स्पेक्ट्रम क्या है?प्रकार,शुद्ध और अशुद्ध स्पेक्ट्रम, वास्तविक और आभासी स्पेक्ट्रम के बारे में विस्तार से जाने !

Table of Contents

वास्तविक और आभासी स्पेक्ट्रम(spectrum)

Real and Virtual स्पेक्ट्रम (Spectrum) : पूर्ण विवरण और अंतर

प्रिज्म से निकलने वाला स्पेक्ट्रम मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। इन दोनों के बीच का मुख्य अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है या नहीं।

1. वास्तविक स्पेक्ट्रम (Real)

वह स्पेक्ट्रम जिसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है, वास्तविक स्पेक्ट्रम कहलाता है। इसमें बैंगनी रंग प्रिज्म के आधार की ओर और लाल रंग ऊपर की ओर होता है। इसे किसी भी दिशा से देखा जा सकता है।

वास्तविक स्पेक्ट्रम का बनना

2. आभासी स्पेक्ट्रम (Virtual)

वह स्पेक्ट्रम जिसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि केवल निर्गत किरणों की दिशा से देखने पर ही दिखाई देता है। इसमें रंगों का क्रम उल्टा होता है (लाल नीचे, बैंगनी ऊपर)।

आभासी स्पेक्ट्रम (spectrum) का बनना

📊 वास्तविक बनाम आभासी स्पेक्ट्रम (मुख्य अंतर)

क्र. सं. विशेषता वास्तविक स्पेक्ट्रम आभासी स्पेक्ट्रम
1 प्राप्ति (Display) इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है। इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
2 दृश्यता (Visibility) इसे सभी दिशाओं से देखा जा सकता है। इसे केवल निर्गत किरणों की दिशा से ही देखा जा सकता है।
3 रंगों का क्रम बैंगनी रंग नीचे (आधार की ओर) तथा लाल रंग ऊपर होता है। लाल रंग नीचे (आधार की ओर) तथा बैंगनी रंग ऊपर होता है।

निष्कर्ष: वास्तविक स्पेक्ट्रम का निर्माण किरणों के वास्तव में मिलने से होता है, जबकि आभासी स्पेक्ट्रम निर्गत किरणों को पीछे की ओर बढ़ाने पर बनता हुआ प्रतीत होता है।

अशुद्ध एवं शुद्ध स्पेक्ट्रम(spectrum)

Impure and Pure Spectrum: परिभाषा एवं शर्तें

🔴 अशुद्ध स्पेक्ट्रम (Impure)

जब प्रिज्म पर कई किरणें एक साथ आपतित होती हैं, तो वे पर्दे पर एक-दूसरे पर अतिव्याप्त (Overlap) हो जाती हैं। इससे रंगों की सीमाएँ पृथक्-पृथक् नहीं दिखाई देतीं। इसे ही अशुद्ध स्पेक्ट्रम कहते हैं।

अशुद्ध स्पेक्ट्रम (spectrum)

🟢 शुद्ध स्पेक्ट्रम (Pure)

जब स्पेक्ट्रम के विभिन्न रंग आपस में मिले हुए नहीं होते तथा उनकी सीमाएँ स्पष्ट रूप से पृथक्-पृथक् होती हैं, तो उसे शुद्ध स्पेक्ट्रम कहते हैं। इसमें पता चलता है कि कौन-सा रंग कहाँ से शुरू और कहाँ खत्म हो रहा है।

✨ शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त करने की अनिवार्य शर्तें

1. संकीर्ण झिर्री (Narrow Slit):

आपतित प्रकाश को एक संकीर्ण झिर्री से होकर आना चाहिए। इससे प्रिज्म पर आपतित होने वाली किरणों की संख्या सीमित हो जाती है और शुद्ध स्पेक्ट्रम की संभावना बढ़ जाती है।

2. समांतर किरण पुंज (Parallel Rays):

आपतित किरणें परस्पर समांतर होनी चाहिए। इसके लिए झिर्री को एक उत्तल लेंस के फोकस पर रखा जाता है, जिससे लेंस से निकलने के बाद किरणें समांतर हो जाती हैं।

3. न्यूनतम विचलन की स्थिति (Minimum Deviation):

प्रिज्म को ‘न्यूनतम विचलन’ की स्थिति में होना चाहिए। इससे स्पेक्ट्रम एक सीमित स्थान में प्राप्त होता है और उसकी तीव्रता (Intensity) बढ़ जाती है।

4. अवर्णक उत्तल लेंस (Achromatic Lens):

निर्गत किरणों को एक अवर्णक उत्तल लेंस द्वारा पर्दे पर फोकस किया जाना चाहिए। इससे विभिन्न रंगों की किरणें लेंस के फोकस-तल पर अलग-अलग बिंदुओं पर स्पष्ट रूप से फोकस होती हैं।

शुद्ध स्पेक्ट्रम (spectrum) प्राप्त करना

💡 प्रो टिप: प्रयोगशाला में शुद्ध स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए स्पेक्ट्रोमीटर (Spectrometer) या वर्णक्रममापी का उपयोग किया जाता है।

स्पेक्ट्रम के प्रकार : उत्सर्जन एवं अवशोषण स्पेक्ट्रम

Kinds of Spectrum: Emission & Absorption

1. उत्सर्जन स्पेक्ट्रम (Emission Spectrum)

