
हाइगन का तरंग-सिद्धांत (Huygens’ Wave Theory), परिकल्पनाएं , निष्कर्ष- पूरी जानकारी
न्यूटन का कणिका-सिद्धान्त (Newton’s Corpuscular Theory): क्या था? क्यों असफल हुआ?
प्रकाश का व्यतिकरण (Interference of Light): परिभाषा, प्रकार और गणितीय व्याख्या
तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धांत (Principle of Superposition) – सरल व्याख्या
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक शर्तें (Conditions for Interference of Light)
Play quiz here 👇👇👇
Join Our Physics Community!
Latest Physics Notes, PGT/NET Prep & Daily MCQs directly on your WhatsApp.
100% Private & Secure | No Phone Number Required