स्पेक्ट्रोमीटर (spectrometer) क्या है? कार्यप्रणाली, भाग, समायोजन, उपयोग और शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त करने की विधि (Spectrometer in Hindi)

Table of Contents

स्पेक्ट्रोमीटर या वर्णक्रममापी (Spectrometer)

स्पेक्ट्रोमीटर (Spectrometer) शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त करने और अपवर्तनांक ज्ञात करने का सटीक उपकरण

🔍 परिभाषा (Definition)

स्पेक्ट्रोमीटर एक ऐसा उपकरण है, जिसकी सहायता से शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त किया जाता है तथा प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक (Refractive Index) ज्ञात किया जाता है।

स्पेक्ट्रोमीटर (spectrometer)

⚙️ स्पेक्ट्रोमीटर के मुख्य तीन भाग

(i) समान्तरित्र (Collimator)

इसकी सहायता से प्रकाश किरणों को समान्तर (Parallel) किया जाता है। इसमें धातु की दो बेलनाकार नलियाँ होती हैं, जिसके एक सिरे पर संकीर्ण झिर्री (S) और दूसरे पर अवर्णक उत्तल लेंस (L₁) लगा होता है।

(ii) प्रिज्म मंच (Prism Table)

यह धातु की एक वृत्ताकार चकती होती है जिस पर प्रिज्म को रखा जाता है। इसमें तीन समतलकारी पेंच (Levelling Screws) लगे होते हैं जिनकी मदद से मंच को क्षैतिज किया जाता है।

(iii) दूरदर्शी (Telescope)

इसकी सहायता से निर्गत किरणों को एकत्रित कर शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त किया जाता है। इसमें एक अभिदृश्यक लेंस (Objective Lens) और एक नेत्रिका (Eyepiece) होती है, जिसमें क्रॉस तार (Cross wires) लगे होते हैं।

💡 महत्वपूर्ण जानकारी

  • दूरदर्शी को ऊर्ध्वाधर अक्ष के सापेक्ष घुमाया जा सकता है और इसकी स्थिति को वृत्तीय पैमाने (C) और वर्नियरों (V₁ और V₂) की सहायता से नोट किया जाता है।
  • शुद्ध स्पेक्ट्रम के लिए प्रिज्म को न्यूनतम विचलन (Minimum Deviation) की स्थिति में रखा जाता है।
  • प्रयोगशाला में इसका उपयोग गैसों के वर्णक्रम के अध्ययन के लिए भी किया जाता है।

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स्पेक्ट्रोमीटर का समायोजन (Adjustment)

शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण चरण

1. उपकरण के आधार का समायोजन

सर्वप्रथम स्पिरिट लेवल की सहायता से उपकरण के आधार को क्षैतिज करते हैं। इसके बाद समान्तरित्र और दूरदर्शी के अक्षों को भी पेंचों की सहायता से क्षैतिज किया जाता है।

2. समान्तर किरणों के लिए दूरदर्शी का समायोजन

दूरदर्शी को किसी सफेद दीवार की ओर करके नेत्रिका को तब तक आगे-पीछे खिसकाते हैं जब तक कि क्रॉस तार (Cross wires) स्पष्ट न दिखाई देने लगें। फिर रैक-पिनियन व्यवस्था से दूर की वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त करते हैं।

3. समान्तरित्र का समायोजन

झिर्री (Slit) के पास प्रकाश स्रोत को रखते हैं और झिर्री की चौड़ाई को आवश्यकतानुसार कम या अधिक कर लेते हैं। रैक-पिनियन व्यवस्था द्वारा झिर्री का स्पष्ट प्रतिबिम्ब क्रॉस तार पर प्राप्त किया जाता है।

4. प्रिज्म मंच का समायोजन

इसके लिए स्पिरिट लेवल को प्रिज्म मंच पर किन्हीं दो पेंचों के समान्तर रखते हैं और उन्हें तब तक घुमाते हैं जब तक हवा का बुलबुला मध्य में न आ जाए। इस प्रकार प्रिज्म मंच का तल क्षैतिज हो जाता है।

प्रिज्म का अपवर्तनांक ज्ञात करना

स्पेक्ट्रोमीटर (Spectrometer) का उपयोग

स्पेक्ट्रोमीटर की सहायता से किसी प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक (Refractive Index) ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित मुख्य सूत्र का उपयोग किया जाता है:


प्रिज्म का अपवर्तनांक सूत्र
$$\mu = \frac{\sin \left( \frac{A + \delta_m}{2} \right)}{\sin \left( \frac{A}{2} \right)}$$

1. प्रिज्म का कोण (A) ज्ञात करना

स्पेक्ट्रोमीटर के समायोजन के बाद प्रिज्म को प्रिज्म मंच पर इस प्रकार रखते हैं कि समान्तरित्र से निकलने वाली किरणें दोनों अपवर्तक पृष्ठों पर समान रूप से आपतित हों। दूरदर्शी को घुमाकर दोनों पृष्ठों से परावर्तित प्रतिबिम्बों की स्थिति नोट करते हैं। इन दोनों स्थितियों का अंतर प्रिज्म के कोण का दुगुना (2A) होता है।