जब किसी वस्तु को गर्म किया जाता है या ऊर्जा दी जाती है, तो वह प्रकाश उत्सर्जित करने लगती है। इस प्रकाश से प्राप्त स्पेक्ट्रम को उत्सर्जन स्पेक्ट्रम कहते हैं। यह मुख्यतः तीन प्रकार का होता है:

(i) सतत स्पेक्ट्रम (Continuous)

  • इसमें सभी रंग एक निश्चित क्रम में उपस्थित रहते हैं।
  • किन्हीं दो रंगों के बीच कोई पृथक्करण रेखा नहीं होती।
  • उदाहरण: सूर्य, विद्युत बल्ब, मोमबत्ती की ज्वाला।

(ii) रेखित स्पेक्ट्रम (Line)

  • काली पृष्ठभूमि पर पतली व चमकीली रेखाएँ दिखाई देती हैं।
  • इसे परमाणु स्पेक्ट्रम भी कहते हैं।
  • उदाहरण: सोडियम लैंप, हाइड्रोजन गैस, मरकरी लैंप।

हाइड्रोजन का रेखित स्पेक्ट्रम (spectrum)

(iii) बैंड स्पेक्ट्रम (Band)

  • काली पृष्ठभूमि पर चौड़ी-चौड़ी रंगीन पट्टियाँ दिखाई देती हैं।
  • इसे आणविक स्पेक्ट्रम भी कहते हैं।
  • उदाहरण: CO_2 गैस, नाइट्रोजन, बुन्सन ज्वाला का नीला भाग।

बैंड स्पेक्ट्रम (spectrum)शक्तिशाली स्पेक्ट्रोमीटर से अध्ययन करने पर बैंड स्पेक्ट्रम


2. अवशोषण स्पेक्ट्रम (Absorption Spectrum)

जब श्वेत प्रकाश को किसी पारदर्शी ठोस, द्रव या गैस से गुजारा जाता है, तो वह पदार्थ अपनी प्रकृति के अनुसार कुछ निश्चित तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को अवशोषित कर लेता है। स्पेक्ट्रम में इन स्थानों पर काली रेखाएँ या पट्टियाँ दिखाई देती हैं।

अवशोषण स्पेक्ट्रम के प्रकार:

  1. सतत अवशोषण: जब पदार्थ एक निश्चित रंग के पूरे क्षेत्र को सोख ले (जैसे नीला काँच)।
  2. अदीप्त रेखित स्पेक्ट्रम: जब प्रकाश के मार्ग में ठंडी सोडियम वाष्प हो (D1 और D2 रेखाएँ)।
  3. अदीप्त बैंड स्पेक्ट्रम: जब प्रकाश आयोडीन युक्त नली या पोटैशियम परमैंगनेट विलयन से गुजरे।

अवशोषण स्पेक्ट्रम (spectrum)

📊 उत्सर्जन बनाम अवशोषण स्पेक्ट्रम

विशेषता उत्सर्जन स्पेक्ट्रम अवशोषण स्पेक्ट्रम
स्रोत (Source) तापदीप्त वस्तु के सीधे प्रकाश से प्राप्त। प्रकाश को किसी माध्यम से गुजारने के बाद प्राप्त।
स्वरूप (Nature) इसमें रंगीन रेखाएँ या पट्टियाँ होती हैं। इसमें रंगीन स्पेक्ट्रम में काली रेखाएँ/पट्टियाँ होती हैं।
निर्भरता पदार्थ की प्रकृति और अवस्था पर निर्भर। केवल अवशोषक पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर।

🎯 महत्वपूर्ण तथ्य: जिस प्रकार किसी तत्व का उत्सर्जन स्पेक्ट्रम उसका लाक्षणिक गुण (Fingerprint) होता है, ठीक उसी प्रकार अवशोषण स्पेक्ट्रम का अध्ययन करके यह पता लगाया जा सकता है कि वह किस तत्व का है।

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स्पेक्ट्रम के प्रकार: उत्सर्जन और अवशोषण स्पेक्ट्रम पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

1 / 5

प्रश्न 1: काली पृष्ठभूमि पर चमकीली रेखाओं वाले स्पेक्ट्रम को क्या कहा जाता है?

2 / 5

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन-सा स्पेक्ट्रम 'आणविक स्पेक्ट्रम' (Molecular Spectrum) के नाम से भी जाना जाता है?

3 / 5

प्रश्न 3: जब श्वेत प्रकाश को ठंडी सोडियम वाष्प से गुजारा जाता है, तो स्पेक्ट्रम में D_1 और D_2 रेखाओं के स्थान पर क्या दिखाई देता है?

4 / 5

प्रश्न 4: उत्सर्जन स्पेक्ट्रम मुख्य रूप से किस पर निर्भर करता है?

5 / 5

प्रश्न 5: सतत उत्सर्जन स्पेक्ट्रम (Continuous Emission Spectrum) का सही उदाहरण कौन-सा है?

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निष्कर्ष (Conclusion)

उम्मीद है कि यह विस्तृत लेख आपके लिए मददगार साबित हुआ होगा। हमने इस पोस्ट में थ्योरी, न्यूमेरिकल, और तार्किक प्रश्नों को गहराई से कवर किया है ताकि आपकी परीक्षा की तैयारी में कोई कमी न रहे।

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