मूल्यांकन के आधार (Bases of Assessment & Evaluation)
शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया एक त्रि-ध्रुवीय प्रक्रिया (Tri-polar Process) है, जिसमें शिक्षण उद्देश्य, अधिगम अनुभव और मूल्यांकन आपस में गहराई से जुड़े हैं। बिना मूल्यांकन के यह जानना असंभव है कि शिक्षण के उद्देश्यों की प्राप्ति किस सीमा तक हुई है। बाल विकास व शिक्षाशास्त्र (CDP) में मापन, आकलन और मूल्यांकन के मूलभूत सिद्धांतों को समझना प्रत्येक शिक्षक के लिए अनिवार्य है।
1. मापन, आकलन एवं मूल्यांकन की मूल अवधारणा (Concept & Differences)
(A) मापन (Measurement):
- अर्थ व प्रकृति: यह केवल मात्रात्मक (Quantitative) होता है। यह यह दर्शाता है कि किसी छात्र ने कितना सीखा है या कितने अंक प्राप्त किए हैं।
- उदाहरण: छात्र को गणित विषय में 100 में से 82 अंक मिले। इसमें किसी प्रकार का निर्णय या मूल्य निर्धारित नहीं होता।
(B) आकलन (Assessment):
- अर्थ व प्रकृति: यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान चलने वाली निरंतर एवं सुधारात्मक (Diagnostic Process) प्रक्रिया है।
- उद्देश्य: छात्रों की अधिगम कठिनाइयों की पहचान करना ताकि शिक्षण विधियों में समय रहते सुधार किया जा सके।
(C) मूल्यांकन (Evaluation):
- अर्थ व प्रकृति: यह व्यापक तथा निर्णयात्मक (Judgmental) होता है। इसमें मापन के अंकों के साथ-साथ बालक के व्यवहार, मूल्यों और कौशलों की व्याख्या की जाती है।
- सूत्र: मूल्यांकन = मापन (मात्रात्मक) + मूल्य निर्धारण (गुणात्मक व्याख्या)
2. प्रमुख शिक्षाशास्त्रियों की परिभाषाएं (Definitions of Evaluation)
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण परिभाषाएं:
- सी. वी. गुड (C.V. Good):
“मूल्यांकन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी वस्तु, स्थिति या व्यक्ति के महत्व, उपयोगिता अथवा मूल्य का निर्णय किया जाता है।” - एम. एल. गे (M.L. Gay):
“मूल्यांकन एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके माध्यम से यह निर्धारित किया जाता है कि शैक्षणिक उद्देश्यों को किस सीमा तक प्राप्त किया गया है।” - रॉस (Ross):
“मूल्यांकन का सीधा संबंध शिक्षा के उद्देश्यों से होता है। यह यह जांचता है कि शिक्षण के उद्देश्य पूरे हुए हैं या नहीं।” - क्विलिन तथा हन्ना (Quillen & Hanna):
“विद्यालय में हुए छात्रों के व्यवहार परिवर्तन के संबंध में साक्ष्यों को एकत्र करने और उनकी व्याख्या करने की प्रक्रिया ही मूल्यांकन है।”
3. मूल्यांकन की प्रमुख तकनीकें (Evaluation Techniques)
मूल्यांकन की तकनीकों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है:
(1) परिमाणात्मक / मात्रात्मक तकनीकें (Quantitative Techniques):
- लिखित परीक्षा (Written Examination): इसमें निबंधात्मक, लघु उत्तरीय तथा वस्तुनिष्ठ प्रश्न शामिल होते हैं।
- मौखिक परीक्षा (Oral Examination): इसमें प्रश्नोत्तर, साक्षात्कार तथा वाद-विवाद के माध्यम से ज्ञान की जांच की जाती है।
- प्रायोगिक परीक्षा (Practical Examination): इसमें प्रयोगशाला कार्य और प्रोजेक्ट्स के माध्यम से क्रियात्मक कौशलों की जांच होती है।
(2) गुणात्मक तकनीकें (Qualitative Techniques):
- अवलोकन (Observation): शिक्षक द्वारा कक्षा व खेल के मैदान में छात्र के स्वाभाविक व्यवहार का प्रत्यक्ष निरीक्षण।
- संचयी आलेख (Cumulative Record Card – CRC): इसमें छात्र के प्रवेश से लेकर वर्तमान समय तक की शैक्षणिक, शारीरिक, मानसिक व सामाजिक प्रगति का संपूर्ण रिकॉर्ड होता है।
- घटना वृत्त / उपाख्यानात्मक अभिलेख (Anecdotal Record): छात्र के जीवन की किसी विशिष्ट घटना या व्यवहार का विस्तृत विवरण।
- जांच सूची (Checklist): किसी कौशल या व्यवहार की उपस्थिति/अनुपस्थिति को ‘हाँ/नहीं’ में जांचना।
- रेटिंग स्केल (Rating Scale): बालक के व्यवहार, अभिवृत्ति या कौशल की तीव्रता का स्तर तय करना।
4. वर्तमान परीक्षा प्रणाली की प्रमुख कमियां (Defects in Current System)
- रटने की प्रवृत्ति पर बल (Rote Learning): वर्तमान परीक्षाएं केवल रटकर याद करने की क्षमता को परखती हैं, व्यावहारिक ज्ञान को नहीं।
- केवल शैक्षणिक पक्ष का मापन: इसमें छात्र के शारीरिक, संवेगात्मक, सामाजिक तथा नैतिक (सह-शैक्षणिक) विकास की अनदेखी होती है।
- मानसिक तनाव एवं भय: सत्र के अंत में होने वाली वार्षिक परीक्षाओं के कारण विद्यार्थियों में अत्यधिक तनाव व डर का माहौल बना रहता है।
- वस्तुनिष्ठता का अभाव: निबंधात्मक प्रश्नों में परीक्षकों की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद का प्रभाव अंकों पर पड़ता है।
- सुधार के अवसर का अभाव: सत्रान्त परीक्षा केवल पास/फेल का निर्णय देती है, सीखने के दौरान सुधार का अवसर प्रदान नहीं करती।
5. महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
Q1. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान बच्चों की अधिगम कठिनाइयों का पता लगाने के लिए किया जाने वाला आकलन क्या कहलाता है?
उत्तर: सीखने के लिए आकलन (Assessment for Learning / निर्माणात्मक आकलन)
Q2. “मूल्यांकन = मापन + _________” रिक्त स्थान की पूर्ति हेतु सही विकल्प क्या होगा?
उत्तर: मूल्य निर्धारण (Value Judgment)
Q3. छात्र के संपूर्ण सत्र के शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक विकास का ब्यौरा रखने वाले रिकॉर्ड को क्या कहा जाता है?
उत्तर: संचयी आलेख पत्र (Cumulative Record Card)
Q4. निम्नलिखित में से कौन-सी मूल्यांकन की परिमाणात्मक/मात्रात्मक तकनीक नहीं है?
उत्तर: अवलोकन (Observation – यह एक गुणात्मक तकनीक है)
Q5. पारंपरिक परीक्षा प्रणाली का सबसे प्रमुख दोष क्या माना जाता है?
उत्तर: रटने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना तथा केवल मानसिक/शैक्षणिक पक्ष का मापन करना
मूल्यांकन के आधार
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