प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light)
जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है,
तो मार्ग में आने वाले वायु के अणुओं,
धूल के कणों और अन्य सूक्ष्म कणों द्वारा प्रकाश चारों दिशाओं में फैल जाता है।
माध्यम के कणों द्वारा प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित कर उसे अन्य दिशाओं में विकीर्ण करने की
इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light) कहते हैं।
लॉर्ड रैले के अनुसार, यदि प्रकीर्णन करने वाले कणों का आकार प्रकाश की तरंगदैर्ध्य से बहुत छोटा हो, तो प्रकीर्णित प्रकाश की तीव्रता (I) उसकी तरंगदैर्ध्य ($$\lambda$$) की चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है:
इस सूत्र से स्पष्ट है कि कम तरंगदैर्ध्य वाले रंग (जैसे बैंगनी और नीला) का प्रकीर्णन सबसे अधिक और अधिक तरंगदैर्ध्य वाले रंग (जैसे लाल) का प्रकीर्णन सबसे कम होता है।
दैनिक जीवन में प्रकीर्णन के प्रमुख उदाहरण (Examples of Scattering)
- आकाश का नीला दिखाई देना:
जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से गुजरता है, तो वायु के सूक्ष्म कण बैंगनी और नीले रंग का प्रकीर्णन सबसे अधिक करते हैं। हमारी आँखें नीले रंग के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं, इसलिए बिखरा हुआ नीला प्रकाश जब हमारी आँखों तक पहुँचता है, तो हमें आकाश नीला दिखाई देता है। - दोपहर के समय आकाश का श्वेत (सफेद) दिखाई देना:
दोपहर के समय सूर्य हमारे ठीक सिर के ऊपर होता है, जिससे प्रकाश को वायुमंडल में बहुत कम दूरी तय करनी पड़ती है। कम दूरी के कारण सभी रंगों का प्रकीर्णन बहुत कम हो पाता है और सभी रंग मिलकर श्वेत रूप में हमारी आँखों तक सीधे पहुँचते हैं। - बादलों का श्वेत दिखाई देना:
बादलों में मौजूद धूल के कण और पानी की बूंदें आकार में काफी बड़ी होती हैं। बड़े आकार के कणों पर रैले का नियम लागू नहीं होता; ये कण सभी रंगों का समान रूप से प्रकीर्णन करते हैं, जिससे बादल सफेद दिखाई देते हैं। - सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल दिखाई देना:
इस समय सूर्य क्षितिज के पास होता है, जिससे उसका प्रकाश हम तक पहुँचने के लिए वायुमंडल में बहुत लंबी दूरी तय करता है। लंबी दूरी तय करने के कारण कम तरंगदैर्ध्य वाले रंगों (बैंगनी, नीला) का रास्ते में ही पूरा प्रकीर्णन हो जाता है। केवल कम प्रकीर्णन वाला लाल प्रकाश ही हमारी आँखों तक पहुँच पाता है। - वायुमंडल की अनुपस्थिति में आकाश का काला दिखाई देना:
यदि पृथ्वी पर वायुमंडल न हो (जैसे चंद्रमा पर या अत्यधिक ऊँचाई पर उड़ने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए), तो वहाँ प्रकाश का प्रकीर्णन करने के लिए कोई कण नहीं होंगे। प्रकीर्णन न होने के कारण आकाश पूरी तरह काला दिखाई देता है。 - खतरे के सिग्नल का लाल होना:
लाल रंग की तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) सबसे अधिक होती है, जिसके कारण वायुमंडल के कणों द्वारा इसका प्रकीर्णन (फैलाव) सबसे कम होता है। बिना बिखरे यह प्रकाश कोहरे या धुएं में भी बहुत लंबी दूरी से साफ-साफ दिखाई दे जाता है, इसलिए खतरे के सिग्नल हमेशा लाल बनाए जाते हैं।
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प्रकाश का प्रकीर्णन: न्यूमेरिकल और समाधान
Q1. बैगनी प्रकाश की तरंगदैर्ध्य $$4000\text{ Å}$$ है और लाल प्रकाश की तरंगदैर्ध्य $$8000\text{ Å}$$ है। रैले के प्रकीर्णन नियम का उपयोग करके बताइए कि बैगनी प्रकाश का प्रकीर्णन लाल प्रकाश की तुलना में कितने गुना अधिक होगा?
• दिया है: बैगनी रंग की तरंगदैर्ध्य ($$\lambda_v$$) = $$4000\text{ Å}$$, लाल रंग की तरंगदैर्ध्य ($$\lambda_r$$) = $$8000\text{ Å}$$
• रैले के नियम से: प्रकीर्णन की तीव्रता $$I \propto \frac{1}{\lambda^4}$$
• अनुपात का सूत्र: $$\frac{I_v}{I_r} = \left(\frac{\lambda_r}{\lambda_v}\right)^4$$
• मान रखने पर: $$\frac{I_v}{I_r} = \left(\frac{8000}{4000}\right)^4 = (2)^4$$
• $$\frac{I_v}{I_r} = \mathbf{16}$$
उत्तर: बैगनी प्रकाश का प्रकीर्णन लाल प्रकाश की तुलना में 16 गुना अधिक होगा।
Q2. यदि किसी विशिष्ट तरंगदैर्ध्य $$\lambda_1 = 6000\text{ Å}$$ वाले पीले प्रकाश के प्रकीर्णन की तीव्रता $$I_1$$ है, तो $$\lambda_2 = 3000\text{ Å}$$ वाले प्रकाश के लिए प्रकीर्णन की तीव्रता ($$I_2$$) का मान $$I_1$$ के पदों में क्या होगा?