2. न्यूनतम विचलन का कोण ($\delta_m$) ज्ञात करना

प्रिज्म को मंच पर इस प्रकार रखते हैं कि प्रकाश केवल एक पृष्ठ पर आपतित हो। स्पेक्ट्रम को दूरदर्शी में देखते हुए प्रिज्म मंच को धीरे-धीरे घुमाते हैं। एक स्थिति ऐसी आती है जहाँ से स्पेक्ट्रम वापस लौटने लगता है; यही न्यूनतम विचलन की स्थिति है।

विशेष नोट: प्रिज्म मंच को घुमाने पर आपतन कोण का मान बदलने से विचलन कोण बदलता है। एक विशेष आपतन कोण पर विचलन न्यूनतम होता है, जिसके आगे विचलन फिर से बढ़ने लगता है।

अशुद्ध एवं शुद्ध स्पेक्ट्रम (Impure & Pure Spectrum)

स्पेक्ट्रोस्कोपी का आधारभूत ज्ञान

🛑 अशुद्ध स्पेक्ट्रम (Impure Spectrum)

जब विभिन्न रंगों की किरणें परस्पर अतिव्याप्त (Overlap) हो जाती हैं और रंगों की सीमाएँ स्पष्ट नहीं होतीं, तो उसे अशुद्ध स्पेक्ट्रम कहते हैं। इसमें मध्य के रंग मिले हुए दिखाई देते हैं।

✅ शुद्ध स्पेक्ट्रम (Pure Spectrum)

जब स्पेक्ट्रम के विभिन्न रंग आपस में मिले हुए नहीं होते तथा उनकी सीमाएँ स्पष्ट रूप से पृथक-पृथक होती हैं, तो उसे शुद्ध स्पेक्ट्रम कहते हैं।

📋 शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त करने की शर्तें

📍 आपतित किरणों को संकीर्ण झिर्री (Narrow Slit) से आना चाहिए।
📍 आपतित प्रकाश किरणों को परस्पर समान्तर (Parallel) होना चाहिए।
📍 प्रिज्म को न्यूनतम विचलन (Minimum Deviation) की स्थिति में होना चाहिए।
📍 निर्गत किरणों को अवर्णक उत्तल लेंस द्वारा पर्दे पर फोकस किया जाना चाहिए।

🌈 स्पेक्ट्रम के प्रकार (Kinds of Spectrum)

स्पेक्ट्रम मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: उत्सर्जन (Emission) और अवशोषण (Absorption)

1. उत्सर्जन स्पेक्ट्रम

  • संतत (Continuous): सभी रंग एक निश्चित क्रम में बिना किसी पृथक्करण रेखा के उपस्थित होते हैं। उदाहरण: सूर्य, विद्युत बल्ब।
  • रेखिल (Line): काली पृष्ठभूमि पर चमकीली रेखाएं दिखाई देती हैं। यह गैसों या परमाण्वीय अवस्था में प्राप्त होता है।
  • बैण्ड (Band): काली पृष्ठभूमि पर चौड़ी चमकीली पट्टियां दिखाई देती हैं। यह आण्विक अवस्था (Molecules) का गुण है।

उत्सर्जन vs अवशोषण स्पेक्ट्रम

आधार उत्सर्जन स्पेक्ट्रम अवशोषण स्पेक्ट्रम
स्रोत तापदीप्त वस्तु के सीधे प्रकाश से पारदर्शी माध्यम में गुजारने के बाद
स्वरूप चमकीली रेखाएं या पट्टियां काली रेखाएं या काली पट्टियां

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स्पेक्ट्रोमीटर (Spectrometer)

स्पेक्ट्रोमीटर और प्रिज्म क्विज़: अपनी तैयारी को परखें! 💥💥💥

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प्रश्न 1. स्पेक्ट्रोमीटर के उस भाग को क्या कहते हैं जिसका मुख्य कार्य प्रकाश किरणों को 'समान्तर' (Parallel) करना होता है?

2 / 5

प्रश्न 2. शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए प्रिज्म को किस स्थिति में रखा जाना चाहिए?

3 / 5

प्रश्न 3. स्पेक्ट्रोमीटर में 'क्रॉस तार' (Cross wires) किस भाग के अंदर लगे होते हैं?

4 / 5

प्रश्न 4. न्यूनतम विचलन (Minimum Deviation) की स्थिति में प्रिज्म के अंदर प्रकाश की किरण की दिशा क्या होती है?

5 / 5

प्रश्न 5. यदि किसी स्पेक्ट्रम में विभिन्न रंगों की किरणें एक-दूसरे पर चढ़ी हुई (Overlap) हों और उनकी सीमाएँ स्पष्ट न हों, तो वह कैसा स्पेक्ट्रम कहलाएगा?

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निष्कर्ष (Conclusion)

उम्मीद है कि यह विस्तृत लेख आपके लिए मददगार साबित हुआ होगा। हमने इस पोस्ट में थ्योरी, न्यूमेरिकल, और तार्किक प्रश्नों को गहराई से कवर किया है ताकि आपकी परीक्षा की तैयारी में कोई कमी न रहे।

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