हाइगन के तरंग-सिद्धांत द्वारा परावर्तन की व्याख्या
हाइगन के तरंग-सिद्धांत का उपयोग करके हम परावर्तन के नियमों को सिद्ध कर सकते हैं। मान लीजिए XY एक परावर्ती पृष्ठ है जिस पर एक समतल तरंगाग्र AB आपतित होता है.
परावर्तन का डेरिवेशन
- मान लीजिए t समय पर बिंदु B, B1 पर पहुँचता है, तो तय की गई दूरी BB1 = ct है.
- उसी समय में बिंदु A से द्वितीयक तरंगिका (secondary wavelet) उत्पन्न होती है जो AQ = ct दूरी तय करती है.
- त्रिभुज ABB1 और AQB1 में, ज्यामितीय समानता के आधार पर यह सिद्ध किया जाता है कि आपतन कोण (i) और परावर्तन कोण (r) बराबर होते हैं (i = r).
मुख्य निष्कर्ष:
इस व्याख्या से स्पष्ट होता है कि:
- आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है (i = r).
- आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं, जो परावर्तन के नियमों की पुष्टि करते हैं.
विस्तृत नोट्स के लिए Educationallof.com पर विजिट करें।
परावर्तन की व्याख्या: अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1: हाइगन के तरंग-सिद्धांत का उपयोग करते हुए परावर्तन के नियमों को कैसे सिद्ध किया जाता है?
उत्तर: हाइगन के सिद्धांत के अनुसार, एक समतल तरंगाग्र AB परावर्ती पृष्ठ XY पर आपतित होता है। तरंग के वेग ‘c’ और समय ‘t’ का उपयोग करते हुए, ज्यामितीय निर्माण (Geometry construction) द्वारा यह सिद्ध किया जाता है कि आपतन कोण (i) और परावर्तन कोण (r) बराबर होते हैं, जो परावर्तन के नियमों की पुष्टि करते हैं।
प्रश्न 2: परावर्तन की व्याख्या में ‘BB1 = ct’ क्या दर्शाता है?
उत्तर: यहाँ ‘c’ तरंग का वेग है और ‘t’ वह समय है जो तरंगाग्र के बिंदु B को परावर्ती पृष्ठ तक पहुँचने में लगता है। अतः, ‘ct’ वह दूरी है जो तरंग ने उस समय अंतराल में तय की है।
प्रश्न 3: आपतन कोण (i) और परावर्तन कोण (r) का मान चित्रानुसार क्या होता है?
उत्तर: आपतन कोण (i) = ∠PAN है और परावर्तन कोण (r) = ∠QAN है। हाइगन के सिद्धांत द्वारा सिद्ध होता है कि i = r।
प्रश्न 4: परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतित किरण और परावर्तित किरण कहाँ स्थित होती हैं?
उत्तर: परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलम्ब तीनों एक ही तल (Plane of incidence) में स्थित होते हैं।
प्रश्न 5: हाइगन के परावर्तन सिद्धांत में त्रिभुज ABB1 और AQB1 की क्या भूमिका है?
उत्तर: इन दोनों समकोण त्रिभुजों की तुलना करने पर (सर्वांगसमता सिद्ध करके) यह गणितीय रूप से प्रमाणित होता है कि sin i = sin r, जिससे अंततः i = r सिद्ध हो जाता है।
हाइगन के तरंग-सिद्धांत द्वारा परावर्तन की व्याख्या
और भी पढ़ें –
न्यूटन का कणिका-सिद्धान्त (Newton’s Corpuscular Theory): क्या था? क्यों असफल हुआ?
हाइगन का तरंग-सिद्धांत (Huygens’ Wave Theory), परिकल्पनाएं , निष्कर्ष- पूरी जानकारी
तरंगाग्र (Wavefront) क्या है? परिभाषा, प्रकार और चित्र सहित संपूर्ण व्याख्या
प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light) क्या है? दैनिक जीवन में इसके 6 महत्वपूर्ण उदाहरण
Play quiz here 👇👇👇
Join Our Physics Community!
Latest Physics Notes, PGT/NET Prep & Daily MCQs directly on your WhatsApp.
100% Private & Secure | No Phone Number Required