• दिया है: $$\lambda_1 = 6000\text{ Å}$$, $$\lambda_2 = 3000\text{ Å}$$
• सूत्र से: $$\frac{I_2}{I_1} = \left(\frac{\lambda_1}{\lambda_2}\right)^4$$
• मान रखने पर: $$\frac{I_2}{I_1} = \left(\frac{6000}{3000}\right)^4 = (2)^4 = 16$$
• $$I_2 = \mathbf{16 \times I_1}$$
उत्तर: नई प्रकीर्णन तीव्रता प्रारंभिक तीव्रता की 16 गुनी हो जाएगी।
Q3. दो अलग-अलग प्रकाश किरणों के प्रकीर्णन की तीव्रताओं का अनुपात 81 : 1 है। लॉर्ड रैले के प्रकीर्णन सिद्धांत के अनुसार इन दोनों प्रकाश तरंगों की तरंगदैर्ध्य का अनुपात ($$\lambda_1 : \lambda_2$$) ज्ञात कीजिए।
• दिया है: तीव्रताओं का अनुपात $$\frac{I_1}{I_2} = \frac{81}{1}$$
• सूत्र: $$\frac{I_1}{I_2} = \left(\frac{\lambda_2}{\lambda_1}\right)^4$$
• मान रखने पर: $$\frac{81}{1} = \left(\frac{\lambda_2}{\lambda_1}\right)^4$$
• दोनों पक्षों का चतुर्थ मूल (Fourth Root) लेने पर: $$\frac{\lambda_2}{\lambda_1} = \sqrt[4]{81} = 3$$
• इसलिए, $$\frac{\lambda_1}{\lambda_2} = \mathbf{\frac{1}{3}}$$
उत्तर: दोनों प्रकाश तरंगों की तरंगदैर्ध्य का अनुपात 1 : 3 होगा।
Q4. एक प्रयोग में पाया गया कि नीले प्रकाश ($$\lambda = 4500\text{ Å}$$) के प्रकीर्णन की तीव्रता I है। यदि प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्ध्य को बढ़ाकर $$9000\text{ Å}$$ कर दिया जाए, तो प्रकीर्णित प्रकाश की नई तीव्रता क्या होगी?
• दिया है: $$\lambda_1 = 4500\text{ Å}$$, $$I_1 = I$$, $$\lambda_2 = 9000\text{ Å}$$
• सूत्र: $$\frac{I_2}{I_1} = \left(\frac{\lambda_1}{\lambda_2}\right)^4$$
• मान रखने पर: $$\frac{I_2}{I} = \left(\frac{4500}{9000}\right)^4$$ $$= \left(\frac{1}{2}\right)^4 = \frac{1}{16}$$
• $$I_2 = \mathbf{\frac{I}{16}}$$
उत्तर: तरंगदैर्ध्य दोगुनी करने पर प्रकाश के प्रकीर्णन की तीव्रता घटकर पहले की **$$\frac{1}{16}$$ गुना** रह जाएगी।
Q5. यदि तरंगदैर्ध्य $$\lambda_A$$ वाले प्रकाश का प्रकीर्णन, तरंगदैर्ध्य $$\lambda_B$$ वाले प्रकाश की तुलना में 256 गुना कम होता है, तो $$\lambda_A$$ और $$\lambda_B$$ के बीच सही गणितीय संबंध ज्ञात कीजिए।
• दिया है: प्रकाश A का प्रकीर्णन कम है, यानी $$I_B = 256 \times I_A \Rightarrow \frac{I_B}{I_A} = 256$$
• रैले के सूत्र से: $$\frac{I_B}{I_A}$$ $$= \left(\frac{\lambda_A}{\lambda_B}\right)^4$$
• मान रखने पर: $$256 = \left(\frac{\lambda_A}{\lambda_B}\right)^4$$
• चूंकि $$256 = 4 \times 4 \times 4 \times 4 = (4)^4$$
• अतः दोनों तरफ तुलना करने पर: $$\frac{\lambda_A}{\lambda_B}$$ $$= 4 \Rightarrow \mathbf{\lambda_A = 4\lambda_B}$$
उत्तर: प्रकाश A की तरंगदैर्ध्य, प्रकाश B की तरंगदैर्ध्य की **4 गुनी** होगी।
प्रकाश का प्रकीर्णन और इसके उदाहरण
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प्रकाश का प्रकीर्णन और इसके उदाहरण
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