जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत (Jean Piaget’s Cognitive Development Theory)
स्विट्जरलैंड के महान मनोवैज्ञानिक जीन पियाजे (Jean Piaget) को ‘संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत’ का जनक माना जाता है। पियाजे ने बच्चों को ‘नन्हा वैज्ञानिक’ (Little Scientist) कहा है, जो अपने आसपास के पर्यावरण के साथ सक्रिय रूप से अंतःक्रिया करके अपने ज्ञान का सृजन स्वयं करते हैं। पियाजे का मानना था कि बालक जैसे-जैसे बड़ा होता है, उसकी सोच में केवल मात्रात्मक ही नहीं, बल्कि गुणात्मक परिवर्तन (Qualitative Change) भी आता है।
1. सिद्धांत के प्रमुख संप्रत्यय (Key Concepts of Piaget’s Theory)
- स्कीमा (Schema): बालक के मस्तिष्क में जानकारियों की एक संगठित संरचना या पैकेट होती है। हम दुनिया को जिस चश्मे या मानसिक संरचना से देखते हैं, उसे ‘स्कीमा’ कहते हैं।
- आत्मसातीकरण / समावेशी प्रक्रिया (Assimilation): पूर्व निर्मित स्कीमा या ज्ञान में नई जानकारी को ज्यों का त्यों जोड़ना। (जैसे: 4 पैर वाले सफेद कुत्ते को देखकर बालक का 4 पैर वाली बिल्ली को भी ‘कुत्ता’ कहना)।
- समायोजन / अकोमोडेशन (Accommodation): जब पुरानी जानकारी या स्कीमा से काम नहीं चलता, तो नई जानकारी के अनुसार अपने पुराने स्कीमा में बदलाव या संशोधन करना। (जैसे: बिल्ली की ‘म्याऊँ’ आवाज सुनकर यह समझना कि यह कुत्ता नहीं, बिल्ली है)।
- साम्यधारण / संतुलन (Equilibration): आत्मसातीकरण और समायोजन की प्रक्रियाओं के बीच संतुलन स्थापित करके संज्ञानात्मक स्थिरता प्राप्त करना।
2. संज्ञानात्मक विकास की 4 अवस्थाएं (4 Stages of Development)
- 1. संवेदी-गामक अवस्था (Sensory-Motor Stage) : 0 से 2 वर्ष
बालक अपनी ज्ञानेन्द्रियों (आँख, कान, नाक, त्वचा) और शारीरिक क्रियाओं (अंगूठा चूसना, वस्तु पकड़ना) से सीखता है। इस अवस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि **’वस्तु स्थायित्व’ (Object Permanence)** है—अर्थात आँख से ओझल होने पर भी वस्तु का अस्तित्व बना रहता है। - 2. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-Operational Stage) : 2 से 7 वर्ष
प्रतीकात्मक चिंतन का विकास होता है। इस अवस्था की मुख्य विशेषताएं हैं:- अहंकेंद्रितता (Egocentrism): बालक सोचता है कि जैसा वह देखता या महसूस करता है, बाकी सब भी वैसा ही सोचते हैं।
- जीववाद (Animism): निर्जीव वस्तुओं (जैसे गुड़िया या मेज) को सजीव समझना।
- अपलटtitled/अपरिवर्तनीयता (Irreversibility): विचारों को पीछे की ओर न मोड़ पाना (जैसे $2+3=5$ पता है, पर $5-3=2$ नहीं समझ पाता)।
- 3. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage) : 7 से 11 वर्ष
मूर्त (तार्किक) चिंतन की शुरुआत होती है। बालक में तर्क शक्ति विकसित होती है:- संरक्षण (Conservation): आकृति बदलने पर भी मात्रा समान रहती है, यह समझना (ग्लास-पानी प्रयोग)।
- पलटावी गुण (Reversibility) & वर्गीकरण/क्रमीकरण: वस्तुओं को उनके आकार या गुण के अनुसार क्रम में लगाना।
- 4. औपचारिक/अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) : 11 से 15 वर्ष (व उससे ऊपर)
अमूर्त (Abstract) एवं काल्पनिक चिंतन का विकास होता है। बालक निगमनात्मक तर्क (Deductive Reasoning), अमूर्त समस्याओं के समाधान और परिकल्पना बनाने में सक्षम हो जाता है।
3. पियाजे के सिद्धांत का शैक्षणिक महत्व (Educational Implications)
- बाल-केंद्रित शिक्षा: बच्चों को रटाने के बजाय उन्हें खोजबीन और प्रयोग करने की स्वतंत्रता देनी चाहिए।
- शिक्षक की भूमिका: शिक्षक केवल एक सुगमकर्ता (Facilitator) है जो बच्चे की आयु और अवस्था के अनुसार अधिगम वातावरण तैयार करता है।
- समीक्षात्मक सोच: बच्चों की गलतियों को उनके सीखने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए।
4. महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न (Practice MCQs)
Q1. जीन पियाजे के अनुसार ‘वस्तु स्थायित्व’ (Object Permanence) की क्षमता किस अवस्था में आती है?
उत्तर: संवेदी-गामक अवस्था (Sensory-Motor Stage – 0 से 2 वर्ष)
Q2. जब कोई बच्चा अपने पुराने ज्ञान में बिना बदलाव किए नई जानकारी को जोड़ता है, तो पियाजे के अनुसार यह क्या कहलाता है?
उत्तर: आत्मसातीकरण / समावेशन (Assimilation)
Q3. बच्चे निर्जीव वस्तुओं (जैसे- गुड़िया या कुर्सी) को सजीव समझते हैं। इस प्रवृत्ति को पियाजे ने क्या नाम दिया है?
उत्तर: जीववाद (Animism)
Q4. ‘संरक्षण’ (Conservation) और ‘पलटावी’ (Reversibility) की समझ बालक में किस अवस्था में विकसित होती है?
उत्तर: मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage – 7 से 11 वर्ष)
Q5. पियाजे ने बच्चों को किस रूप में परिभाषित किया है?
उत्तर: ज्ञान के सक्रिय निर्माता एवं नन्हे वैज्ञानिक (Little Scientists)
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