न्यूटन का कणिका-सिद्धान्त (Newton’s Corpuscular Theory)
सन् 1676 में सर आइजक न्यूटन ने प्रकाश के संचरण को समझाने के लिए कणिका-सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इस सिद्धान्त के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कणिकाएँ (Corpuscles) | प्रकाश स्रोतों से निरंतर अति सूक्ष्म और द्रव्यमानहीन कण उत्सर्जित होते हैं, जिन्हें ‘कणिकाएँ’ कहा जाता है। |
| संचरण | ये कणिकाएँ समांगी माध्यम में सरल रेखा में एक निश्चित वेग से गति करती हैं। |
| रंगों का बोध | प्रकाश के विभिन्न रंगों का अनुभव कणिकाओं के भिन्न-भिन्न आकार के कारण होता है। |
| दृश्यता | जब ये कणिकाएँ हमारी आँखों के रेटिना से टकराती हैं, तो ऊर्जा हस्तांतरण के कारण हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं। |
न्यूटन के कणिका-सिद्धान्त की असफलता के कारण
- प्रकाश की घटनाओं की व्याख्या में असमर्थ: यह सिद्धान्त प्रकाश के व्यतिकरण, विवर्तन और ध्रुवण जैसी घटनाओं को समझाने में विफल रहा।
- वेग की गलत अवधारणा: इस सिद्धान्त के अनुसार सघन माध्यम में प्रकाश का वेग विरल माध्यम से अधिक होना चाहिए, जो कि प्रायोगिक परिणामों के विपरीत है।
- द्रव्यमान में कमी न होना: यदि प्रकाश स्रोत से निरंतर कणिकाएँ निकलती हैं, तो स्रोत का द्रव्यमान कम होना चाहिए, परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं होता।
- वेग और ताप में संबंध: यह सिद्धान्त मानता है कि प्रकाश का वेग स्रोत के ताप पर निर्भर करना चाहिए, जबकि वास्तव में प्रकाश का वेग स्रोत के ताप से स्वतंत्र होता है।
- तर्कहीन परिकल्पनाएँ: अपवर्तन की व्याख्या के लिए आकर्षक और प्रतिकर्षण बलों की परस्पर विरोधी परिकल्पनाएँ दी गईं, जिनका कोई ठोस सैद्धांतिक आधार नहीं था।
न्यूटन के कणिका-सिद्धान्त पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1: न्यूटन का कणिका-सिद्धान्त किस वर्ष प्रतिपादित किया गया था?
उत्तर: न्यूटन का कणिका-सिद्धान्त सन् 1676 में प्रतिपादित किया गया था।
प्रश्न 2: ‘कणिकाएँ’ (Corpuscles) क्या हैं?
उत्तर: न्यूटन के अनुसार, प्रकाश स्रोतों से निरंतर निकलने वाले अति सूक्ष्म, द्रव्यमानहीन और प्रकाश की गति से चलने वाले कणों को कणिकाएँ कहा जाता है।
प्रश्न 3: न्यूटन का सिद्धान्त किन प्रकाशिक घटनाओं को समझाने में असफल रहा?
उत्तर: यह सिद्धान्त प्रकाश के व्यतिकरण (Interference), विवर्तन (Diffraction) और ध्रुवण (Polarization) जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं को समझाने में पूरी तरह असफल रहा।
प्रश्न 4: सघन और विरल माध्यम में प्रकाश के वेग के संबंध में न्यूटन का क्या मत था?
उत्तर: न्यूटन के सिद्धान्त के अनुसार, सघन माध्यम में प्रकाश का वेग विरल माध्यम की तुलना में अधिक होना चाहिए, जो कि बाद के प्रयोगों में गलत सिद्ध हुआ।
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