पृथ्वी का विभव 0 होता है या अनंत | Potential of earth

पृथ्वी का विभव (Potential of the Earth)

Potential of Earth in Hindi

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Quick Fact Check

सवाल: क्या पृथ्वी का विभव (Potential) 0 होता है या अनंत?

जवाब: पृथ्वी का विभव हमेशा शून्य (0) माना जाता है।

तर्क: पृथ्वी की धारिता (Capacity) इतनी अधिक है कि इसे ‘आवेश का भंडार’ माना जाता है। इसमें से थोड़ा आवेश लेने या देने पर इसके विभव में कोई बदलाव नहीं आता, ठीक वैसे ही जैसे समुद्र से एक बाल्टी पानी निकालने पर उसका स्तर नहीं बदलता। 

Potential of Earth in Hindi

जिस प्रकार समुद्र के जल स्तर को मानक (Standard) मानकर ऊँचाई मापी जाती है, ठीक उसी प्रकार “पृथ्वी के विभव को शून्य (Zero) माना जाता है। अनंत नहीं।”

  • शून्य विभव का कारण: पृथ्वी की धारिता (Capacity) इतनी अधिक है कि इसे कितना भी आवेश दें या इससे लें, इसके विभव में कोई खास परिवर्तन नहीं होता।
  • धनात्मक विभव: यदि किसी वस्तु का विभव पृथ्वी के विभव से अधिक है, तो उसे धनात्मक विभव वाली वस्तु कहते हैं।
  • ऋणात्मक विभव: यदि किसी वस्तु का विभव पृथ्वी के विभव से कम है, तो उसे ऋणात्मक विभव वाली वस्तु कहते हैं।

नोट: जब किसी धनावेशित चालक को पृथ्वी से जोड़ते हैं, तो इलेक्ट्रॉन पृथ्वी से निकलकर चालक में जाते हैं और उसे उदासीन कर देते हैं।

विद्युत विभव (Electric Potential): परिभाषा, मात्रक और महत्वपूर्ण सूत्र

Physics Notes for Class 12th & Competitive Exams

विद्युत विभव क्या है? (Definition)

एकांक धनावेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में जो कार्य करना पड़ता है, उसे उस बिंदु का विद्युत विभव (Electric Potential) कहते हैं। इसे ‘V’ से प्रदर्शित किया जाता है।

सूत्र: यदि परीक्षण आवेश q₀ को अनंत से लाने में किया गया कार्य W हो, तो:
V = W / q₀

विद्युत विभव की मुख्य विशेषताएं

  • विद्युत विभव एक अदिश राशि (Scalar Quantity) है।
  • अनंत पर विद्युत विभव का मान शून्य माना जाता है।
  • पृथ्वी का विभव मानक रूप से शून्य माना जाता है।

मात्रक और विमीय सूत्र (Units & Dimensions)

S.I. मात्रक वोल्ट (Volt) या जूल/कूलॉम (J/C)
C.G.S. मात्रक (esu) स्थैत वोल्ट (Stat-volt)
विमीय सूत्र [ML²T⁻³A⁻¹]

उदाहरण (Numerical Example)

प्रश्न: 1.3 × 10⁻⁷ कूलॉम आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में 5.2 × 10⁻⁵ जूल कार्य करना पड़ता है। उस बिंदु पर विभव ज्ञात कीजिए।

हल:
दिया है: W = 5.2 × 10⁻⁵ जूल, q₀ = 1.3 × 10⁻⁷ कूलॉम
सूत्र से: V = W / q₀
V = (5.2 × 10⁻⁵) / (1.3 × 10⁻⁷) = 400 वोल्ट

धनात्मक विभव

जब एकांक धनावेश को लाने में विद्युत बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यह धनावेश के कारण होता है।

ऋणात्मक विभव

जब विद्युत बल द्वारा स्वयं कार्य किया जाता है। यह ऋणावेश के कारण होता है।

विद्युत विभव और धारिता के बारे में और अधिक विस्तार से पढ़ने के लिए आप आधिकारिक NCERT ई-बुक देख सकते हैं:


NCERT Physics: Electrostatic Potential →

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Physics Challenge: पृथ्वी का विभव (Potential of Earth) - Mock Test

1 / 5

प्रश्न: मानक रूप से पृथ्वी का विद्युत विभव (Electric Potential) कितना माना जाता है?

2 / 5

प्रश्न: पृथ्वी के विभव को शून्य मानने का मुख्य कारण क्या है?

3 / 5

प्रश्न: यदि किसी वस्तु का विभव पृथ्वी के विभव से अधिक है, तो उसका विभव कैसा होगा?

4 / 5

प्रश्न: जब एक धनावेशित चालक को पृथ्वी से जोड़ा जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह किस दिशा में होता है?

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प्रश्न: विद्युत विभव (Electric Potential) का विमीय सूत्र क्या है?

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Knowledge Test: पृथ्वी का विभव 🌍

देखें आपने इस टॉपिक को कितना समझा है!


1. क्या पृथ्वी को कितना भी आवेश देने पर उसका विभव (Potential) बदलता है?


2. विद्युत विभव की तुलना द्रव (Liquid) के किस गुण से की जा सकती है?


3. यदि किसी वस्तु में ऋणावेश (Negative Charge) है, तो उसका विभव कैसा होगा?


4. विभव का मात्रक ‘वोल्ट’ किस वैज्ञानिक के सम्मान में रखा गया है?


5. जब ऋणावेशित चालक को पृथ्वी से जोड़ते हैं, तो मुक्त इलेक्ट्रॉन कहाँ जाते हैं?


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