विषय-आधारित आकलन (Subject-Based Assessment)
शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में विषय-आधारित आकलन (Subject-Based Assessment) का तात्पर्य किसी विशिष्ट विषय (जैसे गणित, विज्ञान, भाषा, सामाजिक अध्ययन) के शिक्षण उद्देश्यों की प्राप्ति का मूल्यांकन करना है। इसके अंतर्गत छात्रों की विषयगत समझ, कौशलों और व्यावहारिक ज्ञान को मापने के लिए असाइनमेंट, प्रोजेक्ट्स और **उपलब्धि परीक्षणों (Achievement Tests)** का उपयोग किया जाता है।
1. असाइनमेंट (Assignments / दत्त कार्य)
असाइनमेंट कक्षा में पढ़ाए गए पाठ को सुदृढ़ करने और छात्रों में स्वाध्याय (Self-study) की आदत विकसित करने का एक प्रमुख साधन है।
📌 असाइनमेंट के मुख्य उद्देश्य एवं लाभ:
- स्वाध्याय और खोज प्रवृत्ति: छात्रों में स्वयं अध्ययन करने और संदर्भ सामग्री खोजने की क्षमता विकसित करना।
- व्यावहारिक अनुप्रयोग: सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक समस्याओं पर लागू करने का अवसर देना।
- रचनात्मकता व मौलिकता: छात्रों को अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करना।
2. उपलब्धि परीक्षण (Achievement Tests) एवं वर्गीकरण
उपलब्धि परीक्षण: यह वह परीक्षण है जो यह मापता है कि छात्रों ने किसी विशिष्ट विषय या पाठ्यक्रम में कितना ज्ञान और कौशल हासिल (Achieve) किया है।
उपलब्धि परीक्षणों का वर्गीकरण (Classification):
(A) प्रमाणिक परीक्षण (Standardized Tests):
- ये परीक्षण विशेषज्ञों और विषय ज्ञानियों द्वारा तैयार किए जाते हैं।
- इनकी वैधता (Validity), विश्वसनीयता (Reliability) तथा मानक (Norms) पूर्व-निर्धारित और उच्च स्तर के होते हैं।
- उदाहरण: राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं, बोर्ड परीक्षाएं।
(B) शिक्षक-निर्मित परीक्षण (Teacher-Made Tests):
- ये कक्षा शिक्षक द्वारा अपनी विशिष्ट कक्षा और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किए जाते हैं।
- इनका मुख्य उद्देश्य दैनिक शिक्षण की प्रगति को आंकना और कक्षा सुधार करना होता है।
- प्रकार: मौखिक परीक्षण, लिखित परीक्षा (निबंधात्मक, वस्तुनिष्ठ) एवं प्रायोगिक परीक्षण।
3. उपलब्धि परीक्षण का निर्माण एवं ब्लू-प्रिंट (Blueprint Construction)
एक अच्छे और निष्पक्ष उपलब्धि परीक्षण के निर्माण हेतु निम्नलिखित 4 चरणों का पालन किया जाता है:
- 1. शैक्षणिक उद्देश्यों की योजना बनाना (Planning Objectives): परीक्षण में ज्ञानात्मक (Knowledge), बोधात्मक (Understanding), अनुप्रयोगात्मक (Application) और कौशलात्मक (Skill) उद्देश्यों का अंक भार (Weightage) तय किया जाता है।
- 2. विषय-वस्तु का चयन व अंक भार (Content Weightage): पाठ्यक्रम के प्रत्येक अध्याय/इकाई को उसके महत्व के अनुसार अंक आबंटित किए जाते हैं।
- 3. प्रश्नों के प्रकार का चयन (Questions Weightage): निबंधात्मक, लघु उत्तरीय तथा वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्नों का अनुपात तय किया जाता है।
- 4. ब्लू-प्रिंट तैयार करना (Design & Blueprint):
ब्लू-प्रिंट क्या है? ब्लू-प्रिंट एक त्रि-आयामी चार्ट (Three-Dimensional Chart) होता है जो परीक्षण के उद्देश्यों, विषय-वस्तु की इकाइयों और प्रश्नों के प्रकारों का एक स्पष्ट नक्शा (Map) प्रस्तुत करता है।
4. महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
Q1. प्रश्न पत्र निर्माण में ‘ब्लू-प्रिंट’ (Blueprint) की क्या भूमिका होती है?
उत्तर: यह उद्देश्यों, इकाइयों तथा प्रश्नों के प्रकार का आनुपातिक वितरण दर्शाने वाला त्रि-आयामी आधारभूत चार्ट है।
Q2. ऐसा परीक्षण जो छात्रों द्वारा किसी विषय विशेष में सीखे गए ज्ञान व कौशलों की सीमा को मापता है, क्या कहलाता है?
उत्तर: उपलब्धि परीक्षण (Achievement Test)
Q3. शिक्षक-निर्मित परीक्षण (Teacher-Made Tests) का प्राथमिक उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: अपनी कक्षा के विद्यार्थियों की विशिष्ट आवश्यकताओं तथा दैनिक प्रगति का आकलन करना।
Q4. विशेषज्ञ द्वारा निर्मित उच्च वैधता और विश्वसनीयता वाले परीक्षण को क्या कहते हैं?
उत्तर: प्रमाणिक परीक्षण (Standardized Test)
Q5. असाइनमेंट (दत्त कार्य) देने का मुख्य शैक्षणिक लाभ क्या है?
उत्तर: छात्रों में स्वाध्याय, विचारशीलता तथा स्वयं सीखने की आदत का विकास होना।
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